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3 बिल्डर्स पर केस:साई के डिप्टी डायरेक्टर ने चाहड़ो में बन रहे ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण में पकड़ी 24 लाख की गड़बड़ी

यमुनानगर2 दिन पहले
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यमुनानगर| वेट लिफ्टिंग एकेडमी का अधूरा पड़ा काम। - Dainik Bhaskar
यमुनानगर| वेट लिफ्टिंग एकेडमी का अधूरा पड़ा काम।
  • ओलिंपिक मेडल विजेता कर्णम मल्लेश्वरी के सपनों का सेंटर बनाने में ठगी
  • आरोप- निर्माण नियम अनुसार नहीं किया और न ही समय पर किया
  • साई डिप्टी डायरेक्टर की जांच में 24 लाख ज्यादा पेमेंट ठेकेदार को गई, सरकार ने एकेडमी खोलने के लिए 5 करोड़ दिए थे

देश के युवाओं को वेट और पॉवर लिफ्टिंग की ट्रेनिंग देने के लिए गांव चाहड़ो में बन रहे ओलिंपिक मेडल विजेता कर्णम मल्लेश्वरी के सेंटर में साई सोनीपत की टीम को बड़ी गड़बड़ी मिली। आरोप है कि यहां पर एकेडमी का निर्माण करने वाले बिल्डर ने काम कम किया और 24 लाख से ज्यादा की पेमेंट ले ली। इस रिपोर्ट के बाद कर्णम मल्लेश्वरी ने शिकायत पुलिस को दी जिस पर सदर जगाधरी थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

सदर थाना एसएचओ सुभाष चंद ने बताया है कि हमने शिकायत पर पंचकूला के पिरामिड बिल्डर्स के अनुज अग्रवाल, निकुल अग्रवाल और नितिन अग्रवाल पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बिलों की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। मल्लेश्वरी देश की पहली महिला ओलिंपिक मेडल विजेता हैं। उन्होंने साल 2000 में सिडनी में हुए ओलिंपिक मेें मेडल जीता था। वहीं यमुनानगर में वे शादीशुदा हैं। पिछले दिनों सरकार ने उन्हें दिल्ली की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की वीसी नियुक्त किया है।

युवाओं को कोचिंग देकर मेडल दिलाना चाहती थी इसलिए एकेडमी खोल रहीं : कर्णम

कर्णम मल्लेश्वरी ने शिकायत में बताया कि वह युवाओं को वेट लिफ्टिंग खिलाड़ी बनाने के लिए कोचिंग देना चाहती हैं। इसके लिए गांव चाहड़ाे में वेट लिफ्टिंग एवं पॉवर लिफ्टिंग हाई परफार्मेंस ट्रेनिंग एंड कोचिंग सेंटर बन रहा है। उन्हें खेल मंत्रालय की ओर से अनुमति मिल गई थी। वहीं सरकार ने उनके कर्णम मल्लेश्वरी फाउंडेशन को 5 करोड़ रुपए दिए थे जिससे वे सेंटर का निर्माण करा सकें।

फरवरी 2019 में इसको लेकर टेंडर लगा। मैसर्स पिरामिड बिल्डर्स की ओर से 5 करोड़, 76 लाख, 36 हजार व 75 रुपए की बिड दी गई जिसे स्वीकार कर लिया गया और उन्हें 10 माह में यह काम करना था। अगर समय पर काम नहीं हुआ तो नियम अनुसार कंपनसेशन ऑफ डिले का प्रावधान भी रखा गया लेकिन बिल्डर ने काम सही नहीं किया और धीमी गति से किया। उसे काम में तेजी के लिए बोला तो वह लेबर की कमी की दिक्कत बता देता था।

अपने स्तर पर कराया सामग्री का टेस्ट तो रिपोर्ट फेल

आरोप है कि बिल्डर ने हॉस्टल बिल्डिंग की राफ्ट 4550 एमएम से ऊपर गलत कास्त की। तब बिल्डर को कंस्ट्रक्शन टेस्ट कराकर क्वालिटी स्ट्रेंथ का सर्टिफिकेट मांगा लेकिन वह नहीं दिया। फाउंडेशन ने श्रीराम इंस्टीट्यूट फॉर इंडस्ट्रियल रिसर्च दिल्ली से बिल्डर द्वारा किए गए काम की जांच कराई। इसमें किया गया काम नियम अनुसार नहीं मिला। रिबाउंड हेमर टेस्ट के अनुसार भी धरातल की मजबूती भी नियम अनुसार नहीं थी। एनआईटी कुरुक्षेत्र और डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ऑफ हरियाणा ने भी निर्माण कार्य की जांच की। उसमें रिपोर्ट फेल आई।

