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अधिकारियों की लापरवाही:मानकपुर में खुले में लगाई जिस गेहूं से देश के गरीबों की रोटी बननी थी, उसे कीड़े खा गए, यूपी से लौटाई

यमुनानगर7 दिन पहले
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यमुनानगर|खराब हुई गेहूं के कट्टों को अलग रखा हुआ।
  • सही रख-रखाव न होने से गेहूं सड़ा ही नहीं, कीड़ों तक ने खा लिया

जाे गेहूं किसान ने दिन-रात मेहनत कर तैयार की थी, उसे सरकारी एजेंसियां नहीं संभाल पाई। मानकपुर लक्कड़ मंडी में वेयर हाउस की देखरेख में रखी गई गेहूं को कीड़े खा गए। उसी गेहूं को एफसीआई के अधिकारियों ने यूपी में सप्लाई कर दिया। यूपी के पिलखनी में जब उस गेहूं को उतारा जा रहा था तो वहां के अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया। ट्रक नंबर-एचआर-58बी-4548 से 34 कट्टे गेहूं के खराब निकले तो उसे वापस भेज दिया गया। वहीं एक 600 कट्टों से भरा ट्रक भी लेने से मना कर दिया था।

हालांकि वीरवार तक वह ट्रक वापस नहीं आया था। यहां वेयर हाउस के 50 हजार कट्टे गेहूं के खुले में लगाए गए थे। इसमें से 20 हजार जा चुके हैं। जबकि हजारों कट्टे गेहूं के कीड़ा लगने से खराब हो गए हैं। वहीं इसी तरह मानकपुर इंडस्ट्री एरिया पार्ट-2 की सड़कों पर हैफेड और फूड सप्लाई का माल लगाया गया है। यहां पर करीब 85 कट्टे फूड सप्लाई के और 25 कट्टे हैफेड के खराब हो गए। इनमें पानी लगने से खराब हुए हैं। फिलहाल यह गेहूं वहीं पर साइड में रखी गई हैं। जिस गेहूं के आटे से देश के लोगों की रोटी बननी थी वह सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों की लापरवाही से खराब हो गई। जिले में लाखों गेहूं के कट्टे खुले में लगे हैं। ज्यादातर में गेहूं खराब की बात सामने आ रही है।

हो सकता है हमारी चेंकिंग में कीड़ा लगी गेहूं न आई हो

एफसीआई के मैनेजर क्यूसीआई हरिश चौहान ने कहा कि मानकपुर लक्कड़ मंडी से जो गेहूं यूपी में गई थी उसे चेक कर भेजा गया था। हो सकता है जब उन्होंने जांच के लिए परखी मारी होगी उसमें खराब गेहूं न आई हो।

दो विभागों की लापरवाही, दोनों के अधिकारी जिम्मेदार

अनाज मंडियों में जो गेहूं खरीदी जाती है वह खरीद एजेंसियों के माध्यम से सरकार खरीदती है। लेकिन उसकी असल मालिक एफसीआई होता है। गेहूं जहां पर स्टॉक किया जाता है वहां पर उसके रख रखाव की जिम्मेदारी खरीद एजेंसी की होती है। एफसीआई जैसा माल मंडी से उठवाती है वैसा ही लेती है। जब वह माल यहां से सप्लाई करना होता है तो स्पेशल आरओ या फिर रोड मूवमेंट से भेजा जाता है। उसे भेजने से पहले एफसीआई उसकी क्वालिटी चेक करता है। चेक होने पर ही माल रिलीज किया जाता है। अगर क्वालिटी ठीक नहीं है तो माल रिजेक्ट कर दिया जाता है। इसका हर्जाना देखरेख करने वाली एजेंसी पर होता है। खराब माल को बाद में ऑक्शन कर बेचा जाता है। हालांकि माल को रिजेक्ट नहीं किया जाता। अधिकारी आपस में मिलकर खराब माल को भेज देते हैं।

पानी लगने से एक-दो कट्टा खराब हुआ

फूड सप्लाई के इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि मानकपुर इंडस्ट्री एरिया में जहां पर उनका माल लगा है वहां पर हैफेड का भी माल लगा है। उनका एक-दो कट्टा खराब हुआ है। उनका कहना है कि वहां पर हैफेड का भी माल रखा है। हो सकता है वही खराब हुआ है। जब उन्हें बताया गया कि 80-85 कट्टे फूड सप्लाई के हैं तो उनका कहना था कि उसे चेक किया जाएगा।

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