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दमोपुरा विवाद:रेत-बजरी से भरे ओवरलोड वाहनों से हादसे, पुलिस केस और बीमारी झेल रहे यमुना से लगते एरिया के ग्रामीण

यमुनानगरएक महीने पहले
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चार दिन पहले गांव दमोपुरा में रेत-बजरी के ओवरलोड वाहन रोकने पर ग्रामीणों को पिस्टल दिखाकर गोली मारने की धमकी देने का विवाद नया नहीं है। इस तरह की धमकी और हमले यमुना नदी से लगते एरिया के कई गांव के लोग सहन कर चुके हैं। कोई दो साल से कोर्ट में पुलिस केस भुगत रहा है तो कोई जनहित याचिका लगाकर हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ रहा है। एरिया से लगते गांवों के लोग पुलिस केस, बीमारी और सड़क हादसे झेल रहे हैं।

इन सबके बीच करोड़ों की सड़कें कच्चे रास्तों से भी बदतर बन चुकी हैं। गांव के लिंक रोड से लेकर इंटरस्टेट हाइवे तक ओवरलोड की वजह से छलनी हो चुके हैं। हमने उन गांव के हालात जाने जहां पर ओवरलोड के वाहन रोकने पर विवाद हुआ और अब गांव के लोग इन्हें रोकने से डरने लगे हैं क्योंकि वे हमले सह चुके हैं और अब पुलिस केस सह रहे हैं। रेत-बजरी से भरे ट्रकों के चलते हुए हादसों में कई बार रोड जाम, तोड़फोड़ और ट्रक चालक पर हत्या तक का केस दर्ज हो चुका।

हमें पीटा गया, केस भी भुगत रहे, लेकिन ओवरलोड नहीं रुका| गांव साबापुर में 2018 में रेत-बजरी के ओवरलोड वाहन ग्रामीणों ने रोक दिए। इसके बाद यहां खनन और ओवरलोड माफिया और ग्रामीण आमने-सामने हो गए। रात को ट्रक रोकने के लिए बैठे ग्रामीणों पर हमला हो गया। इसके बाद भी माफिया ग्रामीणों पर भारी रहा क्योंकि माफिया को राजनेता का साथ मिल रहा था। गांव वालों पर ही केस दर्ज कर लिया गया। तब गांववालों पर दो केस दर्ज किए गए थे और ग्रामीणों की तरफ से दी शिकायत पर एक केस दर्ज किया था। दो साल से 12 ग्रामीण पुलिस केस झेल रहे हैं। इस लड़ाई का नेतृत्व करने वाले समाजसेवी एवं उद्योगपति रोशनलाल कांबोज का कहना है कि गांव वालों को ही पीटा गया और उन्हीं पर झूठे केस दर्ज किए गए। एक दिन भी ओवरलोड ट्रक नहीं रुके।

जनहित याचिका तीन साल से हाईकोर्ट में पेंडिंग, कई बार हमले का प्रयास हुआ| गुमथला एरिया में हर दिन हजारों की संख्या में रेत लेकर ट्रक निकलते हैं। ज्यादातर ओवरलोड होते हैं। इससे यहां सड़कें टूट चुकी हैं। ग्रामीणों ने जाम लगाया और अधिकारियों को ओवरलोड रोकने की शिकायत दी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस पर सोशल वर्कर एडवोकेट वरयाम सिंह ने जनहित याचिका हाईकोर्ट में लगाई। तीन साल से उस पर सुनवाई चल रही है लेकिन एक दिन भी ओवरलोड बंद नहीं हुआ। याचिकाकर्ता पर हमले का प्रयास किया जा चुका है।

हमले का प्रयास करने वालों पर जठलाना पुलिस ने केस दर्ज किया, लेकिन केस को अनट्रेस दे दिया गया। ओवरलोड सड़कों के लिए इसलिए खतरनाक| पीडब्ल्यूडी एक्सईएन ऋषि सचदेवा का कहना है कि सरकार ने ट्रकों में एक्सल के हिसाब से लोड तय किया है। जब किसी सड़क को बनाया जाता है तो उस पर ट्रैफिक दबाव को देखकर ही सड़क का डिजाइन तय होता है। वह डिजाइन वाहनों में लोड को लेकर जो मानक तय किए गए हैं, उसी के हिसाब से बनता है।

चार दिन पहले हुआ था विवाद, फिर भी गुजर रहे ओवरलोड वाहन

गांव दमोपुरा के ग्रामीणों ने मंगलवार को ओवरलोड रेत बजरी के वाहन गांव से निकलने से रोक दिए। पूर्व विधायक एवं जेजेपी जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह का बेटा भूपेंद्र अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंच गया और पुलिस के सामने पिस्टल तानकर ग्रामीणों को धमकाया। बाद में भूपेंद्र के साथियों ने गृह मंत्री का ओएसडी बनकर एसएचओ बूड़िया पर केस निपटाने के लिए धमकाया। पुलिस ने भूपेंद्र के दोस्त रामकुमार और अनिल को काबू किया। फर्जी ओएसडी से कॉन्फेंस में लेकर अनिल ने बात कराई थी। भूपेंद्र और अन्य की तलाश के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। वहीं गांव से ओवरलोड ट्रक निकल रहे हैं।

रास्ता नहीं रोका जा सकता, लेकिन ओवरलोड पर चालान के साथ-साथ केस भी बनता है| सीनियर एडवोकेट हरविंद्र सिंह अनेजा का कहना है कि गांव की गलियों या फिर सड़कों से लेकर हाइवे तक से ओवरलोड गाड़ी नहीं निकल सकती। इसमें चालान के साथ-साथ सड़क को नुकसान पहुंचने पर पब्लिक प्रॉपर्टी डैमेज एक्ट में भी केस बनता है। अगर यह एक्शन हो जाए तो ओवरलोड बंद हो सकता है। वहीं जहां तक किसी सड़क से गुजर रहे वाहन को रोकने का मामला है, यह भी लीगल तौर पर सही नहीं है। कोई भी व्यक्ति किसी को भी सरकारी सड़क से जाने से नहीं रोक सकता।

पूर्व विधायक का बेटा गिरफ्तारी से बचने के लिए पहुंचा कोर्ट, पुलिस ने कई जगह की रेड

बेटा भूपेंद्र कोर्ट पहुंच गया। भूपेंद्र ने दोनों ही मामलों में अग्रिम जमानत याचिका लगाई है जिस पर पुलिस को जवाब के लिए नोटिस जारी किया गया है। दोनों ही मामलों में 3 नवंबर को सुनवाई होगी। उधर, पुलिस ने नोटिस से पहले भूपेंद्र और उसके साथियों को लेकर यूपी समेत कई जगह पर रेड की है। लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पाया।

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