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नुकसान की भरपाई नहीं की तो होगी एफआईआर:निगम को 47 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने वाली होर्डिंग्स लगाने वाली कंपनियों पर होगी एफआईआर

यमुनानगर9 दिन पहले
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  • नोटिस भेज 7 दिन में भरपाई का मौका दिया, रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी को लिखेंगे और एसईबी में बताएंगे कैसे कंपनी ने नियम तोड़े

नगर निगम एरिया में 3 साल तक बिना परमिशन विज्ञापन लगाने के मामले में कई नेशनल और इंटरनेशनल कंपनियों पर एफआईआर की तैयारी है। 3 सितंबर को निगम की ओर से इन कंपनियों के सीईओ को आखिरी मौका देते हुए नोटिस भेजा है। जिसमें कहा गया है कि अगर कंपनी निगम को हुए नुकसान की भरपाई नहीं करती तो उन पर हरियाणा प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट-1989 के सेक्शन-तीन में एफआईआर कराई जाएगी।

वहीं उनकी कंपनी ने यमुनानगर में किस तरह से नियमों को तोड़ा इसकी जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर (रजिस्टर्ड ऑफ कंपनी) और सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया को जानकारी भेजकर एक्शन के लिए कहा जाएगा। तीन सितंबर को भेजे गए नोटिस के कंपनी सीईओ को मिलने के 7 दिन में कंपनियों को निगम में सभी तरह की फीस को ब्याज और जुर्माने के साथ जमा कराना होगा। अब देखना होगा कि इस आखिरी नोटिस पर निगम के खाते में नुकसान की भरपाई होती है या नहीं। क्योंकि नोटिस देने का खेल 3 माह से चल रहा है। अधिकारी भी दबाव में नजर आ रहे हैं। यह सब कार्यवाही गृह मंत्री के पास पहुंची एक शिकायत के बाद शुरू हुआ था।

इस तरह से हुआ 47 करोड़ का नुकसान

जिन 20 फर्म को नोटिस दिया गया है, उनके विज्ञापन प्राइवेट प्रॉपर्टी पर बने एंगल पर करीब 20 हजार स्क्वेयर फीट में लगे हुए थे। हरियाणा म्युनिसिपल काॅरपोरेशन बाय-लॉ-2018 के अनुसार 209.10 रुपए प्रति स्क्वेयर फीट प्रतिमाह के हिसाब से निगम को फीस जाती है। 20 हजार स्क्वेयर फीट के हिसाब ये चार लाख, 80 हजार बनती है। वहीं अगर नगर निगम से परमिशन नहीं ली गई तो तीन गुणा देना होता है। जोकि एक करोड़, 25 लाख, 40 हजार रुपए बनता है। अगर साल 2018 से अब तक का अकाउंट जोड़े तो वह करीब 47 करोड़ रुपए बनता है। क्योंकि तीन साल में साइट का रजिस्ट्रेशन कराकर सरकारी फीस नहीं दी गई। इस तरह से बड़ा घपला हुआ है। हालांकि शहर में इस तरह की 80 से 100 साइट बताई जा रही हैं, इस तरह से नुकसान 100 करोड़ से ज्यादा का हुआ है।

दिक्कत यह, कौन बताए-कितना जुर्माना बनता है
इस मामले में कुछ कंपनियों ने पहला नोटिस मिलने के बाद अपना रिप्लाई दिया था। तब कंपनियां जुर्माना देने को तैयार भी थीं। लेकिन निगम के अधिकारी उन्हें से जानकारी मांग रहे हैं कि उनका कितना जुर्माना बनता है। जबकि कंपनियों के प्रतिनिधि कहते हैं कि यह निगम के अधिकारी बताएं। लेकिन यह किसी को जानकारी नहीं है। जिससे करोड़ों रुपए का जुर्माना फंसा पड़ा है।

कंपनियों ने इनके माध्यम से शहर में विज्ञापन लगाए
जो कंपनियों शहर में बिना परमिशन की साइट पर विज्ञापन लगाकर फंसी हुई हैं, उन्होंने विमल एडवरटाइजर के माध्यम से ये विज्ञापन लगाए थे। हालांकि विमल एडवरटाइजर की ओर से निगम के अधिकारियों को लिखित में यह बात मानी गई है कि उनके माध्यम से कंपनियों ने विज्ञापन लगाए। विमल एडवरटाइजर संचालक विकास ग्रोवर का कहना है कि उन्होंने नियम अनुसार विज्ञापन लगाए हैं। साल 2018 में हरियाणा म्युनिसिपल काॅरपोरेशन बाय-लॉ-2018 आया। इसकी कोई नोटिफिकेशन निगम अधिकारियों की ओर से नहीं दी गई। वहीं न ही कभी बताया कि विज्ञापन साइट को पहले रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। उन्होंने किसी तरह का गलत काम नहीं किया।

इनको दिया था नोटिस
निगम की ओर से लाइक ब्ल्यू स्टार, आकाश इंस्टीट्यूट, वंडर सीमेंट, जेके टायर, महिंद्र एसयूवी, होंडा मोटरसाइकिल, आशीर्वाद वाटर टैंक, कैंपस शूज, आईएफबी एसी, आइडिया, हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड, मारुति नेक्सा, डेकिन एसी, टोयोटा ग्लैंजा, एशियन पेंट, कलर टीवी समेत अन्य कई कंपनियों को निगम ने बिना रजिस्ट्रेशन की साइट पर विज्ञापन लगाने पर नोटिस भेजा है। सभी साइट से विज्ञापन उतार दिए थे। अब इन कंपनियों को आखिरी मौका देते हुए निगम की ओर से भेजा गया।

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