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एलईडी लाइट प्रोजेक्ट पर कमेटी चेयरमैन ने मांगी रिपोर्ट:काम पूरा न होने की जायज वजह न बताने पर एजेंसी पर गिर सकती गाज

यमुनानगर10 दिन पहले
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  • विस पिटीशन कमेटी की डेडलाइन पूरी होने के बाद भी 8 वार्डों में एलईडी लाइट प्रोजेक्ट अधूरा

सिटी के आठ वार्डों में एलईडी लाइट प्रोजेक्ट दो साल में भी अधूरा है। शुरुआत में प्रोजेक्ट के तहत निगम लगाईं लाइटों की गुणवत्ता व बिलिंग व गारंटी पर उठे सवालों पर विधानसभा पिटीशन कमेटी डेढ़ साल जांच ही चली।

इसमें कई कमियों पर कार्रवाई से पहले काम पूरा करने के लिए कमेटी ने 31 अगस्त की अंतिम डेडलाइन दी थी, पर शायद इसे ठेकेदार व निगम अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। तभी अब भी प्रोजेक्ट के तहत काम पूरा नहीं है। इस पर विस पिटीशन कमेटी के चेयरमैन एवं एमएलए घनश्याम अरोड़ा ने कड़ा संज्ञान लेकर निगम अफसरों से प्रोग्रेस रिपोर्ट मांग ली है। इसमें काम पूरा न होने की जायज वजह न बताने पर एजेंसी व अफसरों पर गाज गिर सकती है।

बतादें कि अक्टूबर-2019 में 4-4 वार्ड के अलग-अलग दो टेंडर लगे थे। वार्ड-2 में 49.17, 8 में 49.83, 9 में 49.58, 21 में 50.00, 6 में 43.64, 10 में 40.04, 15 में 41.32, 19 में 40.06 लाख रुपए यानी कुल अनुमानित लागत 3.63 करोड़ से दोनों टेंडर रिप्लेसमेंट एंड इंप्रूवमेंट ऑफ स्ट्रीट लाइट वर्क के थे। काम शुरू होने पर पार्षदों ने लाइट्स की गुणवत्ता पर सवाल कर मेयर व विधायक को शिकायत दे दी।

बाद में पूर्व सी. डिप्टी मेयर पवन बिट्टू व मौजूदा सी. डिप्टी मेयर प्रवीन शर्मा ने विस पिटीशन कमेटी में शिकायत दी। तब तक कुल 8100 में 3000 पॉइंट्स पर लाइट लग चुके थे। 5100 लाइटें लगाने का लटक गया। विस पिटीशन कमेटी की लंबी जांच में पुरानी लगी 3000 पॉइंट्स पर खराब व बंद हुई लाइटों को विस पिटीशन कमेटी के आदेश पर चालू कर दिया।

नए नियम के तहत उनका सभी पोल पर नंबरिंग लिख रिकॉर्ड रखा गया और पार्षदों से संतुष्टि पत्र लिए गए। अब बकाया 5100 पॉइंट्स पर लाइट लगाने का काम प्री-डिस्पेच इंस्पेक्शन के नए नियम को पूरा करते हुए 31 अगस्त तक पूरा करना था। ऐसा न करने पर कमेटी ने लाइट लगाने वाली एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की चेतावनी दी थी।

14 वार्ड के टेंडर नहींः वार्ड-4 से पार्षद देवेंद्र सिंह ने कहा कि विस पिटीशन कमेटी की जांच में काम में मिली कमियों के जिम्मेदार अफसरों के न तो नाम उजागर किए न उन पर कोई कार्रवाई की। टेंडर से लेकर वर्क अलॉट करने वाले अफसरों में कइयों का तबादला हो गया वहीं, डेपुटेशन वाले भी वापस अपने विभागों में लौट गए। जांच के नाम पर काम रोक आठ वार्डों के साथ अन्य 14 वार्डों में भी एलईडी लाइट के टेंडर न होने से लोगों को परेशान किया गया।

गठित टीम ने गिनाईं काम की कमियां

विस पिटीशन कमेटी की गठित तीन सदस्य टीम ने खुद ही जांच में मिली कमियां गिनाईं। टीम में शामिल गिरीश पुरी की मानें तो आठों वार्डों में लगे 3000 लाइट का कोई रिकॉर्ड नहीं था। पोल नंबरिंग न होने से एक-एक लाइट गिनना मुश्किल था। ऐसे में एक ही लाइट कई जगह लगी दिखाकर निगम को नुकसान पहुंचाने का अंदेशा था। इसलिए पोल नंबरिंग कर लगीं सभी लाइट चालू कर पार्षदों से संतुष्टि पत्र व आसपास के लोगों के साइन लेने का नियम बनाया। लाइटों की बिलिंग भी सही नहीं थी, जिससे पांच साल की गारंटी को क्लेम नहीं किया जा सकता था। इसलिए सही बिलिंग व गारंटी कार्ड सहित प्री डिस्पैच इंस्पेक्शन के नियम बनाए।

31 अगस्त तक आठ वार्डों में एलईडी लाइट प्रोजेक्ट पूरा करने की डेडलाइन दी थी। इसे लेकर नगर निगम अफसरों से प्रोग्रेस रिपोर्ट मांग ली गई है। इसके आधार पर अगामी कार्रवाई अंजाम देंगे।-
विधायक घनश्यामदास अरोड़ा, चेयरमैन, विस पिटीशन कमेटी।

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