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नया सिस्टम:मंडियों में अब राशन डिपो संचालक करेंगे गेहूं की खरीद

यमुनानगर10 दिन पहले
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  • आढ़तियों ने सरकारी सिस्टम से काम करने से मना किया तो अनाज मंडियों में अब आढ़ती बने राशन डिपो संचालक
  • अगर आढ़ती विरोध करेंगे तो राइस मिल और मंडी के बाहर होगी खरीद

गेहूं का सीजन शुरू होते ही मंडी आढ़ती और सरकार आमने-सामने आए हैं। इसमें किसान और मजदूर पिस रहे हैं। वीरवार को इस लड़ाई के चलते मंडियों में खरीद नहीं हुई। क्योंकि आढ़ती सरकार के नए सिस्टम से खरीद का हिस्सा बनने को तैयार नहीं हुए। इस पर अब सरकार ने एक और नया सिस्टम लागू कर दिया है।

अब अनाज मंडियों में राशन डिपो संचालक आढ़ती होंगे। मार्केट कमेटी और खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने राशन डिपो संचालकों को बुलाया। उन्हें बताया कि इस बार गेहूं की खरीद राशन डिपो संचालक करेंगे। उन्हें आढ़ती (कमीशन एजेंट) का लाइसेंस दिया जाएगा। मीटिंग के बाद ही कुछ राशन डिपो संचालकों को अस्थाई लाइसेंस जारी भी कर दिया गया। वहीं, कुछ को दस्तावेज पूरे न कर पाने की वजह से लाइसेंस जारी नहीं हुआ।

हालांकि जिन्हें लाइसेंस जारी हुआ वे वीरवार को खरीद नहीं कर पाए, लेकिन माना जा रहा है कि शुक्रवार काे सरकार राशन डिपो संचालकों के माध्यम से खरीद शुरू करेगी। वीरवार को पूरे जिले में खरीद नहीं हुई। करीब 20 हजार क्विंटल गेहूं मंडियों में पहुंचा था। किसान खरीद के इंतजार में बैठे रहे। वहीं कुछ आढ़ती अपनी दुकानों पर भी नहीं आए।

वहीं आढ़ती नेता मीटिंग करते रहे। इससे किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जगाधरी मंडी में मार्केट कमेटी सचिव ऋषि राज यादव के साथ राशन डिपो संचालकों की मीटिंग हुई। ऋषि राज यादव ने बताया कि शाम तक तीन राशन डिपो संचालकों को अस्थाई लाइसेंस खरीद के दिए हैं। कुछ अन्य के कागजात पूरे नहीं थे। उनके कागजात पूरे होते ही लाइसेंस दिए जाएंगे। बता दें कि सात अप्रैल तक जिले की 13 मंडियों में 15014 एमटी गेहूं की खरीद हो चुकी थी ।

जिले में करीब 700 राशन डिपाे संचालक: शहर से लेकर गांव में राशन डिपो संचालक बैठे हैं। जिले में करीब 700 राशन डिपो संचालक हैं। अधिकारियों के अनुसार अगर आढ़ती हड़ताल पर रहते हैं तो गेहूं राशन डिपो संचालकों के माध्यम से खरीदने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है।

अगर आढ़ती मंडी में राशन डिपो संचालकों को गेहूं खरीदने से रोकेंगे तो राइस मिल और अन्य सरकारी स्थानों पर खरीद केंद्र बनाया जाएगा। वहां किसान गेहूं लेकर आएंगे और वहीं उनका गेहूं खरीदा जाएगा।

बहुत से राशन डिपो संचालक चाहते हैं कि उन्हें अपने एरिया में ही गेहूं खरीदने की परमिशन मिले। उधर, कई आढ़ती भी खरीद के लिए तैयार हैं। वे आढ़तियों की हड़ताल से अलग हैं। हालांकि यह क्लियर नहीं है कि वे एसोसिएशन के फैसले के खिलाफ जाकर गेहूं खरीदेंगे या नहीं।

हालांकि आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर राशन डिपो संचालकों के माध्यम से सरकार खरीद करना चाहती है तो उन्हें कोई परेशानी नहीं। वे किसी को खरीद करने से नहीं रोकेंगे ।

ये हैं आढ़तियों की मांगें

आढ़तियों की मांग है कि गेहूं की पेमेंट किसानों के सीधे खाते की बजाए आढ़तियों के माध्यम से की जाए। धान के सीजन में आढ़तियों और किसानों का करोड़ों का भुगतान गलत खातों में गया, उसकी रिकवरी की जाए। देरी से भुगतान पर ब्याज की बात सरकार कह रही है, पहले भी कहा था, लेकिन लागू नहीं किया, उसे जल्द से जल्द जारी किया जाए।

टोकन सिस्टम बंद किया जाए। सीमावर्ती किसानों को हरियाणा की मंडियों में गेहूं बेचने दिया जाए। मंडी में उठान का काम अगर मंडी एसोसिएशन करना चाहे तो ठेका उसे दिया जाए। सरकार ने बोरियों पर मार्का लगाने का आदेश दिया है। उसे रद्द किया जाए।

आढ़ती एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शिव कुमार संधाला का कहना है कि सरकार ने जो नया सिस्टम लागू किया है, उससे खरीद करना मुश्किल है। वीरवार को सरकार ने खरीद नहीं की। आढ़तियों ने किसी को खरीद करने से नहीं रोका। आढ़तियों ने किसान और मजदूरों के हित में सरकार का खरीद में सहयोग न करने का फैसला लिया है। किसी तरह की हड़ताल पर आढ़ती नहीं हैं।

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