ट्रैक जाम:लॉकडाउन से बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेन के ठहराव के लिए 3 घंटे रेलवे ट्रैक पर बैठे रहे ग्रामीण

यमुनानगर2 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
पैसेंजर ट्रेन के ठहराव को लेकर ट्रैक पर बैठे किसान नेता व ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
पैसेंजर ट्रेन के ठहराव को लेकर ट्रैक पर बैठे किसान नेता व ग्रामीण।
  • एडीआरएम ने मुस्तफाबाद स्टेशन पर 21 तक एक पैसेंजर ट्रेन के ठहराव का दिया आश्वासन

मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर कई गांव के लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इस दौरान कई ट्रेनें रेलवे को रास्ते में रोकनी पड़ी। वहीं दो ट्रेनें मुस्तफाबाद रेलवे स्टेशन पर ही रोकी गई। रेलवे ट्रैक पर बैठने से पहले ग्रामीणों ने स्टेशन के पास महापंचायत की थी। ग्रामीण वहां सुबह करीब 10 बजे पहुंच गए थे। तब उन्होंने कहा कि आधे घंटे का समय है। अगर रेलवे के अधिकारी मौके पर आकर उनकी बात नहीं सुनते तो वे रेलवे ट्रैक पर बैठ जाएंगे लेकिन दो घंटे तक ट्रेन के ठहराव का भरोसा देने के लिए कोई सीनियर अधिकारी नहीं पहुंचा।

इस पर लोग करीब 12 बजे रेलवे ट्रैक पर जाकर बैठ गए। ग्रामीण वहां पर करीब तीन घंटे बैठे रहे। वहीं पर दोपहर का खाना खाया और नींद आई तो वहीं पर लेट गए। इसके बाद करीब सवा तीन बजे एडीआरएम आए। उन्होंने कहा कि फिलहाल एक पैसेंजर ट्रेन का इस स्टेशन पर ठहराव करने का फैसला लिया है। यह ट्रेन सुबह और शाम के समय यहां पर रुकेगी। इस ट्रेन का ठहराव 21 जनवरी या इससे पहले शुरू हो जाएगा। एडीआरएम के इस आश्वासन पर लोग रेलवे ट्रैक खाली करने को तैयार हो गए। किसानों की महापंचायत में भाकियू नेताओं के साथ-साथ रादौर विधायक बीएल सैनी समेत अन्य कांग्रेसी नेता पहुंचे थे।

हम 29 दिसंबर को डीआरएम से मिले थे, उनके आश्वासन पर भी नहीं रुकी ट्रेन
ग्रामीणों ने बताया कि ट्रेन के ठहराव को लेकर कई बार अधिकारियों से मिले लेकिन हर बार झूठा आश्वासन मिला। 29 दिसंबर को डीआरएम को मिले थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि एक सप्ताह में ट्रेन का ठहराव शुरू करा देंगे लेकिन नहीं कराया। शुक्रवार को धरनास्थल पर पहुंचे एक अधिकारी ने कहा कि 30 जनवरी तक शुरू करा देंगे लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी।

भाकियू जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना, हरपाल सिंह, मनदीप, कुलवंत, कश्मीरी लाल, मनमोहन, कृष्ण दौलतपुर, रवि मथानिया, प्रदीप व अमनदीप समेत अन्य ने बताया कि साल 2020 में जब कोरोना आया, उससे पहले यहां आठ से नौ ट्रेनों का ठहराव होता था लेकिन कोरोना के बाद से सभी ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया। दो साल होने को है, यहां पर एक भी ट्रेन नहीं रुकती। इस रेलवे स्टेशन से करीब 50 गांव लगते हैं। इन 50 गांवों से हर दिन हजारों की संख्या में लोग अम्बाला, सहारनपुर समेत अन्य शहरों में अपने-अपने काम के लिए जाते थे लेकिन ट्रेनों का ठहराव न होने से ये लोग अपने प्राइवेट वाहनों पर जाते हैं या फिर बसों में धक्के खा रहे हैं।

खबरें और भी हैं...