स्टॉर्म वाटर ड्रेन व सड़कों के टेंडर रिकॉल:वार्ड-1, 5 व 11 के टेंडर रद्द कर किए रिकॉल, पार्षद बोले- शर्तों का अड़ंगा डाल काम लटका रहे निगम अफसर

यमुनानगरएक महीने पहले
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नई अप्रूव्ड कॉलोनियों के हालात। - Dainik Bhaskar
नई अप्रूव्ड कॉलोनियों के हालात।

सिटी के वार्ड-1, 5 व 11 में नई अप्रूव्ड कॉलोनियों के स्टॉर्म वाटर ड्रेन व पेवर ब्लॉक की सड़कों के टेंडर भी रद्द कर रिकॉल करने पड़ गए हैं। हालांकि इन वार्डों के पहली बार लगे टेंडर में कई फर्मों व ठेकेदारों से बिड आईं, पर टेक्निकल बिड ओपनिंग में शर्तें पूरी न करने पर टेंडर रद्द करने पड़े। इन्हें रिकॉल कर नए सिरे से बिड मांग ली है। उधर, इससे नाराज पार्षदों का कहना है कि पहले ही दो साल टेंडर प्रक्रिया में निकल चुके हैं वहीं अब भी शर्तों का अड़ंगा डाल अफसर नई अप्रूव्ड कॉलोनियों में पक्की गलियों व नालियों के काम को लटका रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले वार्ड-12, 21 व 22 के टेंडर भी रद्द कर रिकॉल किए जा चुके हैं। उनमें 13 दिसंबर तक एजेंसियों व ठेकेदारों से बिड मांगी है वहीं अब वार्ड-1, 5 व 11 के रिकॉल किए टेंडर में 17 दिसंबर तक बिड मांगी है। पहली बार लगे टेंडर में 89.71 लाख एस्टिमेट पर लगे वार्ड-1 के टेंडर में चार, 1.41 करोड़ एस्टिमेट पर लगे वार्ड-5 के टेंडर में दो व 1.76 करोड़ एस्टिमेट पर लगे वार्ड-11 के टेंडर में पांच व 1.71 करोड़ एस्टिमेट पर लगे वार्ड-11 के टेंडर में 5 एजेंसियाें व ठेकेदारों से बिड आई थी लेकिन टेक्निकल बिड ओपनिंग में शर्तें पूरी न करने सहित अन्य कमियों का हवाला देकर टेंडर रद्द कर दिया वहीं इन्हें नए सिरे से बिड लेने के लिए रिकॉल भी कर दिया है।

2 साल से टेंडर में अटके काम| 69 कॉलोनियों में अप्रूव्ड होने के 3 साल में भी पक्की गलियां-नालियां नहीं मिल पाई हैं। हालांकि यहां स्ट्रॉम वाटर ड्रेन समेत रोड निर्माण का दो साल से 22.44 करोड़ बजट है, पर काम टेंडर से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सितंबर-2019 में दो बार लगे सिंगल टेंडर के विरोध के बाद वार्डवाइज टेंडर के तैयार एस्टिमेट पर नवंबर-2021 में टेंडर हो पाए थे, वो भी पहली बार में टेक्निकल शर्तों के पेंच में रद्द कर रिकॉल करने पड़ गए हैं।

टेंडर कब लगाते व रद्द कर रिकॉल होते, ये नहीं बताते अफसर| वार्ड-5 से पार्षद विनय कांबोज ने कहा कि हाउस में प्रस्ताव पास है कि जिस वार्ड के टेंडर हों, उसके पार्षद को उसकी कॉपी भेजी जाए। आगे भी उन्हें टेंडर स्टेटस बताया जाए लेकिन उनके वार्ड के टेंडर कब लगते व रद्द कर रिकॉल होते हैं, यह अब भी अफसर नहीं बताते। तीन साल से अप्रूवड कॉलोनियों की पक्की गलियां व नालियां नहीं मिल पाईं। इसके लिए दो साल टेंडर प्रक्रिया में निकल गए वहीं अब भी अफसर टेंडर की शर्तों का अड़ंगा डाल काम को लटका रहे हैं।

बार-बार टेंडर में पैसा व समय व्यर्थ: राणा
वार्ड-20 से पार्षद प्रतिनिधि नीरज राणा ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से तीन साल से अप्रूव्ड होने के बाद भी 69 कॉलोनियों में पक्की गलियां-नालियां न होने से लोग दिक्कत झेल रहे हैं। साथ ही बार-बार टेंडर किए जाने से एजेंसियों या ठेकेदारों का भी पैसा व समय व्यर्थ हो रहा है। बिड फाइल तैयार करने से लेकर अन्य काम में एजेंसियों व ठेकेदारों का खर्च होता है इसलिए शर्तों काे सरल कर टेंडर अलॉट कर जल्द काम पूरा कराना चाहिए अन्यथा टेंडर में किसी एजेंसी या ठेकेदार का मिलना मुश्किल होगा।

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