मिला आश्वासन:कपालमोचन मेला लगवाने की मांग लेकर शिक्षा मंत्री के पास पहुंचे संत-महंत

यमुनानगर2 महीने पहले
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शिक्षा मंत्री के पास पहुंचे संस्थाओं के पदाधिकारी। - Dainik Bhaskar
शिक्षा मंत्री के पास पहुंचे संस्थाओं के पदाधिकारी।
  • शिक्षामंत्री कंवरपाल ने संतों को दिया मेले की परमिशन दिलाने का प्रयास करने का भरोसा, उधर, प्रशासन ने 18 को मीटिंग बुलाई, उसमें होगा मेला लगाने बारे फैसला

तीर्थ स्थल कपालमोचन मेला लगाने को लेकर प्रशासन ने फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया। मेला लगाने की परमिशन देने की मांग को लेकर कपाल मोचन धार्मिक स्थलों के संत-महंत और धर्मशालाओं के पदाधिकारी शिक्षा मंत्री कंवरपाल के आवास पर पहुंचे। उन्होंने मांग रखी कि इस बार कपाल मोचन मेला लगना ही चाहिए।

अगर नहीं लगा तो धार्मिक स्थल और धर्मशालाएं संभालनी मुश्किल हो जाएगा। पिछले साल मेला न लगने से लाखों रुपए का दान नहीं आया। इससे आर्थिक हालत बिगड़ गई। अगर इस बार भी नहीं लगता तो दिक्कत और बढ़ेगी। इस दौरान शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने डीसी से बात की। वहीं संतों और अन्य लोगों को आश्वासन दिया कि मेले की परमिशन दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसे लेकर वे सीएम से बात करेंगे।

इस आश्वासन पर संत-महंत और धर्मशालाओं के पदाधिकारी लौट गए। एसजीपीसी सदस्य बलदेव सिंह कायमपुर, संत निर्मल दास, सरदार नरेंद्र सिंह, मांगेराम, रिषीपाल, कुलदीप, नरेश कुमार, मास्टर जगीर सिंह समेत अन्य ने कहा कि मेला लगाने की परमिशन न मिलने से लाखों लाेगों की धार्मिक भावना प्रभावित हो रही है। वहीं, किसान से लेकर मजदूर, दुकानदार और व्यापारी को आर्थिक हानि हो रही है। इसलिए इस बार मेला लगाने की परमिशन दी जाए। 18 को फैसला होगा| बिलासपुर एसडीएम जसपाल सिंह ने बताया कि कपालमोचन मेला लगाने बारे 18 अक्टूबर को मीटिंग होनी है। उसी में तय होगा कि मेला इस बार लगेगा या नहीं।

दो से तीन करोड़ का दान आता है मेले में, करोड़ों का बिजनेस भी

कपालमोचन मेले में हरियाणा के साथ-साथ पंजाब, यूपी, हिमाचल प्रदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं। कई दिन तक चलने वाले इस मेले में करोड़ों रुपए का दान धार्मिक स्थलों पर आता है। यहां दो गुरुद्वारे, एक कार सेवा का डेरा समेत कई मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल हैं। सबसे ज्यादा चढ़ावा गुरुद्वारे में चढ़ता है। सभी धार्मिक स्थलों की बात करें तो दो से तीन करोड़ का दान आता है। वहीं हजारों दुकानदार यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। करोड़ों का कारोबार कर ये लोग जाते हैं। श्राइन बोर्ड को करीब 50 लाख की इनकम मेले में होती थी। इसके साथ ही करोड़ों रुपए का व्यापारी जगाधरी बर्तन व्यापारियों का होता है। मेले में आने वाले लोग वापस जाते समय यहां से बर्तन खरीद कर ले जाते हैं। इससे यहां करोड़ों का व्यापार होता है।

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