बैंक गारंटी रिन्यू नहीं कराई, जब्त नहीं की जा सकी

शिकायत के अनुसार बिल्डर ने फाउंडेशन के नाम 32 लाख, 21 हजार 620 रुपए की बैंक गारंटी दी थी जोकि 31 मार्च 2020 को खत्म हो चुकी है। बिल्डर ने आगे उसे रिन्यू भी नहीं कराया जिससे गलत काम न करने पर उसे जब्त नहीं किया जा सका। बिल्डर द्वारा सही काम न करने पर दोनों पक्षों के बीच 27 जून 2020 को एक समझौता हुआ। बिल्डर को उन्हें क्वालिटी प्रमाण पत्र देना था, लेकिन नहीं दिया।

दोनों पक्षों में समझौता हुआ लेकिन साई के डिप्टी डायरेक्टर की रिपोर्ट बनी केस का आधार]

पिरामिड बिल्डर और फाउंडेशन के बीच समझौता हो गया। बिल्डर आगे काम नहीं करेेगा। इस पर फाउंडेशन ने दोबारा काम शुरू करने की खेल मंत्रालय से परमिशन लेनी थी। परमिशन से पहले डिप्टी डायरेक्टर साई सोनीपत ने निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर किए गए काम की पैमाइश कराई।

वहीं उन्होंने 15 दिसंबर 2020 को अपनी रिपोर्ट भेजी जिसमें उन्होंने कहा कि मौके पर दो करोड़, तीन लाख, 65 हजार, 488 रुपए का ही काम हुआ है जबकि बिल्डर ने गलत पैमाइश की रिपोर्ट देकर उनसे दो करोड़, 28 लाख, 35 हजार, 371 रुपए की पेमेंट ले ली।

इस तरह से बिल्डर ने उनसे 24 लाख, 69 हजार व 883 रुपए की पेमेंट ज्यादा ली। वहीं शिकायत में यह भी कहा गया है कि टेंडर की शर्त के अनुसार बिल्डर बिल अमाउंट पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाएगा लेकिन उसने 18 प्रतिशत जीएसटी लगाई। आरोप है कि इस फाउंडेशन की ओर से रखे गए प्रोजेक्ट के मैनेजर संजय गुप्ता को गुमराह कर ज्यादा बिल पास कराए या फिर संजय गुप्ता के साथ मिलीभगत कर ऐसा किया है। पुलिस ने धारा-420 और 406 में केस दर्ज किया है।

सेटलमेंट से पहले सब क्लियर हुआ था, पैसे और सामान न देने पड़े इसलिए केस कराया

अनुज अग्रवाल ने कहा कि वह पिरामिड बिल्डर्स फर्म में पार्टनर है। 28 मार्च 2019 को उनका कर्णम मल्लेश्वरी फाउंडेशन के साथ जो एग्रीमेंट हुआ था, उसमें विवाद होने के चलते 27 जून 2020 को दोनों पक्षों में सेटलमेंट एग्रीमेंट लिखा गया था और पहले हुआ एग्रीमेंट कैंसिल कर दिया था।

सेटलमेंट एग्रीमेंट लिखे जाने से पहले निरीक्षण किया गया। वहीं जो पेमेंट हुई, वह पैमाइश और बिलों के हिसाब से हुई। वहीं जो सामान वहां पड़ा था, वह उठाने की भी सहमति हुई थी। उसमें 10 लाख रुपए का सरिया और लेबर के क्वार्टर और उनके ऑफिस की कीमत 7 लाख रुपए लगाई गई थी। उनके करीब 39 लाख रुपए फाउंडेशन को देने हैं। उन पर झूठे आरोप लगाकर केस दर्ज कराया गया है।

यह देश का प्रोजेक्ट है, हमनेे 2 एकड़ जमीन दी

कर्णम मल्लेश्वरी के पति राजेश त्यागी ने बताया कि यह देश का प्रोजेक्ट है। यहां देशभर के युवाओं को खिलाड़ी बनाया जाना है, लेकिन इसमें भी बिल्डर ने धोखाधड़ी की। उन्होंने इस एकेडमी के लिए अपनी दो एकड़ जमीन दी हुई है। पैसा सरकार दे रही है। उनका कहना है कि अब इस एकेडमी का फिर से काम शुरू करा दिया है। इस बार लेबर कॉन्ट्रेक्टर से काम कराया जा रहा है।

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