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पासिंग सिस्टम में खेल:ट्रकों की चेसिस नंबर का वीडियो बना पासिंग की मुहर लगा रहे आरटीए अधिकारी

यमुनानगर2 महीने पहले
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  • पूरी गाड़ी को चेक करने की बजाए दलालों के इशारे पर खानापूर्ति कर रहा आरटीए कार्यालय, हेडलाइट से लेकर बॉडी स्ट्रक्चर पर नहीं कोई ध्यान

रिजनल ट्रांसपोर्ट कार्यालय ट्रकों की पासिंग को लेकर चल रहा खेल किसी से छुपा नहीं है। यहां पर सक्रिय दलालों के इशारे पर गाड़ी की पासिंग में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। आरटीए कार्यालय के सामने मिलिट्री ग्राउंड में जहां पर वाहनों की पासिंग होती है वहां पर पहुंचने के बाद पासिंग सिस्टम को समझने के लिए ज्यादा समय नहीं लगता। नियमानुसार लंबी लिस्ट के हिसाब से जांच के स्थान पर जिम्मेदार ट्रकों की चेसिस नंबर का वीडियो बनाकर ही पासिंग की मुहर लगाई जा रही है।

इससे ट्रक मालिकों, चालकों व अधिकारियों का भले ही समय बच रहा है, लेकिन राहगीरों की जान से खिलवाड़ भी हो रहा है। हमारे यहां सबसे अधिक हादसे अनफिट वाहनों की वजह से होते हैं, लेकिन अधिकारी जिम्मेदारी के नाम पर पल्ला झाड़ लेते हैं।

आरटीए इंस्पेक्टर पूर्ण सिंह ने बताया कि अगले पासिंग डे पर सारी व्यवस्था की खुद जांच करूंगा। कहीं पर कोई कमी मिली तो इस काम में जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है उनसे भी जवाब मांगा जाएगा। वाहन की पासिंग सुरक्षा मानकों की जांच के लिए होती है। सुरक्षा में चूक को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

2 घंटे में 40 गाड़ियाें को मिल जाता है पासिंग सर्टिफिकेट
पासिंग में चल रहे खेल को समझने के लिए गाड़ी की चेकिंग के नियम को जानना जरूरी है। नियमानुसार यदि एक गाड़ी को चेक किया जाए तो इसमें 20 से 25 मिनट का समय लगेगा। लेकिन मिलिट्री ग्राउंड में तो दो घंटे में 40 से 45 गाड़ियों को पास का सर्टिफिकेट मिल जाता है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी वाहनों की फिटनेस को लेकर कितने गंभीर हैं।

यहां के मिलिट्री ग्राउंड में ट्रक, टाटा एस, मैक्सी कैब, स्कूल बस, बसों की पासिंग की जाती है। यहां पासिंग होते हुए देखा तो समझ आया कि जिस कार्य में आधा घंटा लगना चाहिए वह सैकड़ों में ही काम किया जा रहा है। ऐसे 3-4 वाहन ही थे जिनको कागजों की कमी में वापस भेजा गया। बाकी वाहनों पर पासिंग कर दी गई। कारण यही रहा कि ट्रकों की गंभीरता के साथ चेकिंग ही नहीं की गई।

नियमनुसार... इन चीजों की करनी होती है जांच, हर पार्ट की जांच करने में लगभग इतना लगता है टाइम

  • लाइट, विंड स्क्रीन वाइपर, हॉर्न, स्पीडोमीटर, रियर व्यू मिरर। जांच में दो मिनट लगेंगे।
  • रॉड व्हील: इसकी जांच के लिए जैक लगाकर संतुलन को जांचा जाता है। 10 से 15 का समय की जरूरत है।
  • फुट ब्रेक, सर्वो इक्यूपमेंट: इसकी जांच वाहन को चलाने पर ही होती है। इसमें 7 से 8 मिनट लग सकते हैं।
  • इंस्ट्रूमेंट गेज: इसी से मोबिल ऑयल की जांच की जाती है। इसकी जांच 1 से 2 मिनट में हो जाती है। लेकिन मिलिट्री यहां तो बोनट तक नहीं खोला जाता है।
  • फ्यूल सिस्टम: तेल टंकी से लेकर इंजेक्टर पाइप तक सभी पार्ट्स की जांच होती है। 2 से 3 मिनट का समय।
  • फरेंशियलः यह ठीक है या नहीं, आवाज से ही पता चल जाता है, जांच में 10 से 12 मिनट लगते हैं।
  • फ्रंट एक्सल रियर: यह व्हील से जुड़े होते हैं। जांच नट-बोल्ट के माध्यम से होती है। पांच से छह मिनट लगते हैं।
  • हैंड ब्रेक: इसकी जांच भी अन्य जांच के साथ हो जाती है।
  • चेसिस फ्रेम: गार्टर बैड कटे मुड़े तो नहीं है। यह जांचने में पांच मिनट का समय लगता है।
  • बॉडी की कंडीशन: वाहन की लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई मापी जाती है कि यह रूल्स के अनुसार है या नहीं। दस से 11 मिनट।
  • स्टीयरिंग: स्टीयरिंग बैक लेश घूम रहा है या नहीं, रॉड एंड ठीक है या नहीं आदि।
  • रॉड स्प्रिंग एंड सस्पेंशन: इसे कमानी और शॉकर भी कहते हैं। इनकी जांच में ज्यादा समय नहीं लगता, लेकिन यहां पर कोई देखता तक नहीं।
  • पेंट वर्क: कुशन-कर्टन, टूल बॉक्स, स्पेयर व्हील, लगेज करियर आदि। देखने से जांच अलग समय नहीं।
  • प्रोपेलर शाफ्ट: यह क्लच से जुड़ी होती है। डिफरेंशियल (गुच्छे) को चाल देता है। क्लच सही तो यह भी।
  • क्लचः एक इंच तक फ्री प्ले है या नहीं, फेन बेल्ट आधा इंच तक। जांच में एक मिनट लगेगा।
  • गियर बॉक्स: इसमें क्लच दबाकर सारे गियर लगाकर चेक किया जाता है। जांच एक मिनट में, लेकिन जांच अधिकारी गाड़ी में चढ़ते तक नहीं है।
  • इंजनः गाड़ी को स्टार्ट करके ऑयल प्रेशर, टेंपरेचर को देखते हैं। कम से कम 18 मिनट।
  • हां या न में जवाब: फेयर टेबल, टाइम शेड्यूल, बैठने की व्यवस्था का ब्लू प्रिंट, रजिस्ट्रेशन मार्क, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, शिकायत पेटी, वजन, टायर का आकार शामिल हैं।
  • मेक एंड मॉडल, पंजीकरण की डेट, बॉडी का प्रकार, चेसिस नंबर, इंजन नंबर, व्हील बेस की जानकारी, सीटों की क्षमता, टायर के नंबर और साइज, नवीनतम फिटनेस सर्टिफिकेट वैधता, पंजीकृत ऑनर का नाम पता अन्य रिमार्क की जानकारी होती है। साथ ही परमिट, इंश्योरेंस, व्हीकल टैक्स, पैसेंजर टैक्स, गुड्स टैक्स के बारे में जानकारी भी ली जाती है।
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