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एनएमसीजी का दावा:प्रदेश से बिना ट्रीट किए यमुना में डाला जा रहा 33.20 करोड़ लीटर सीवरेज का पानी

फरीदाबाद2 महीने पहलेलेखक: भोला पांडेय
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औद्योगिक नगरी पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, गुड़गांव, पलवल आदि जिले दिल्ली से वृंदावन तक यमुना नदी के पानी को प्रदूषित कर रहे हैं। क्योंकि यहां से निकलने वाला सीवरेज का बिना ट्रीट किया करीब 33.20 करोड़ लीटर (332 एमएलडी) पानी यमुना में छोड़ा जा रहा है। इसका खुलासा राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की हालिया रिपोर्ट में हुआ है। यही नहीं सीवर के पानी को साफ करने के लिए प्रदेशभर में बनाए गए करीब 72 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं।

एनएमसीजी ने शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और जनस्वास्थ्य विभाग में आपसी तालमेल न होने पर भीि चिंता जताई है। क्योंकि सीवरेज पानी को ट्रीट करने की जिम्मेदारी इन्हीं विभागों की है। एनएमसीजी ने सरकार से नाराजगी जताते हुए सभी एसटीपी को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जोड़कर 24 घंटे मॉनिटरिंग करने का आदेश दिया है।

रोज 1495 एमएलडी पानी होता जनरेट: एनएमसीजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि प्रदेश में रोज 1495 एमएलडी सीवरेज का पानी जनरेट होता है। इसके लिए 156 एसटीपी लगाए गए हैं। इसकी क्षमता 1834 एमएलडी की है। लेकिन विभागों की लापरवाही के चलते 72 एसटीपी ठीक से काम नहीं कर रहे। इससे करीब 332 एमएलडी पानी बिना ट्रीट किए यमुना नदी में छोड़ा जा रहा है। इनमें चार एसटीपी सोनीपत, चार झज्जर-बहादुरगढ़, आठ एसटीपी नूंह और एक-एक एसटीपी फरीदाबाद और गुड़गांव का है।

एनएमसीजी की रिपोर्ट पर प्रदेश के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी इनवायरमेंट ने कहा कि प्रदेशभर के कई एसटीपी को अपग्रेड किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 तक प्रदेश 80 फीसदी से अधिक दूषित पानी को ट्रीट करने की क्षमता हासिल कर लेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह पूरा मामला सीएम मनोहरलाल के संज्ञान में है। सीएम ने इस बात का सुझाव दिया है कि जहां-जहां अवैध तरीके से औद्योगिक क्षेत्र बने हैं, वहां सीईटीपी लगाए जाएं अथवा उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए।

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, जनस्वास्थ्य विभाग और शहरी स्थानीय निकाय में आपसी तालमेल की कमी से पैदा हो रही समस्या

इन जिलों का पानी यहां डाला जा रहा
रिपोर्ट के मुताबिक यमुनानगर, करनाल, पानीपत और सोनीपत के एसटीपी से निकलने वाला सीवरेज का पानी दिल्ली के वजीराबाद में डाला जा रहा है। जिससे दिल्ली में यमुना जल बेहद खराब है। इसके अलावा झज्जर, बहादुरगढ़ और गुड़गांव के एसटीपी का पानी नजफगढ़ ड्रेन में भेजा जा रहा है। इन ड्रेनों का ढलान यमुना की ओर है। रिपोर्ट पर नजर डालें तो फरीदाबाद, पलवल और नूंह के एसटीपी से निकलने वाला पानी बिना ट्रीट किए ओखला की आेर से आनी वाली यमुना के पानी में छोड़ा जा रहा है। इससे वृंदावन-मथुरा तक यमुना का पानी प्रदूषित हो रहा है।

फाइल फैक्ट

  • फरीदाबाद में निगम क्षेत्र में रोज 197 एमएलडी सीवरेज पानी जनरेट होता है।
  • 24 गांवों को मिलाने के बाद अब क्षमता बढ़कर 280 एमएलडी तक हो गई।
  • 26 लाख की आबादी वाले फरीदाबाद में महज तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इनकी क्षमता 158 एमएलडी की है।
  • प्रतापगढ़ एसटीपी की क्षमता 68 एमएलडी।
  • मिर्जापुर एसटीपी की क्षमता 58 एमएलडी।
  • बादशाहपुर एसटीपी की क्षमता 32 एमएलडी।
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