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यमुनानगर:पड़ोसी के संबंध बनाने से हुआ था बेटा, 30 साल बाद पिता साबित करने के लिए कोर्ट में पहुंचा बैंक मैनेजर, 22 को सुनवाई

यमुनानगर8 महीने पहले
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  • जैविक पिता साबित करने के लिए बैंक मैनेजर ने कोर्ट में डाला केस, लव मैरिज कर घर आया तो खुला था राज
  • जिसे याचिकाकर्ता जैविक पिता साबित करने की लड़ाई लड़ रहा, वह डीएनए टेस्ट कराने से कर चुका मना

पड़ोसी के संबंध बनाने से पैदा हुआ बेटा कई साल से अपना पिता साबित करने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। पेशे से बैंक मैनेजर यह युवक जब अपनी मर्जी से लड़की से लव मैरिज कर घर लेकर आया तो उस व्यक्ति ने उसे घर में एंट्री करने से रोक दिया और कहा कि वह उसका बेटा नहीं है। इसके बाद उसने अपनी मां से पूछा कि आखिर उसका पिता कौन है। मां ने भी पूरा राज बेटे के सामने खोल दिया।

इसके बाद युवक उस व्यक्ति के पास गया जिससे उसकी मां के संबंध बनाने से वह पैदा हुआ था। लेकिन उसने भी उसे अपना बेटा मानने से मना कर दिया। इसके बाद मामला अब कोर्ट में पहुंच गया है। कोर्ट ने युवक द्वारा किए गए दावे की सच्चाई के लिए डीएनए टेस्ट के ऑर्डर कर दिए। लेकिन व्यक्ति ने डीएनए करने से मना कर दिया।

इसको लेकर वह हाईकोर्ट भी गया, लेकिन हाईकोर्ट ने उसकी याचिका डिसमिस कर दी। इसके बाद उसने कोर्ट में कहा कि वह डीएनए नहीं कराना चाहता। जिस पर कोर्ट ने कहा कि अगर वह ऐसा नहीं कराना चाहता तो फैसला उसके खिलाफ जा सकता है। मामले की सुनवाई फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज डॉ. अब्दुल मजीद की कोर्ट में 22 अक्टूबर को होनी है। इस मामले में कोर्ट उस दिन फैसला दे सकती है। याचिकाकर्ता एडवोकेट राजपाल सिंह खजूरी ने बताया कि केस फाइनल बहस में है। जिसे याचिकाकर्ता जैविक पिता साबित करने की लड़ाई लड़ रहा है वह डीएनए टेस्ट कराने से मना कर चुका है। हम कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से सभी सबूत रख चुके हैं।

30 साल से पहले घर में अकेली पाकर पड़ाेसी ने महिला के साथ बनाए थे संबंध
रादौर ब्लॉक के एक गांव के परिवार का यह मामला जब घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर कोर्ट में पहुंचा तो एक-एक कर सभी राज खुलते चले गए। सामने आया कि याचिकाकर्ता युवक जिसे बचपन से अपना पिता मानता रहा था वह गांव के जमीदार परिवार के यहां नौकरी करता था। करीब 31 साल पहले उसकी मां घर पर अकेली थी। पति और परिवार के अन्य लोग अस्पताल गए हुए थे।

तभी मौका पाकर पड़ोसी ने उसकी मां के साथ संबंध बनाए। इस दौरान वह गर्भवती हो गई और उसने साल 1990 में लड़के को जन्म दिया। तब यह बात लड़के की मां और मां के पति के बीच ही थी। लेकिन धीरे-धीरे बात बाहर आती गई। लेकिन कभी इसको लेकर न कोई एतराज हुआ और न ही विवाद। बताते हैं जिसके संबंध बनाने से युवक पैदा हुआ था वह गांव से यमुनानगर में शिफ्ट हो गया था।

बच्चा बड़ा हुआ और पढ़ लिख कर बैंक में मैनेजर लग गया। इसी बीच उसने अपनी मर्जी से शादी कर ली। जब पत्नी को लेकर घर गया तो जिसे वह बचपन से पिता मानता आ रहा था उसने घर में एंट्री नहीं दी और कहा कि वह उसका बेटा नहीं है। हालांकि जिसे युवक बचपन से पिता मानता रहा था उसकी अब मौत हो चुकी है। उसकी मां के पास पहले एक बेटा है। वहीं जिस पड़ोसी से संबंध बनाने से याचिकाकर्ता पैदा हुआ है उसके पास दो बच्चे हैं।

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