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समस्या:स्कूल-कॉलेज की छात्राओं के लिए आई पिंक बसें कोरोना राहत कार्यों के लिए अन्य रूटों पर दौड़ रही

यमुनानगर13 दिन पहले
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  • एक माह वर्कशॉप, फिर लॉकडाउन में भी नहीं चल पाई, छात्राओं के लिए नहीं हुई पिंक बसें यूज

रोडवेज की 32 सिटर पिंक बसों की सूरत एक साल में ही बिगड़ गई है जबकि इनके रोडवेज में शामिल करने का मकसद आज भी अधूरा है। ये बसें स्कूल-कॉलेज छात्राओं के लिए चलनी थीं किंतु ऐसा नहीं हो पाया। जनवरी-2020 में डिपो पर आईं पांच पिंक बसें आरसी व इंश्योरेंस की औपचारिकताएं पूरी करने में एक माह वर्कशॉप में खड़ी रहीं। फिर कोरोना के चलते लगे लॉकडाउन में कोविड-19 के हेल्थ व अन्य राहत कार्यों के बाद पिंक बसें ग्रामीण और अब दूसरे जिलों के रूटों तक भी दौड़ रही हैं।

पहले कम यात्री वाले रूटों पर ही पिंक बसे लग रही थी किंतु ज्यादा रश वाले सहारनपुर, कुरुक्षेत्र व अम्बाला सहित ग्रामीण रूटों पर भी पिंक बसें इस्तेमाल होने लगी हैं। ऐसे में जिनके लिए यह बसें आईं, उन छात्राओं के लिए सर्विस चालू होने से पहले ही बसों के कलपुर्जे ढीले होने लगे हैं। जनवरी-2020 में आईं पांच पिंक बसों को केवल स्कूल-कॉलेज की छात्राओं के लिए 30 जनवरी-2020 से चलाने के लिए तीन रूट भी तय हुए।

इसमें यमुनानगर-छछरौली, डारपुर-छछरौली व धनौरा-अहड़वाला शामिल थे, किंतु इन रूटों पर पिंक बस सर्विस चालू होते ही मार्च में कोरोना के चलते लॉकडाउन लग गया। तब से स्कूल-कॉलज बंद हैं। इस कारण जिस मकसद से पिंक बसें रोडवेज में शामिल हुईं, वह पूरा नहीं हो पाया है।

वर्कशॉप में खड़ी 52 सिटर कई, फिर भी पिंक बसें ही यूज
लॉकडाउन के बाद से अब तक सभी रूट नहीं खुल पाए हैं। जो रूट चल भी रहे हैं, उन पर भी यात्री कम हैं। ऐसे में डिपो की सभी बसें ऑन रूट नहीं हैं और कई 52 सिटर बसें वर्कशॉप में ही रहती हैं। इसके बाद भी पिंक बसों को पहले कम यात्री वाले और अब ज्यादा रश वाले रूटों पर भी लगाया जाना सवाल खड़े कर रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो इन बसों की मेंटेनेंस का जिम्मा कंपनी को है और इनके हर माह के किलोमीटर भी तय हैं।

^ कोरोना काल में स्कूल-कॉलेज बंद होने से पिंक बसें छात्राओं के लिए नहीं चला पाए। स्कूल-कॉलेज खुलने पर छात्राओं की बस पास की स्थिति देख रूट तय कर सर्विस चलाएंगे।
लेखराज, जीएम रोडवेज, यमुनानगर।

पिंक बसों की खासियत
पिंक बसों में छात्राओं को सुरक्षा की गारंटी देने के लिए तकनीक से लैस किया गया है। चालक-परिचालक तय रूट पर चल रहे हैं या नहीं और कितनी स्पीड से चल रहे हैं, इसके लिए बसों में जीपीएस व स्पीड गवर्नर लगे हैं। इसकी मदद से अधिकारी मॉनिटरिंग कर पाएंगे।

बसों में सीसीटीवी कैमरा, इमरजेंसी डोर व अलाॅर्म भी है। बस के दरवाजे के पास बटन है, जिसके दबाने पर अलाॅर्म बजेगा और ड्राइवर गाड़ी रोक देगा। हालांकि पिंक बसें सिर्फ छात्राओं के लिए हैं लेकिन रूट पर अन्य युवतियों व महिलाओं के दिखने पर सीट खाली होने पर बसों के डोर खोले जाएंगे।

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