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लापरवाही:सरकारी प्राइमरी स्कूल बिसालपुर में लगवा दी प्राइवेट पब्लिशर की बुक्स

यमुनानगर2 दिन पहले
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स्कूल में लगवाई प्राइवेेट पब्लिशर की पुस्तकें। - Dainik Bhaskar
स्कूल में लगवाई प्राइवेेट पब्लिशर की पुस्तकें।
  • नियमानुसार एनसीईआरटी की बुक्स लगवानी होती हैं
  • इनकी कीमत भी कम, प्राइवेट पब्लिशर की जो बुक लगवाई, वे काफी महंगी

सरकार ने स्कूलों में एनसीईआरटी की बुक्स लगाने का प्रावधान किया गया है लेकिन बिलासपुर के प्राइमरी स्कूल में प्राइवेट पब्लिशर की बुक लगवा दी गई। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ा है। एनसीईआरटी की बुक जहां 20 से 30 रुपए में मिल जाती हैं। वहीं, प्राइवेट पब्लिशर की जो बुक ली जा रही, उस पर 300 रुपए मूल्य प्रिंट किया गया है। प्राइमरी स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक 500 के करीब बच्चे हैं।

इस स्कूल को सरकार ने इंग्लिश मीडियम बनाया है। यहां बच्चों की संख्या भी ज्यादा है। अध्यापकों का तर्क है कि किताबें सरकार की ओर से नहीं भेजी गई हैं। बच्चों के खाते में सरकार ने पैसे डाले हैं। इस पैसे से ही बच्चे बाजार से किताब ला रहे हैं। प्राइमरी स्कूल में कक्षा तीसरी की मैथ की बुक है।

पर्यावरण को लेकर भी कोई बुक लगाई गई है। यहां बच्चे जाकर बुक लेकर आ रहे हैं, उस पर ज्ञानम लिखा है। एमआरपी 320 रुपए लिखा है। इसी तरह दूसरी पुस्तक पर एमआरपी 190 रुपए लिखा है। इन सभी बुक्स पर ग्रीन एपल बुक्स, राम नगर, शाहदरा दिल्ली का पता भी दिखाया गया है।

अभिभावक बोले- एनसीईआरटी की लगें किताबें

अभिभावक रमेश कुमार, मनोज व संजय का कहना है कि सरकार के नियमानुसार पुस्तकें लगाई जानी चाहिए। वह सस्ते दामों में मिल जाती हैं। स्कूल की ओर से महंगे दामों वाली पुस्तकें लगवाई जा रही हैं। सरकार की ओर से कई बार पूरा पैसा नहीं दिया जाता है, जो बकाया राशि है, वह उन्हें अपने पास से देनी पड़ती है। इससे आर्थिक बोझ पड़ता है। इस बार तो खाते में अभी पैसे नहीं आए हैं।

वहीं स्कूल के अध्यापकों का कहना है कि इंग्लिश मीडियम स्कूल है। यहां शुरू से ही इस तरह की किताबें लग रही हैं। उन्होंने कोई फेरबदल नहीं किया है। स्कूल के हेड टीचर सुनील कंबोज का कहना है कि उन्होंने यह किताबें नहीं लगवाई हैं। पहले से ही इस तरह की किताबें लगी हुई हैं। सरकार की ओर से पैसे बच्चों को खाते में दिए जाते हैं। बच्चे खुद ही लेकर आते हैं। वे किसी को बाध्य नहीं करते। वैसे भी इस बार किताबें छपी नहीं हैं। बच्चों के खाते में पैसे ही डाले जा रहे हैं।

जानकारी नहीं, मामला सही मिला तो कार्रवाई की जाएगी

सरकारी स्कूल में नियमानुसार एनसीईआरटी की किताबें लगाई जाती हैं। अगर किसी स्कूल में प्राइवेट पब्लिशर की बुक लगाई जा रही है तो यह गलत है। इसकी जानकारी नहीं है। इसके बारे में पता किया जाएगा। मामला सही मिला तो अगली कार्रवाई की जाएगी।
पृथ्वी सैनी, डिप्टी डीईओ

मेरे संज्ञान में मामला अभी आया है। सरकारी स्कूल में प्राइवेट पब्लिशर की बुक लगी हैं तो सही नहीं है। इसके बारे में जानकारी ली जाएगी। उसके बाद अगर कोई कार्रवाई बनती है ताे वह अमल में लाई जाएगी।
रामदिया गागट, डीईईओ, यमुनागर।

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