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मंत्री ने गौवंश पर दिया जोर::केंद्रीय मंत्री बोले, गौ-संवर्धन से आत्मनिर्भर भारत बनाने की संभावनाएं बढ़ी, लोग गाय के दूध व गोबर के महत्व को जानने की कोशिश करें

फरीदाबाद3 महीने पहले
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कहा, पशुपालन क्षेत्र में पहुंची नई तकनीक, यह किसानों  की आ आय दोगुनीकरने में मददगार होगी। - Dainik Bhaskar
कहा, पशुपालन क्षेत्र में पहुंची नई तकनीक, यह किसानों  की आ आय दोगुनीकरने में मददगार होगी।

भारत सरकार के मत्स्य एवं पशुपालन व डेयरी विभाग के कैबिनेट मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा कि महानगरों की आधुनिकता से भरी असंतुलित जीवन शैली को यदि पटरी पर लाना है, तो हमें प्रत्येक महानगर के बाहरी इलाके में काऊ हॉस्टल की स्थापना करनी होगी। गौवर्धन से आत्मनिर्भर भारत बनाने की संभावनाएं बढ़ रही है। गाय के दूध और गोबर के महत्व को देशवासी जानने की कोशिश करें। वह मंगलवार को सेक्टर-8 स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने गौ पालन के विषय पर बल देते हुए कहा कि हमें इसके लिए पुराने तरीकों को छोड़कर वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की आवश्यकता है। देशवासियों को गाय के दूध और गोबर के महत्व को जानने की कोशिश करनी चाहिए।यदि शरीर में इम्यूनिटी पावर बढ़ानी है तो गाय के दूध भी और गौमूत्र का प्रयोग करें। उन्होंने अहमदाबाद की बंशीधर गौशाला का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर 200 रुपये किलो गाय का दूध और 4000 रुपये किलो गाय का घी बिकता है।

गोबर से लठ्‌ठे बनाने वाली मशीन का लोकापर्ण करते केंद्रीय मंत्री
गोबर से लठ्‌ठे बनाने वाली मशीन का लोकापर्ण करते केंद्रीय मंत्री

ब्राजील की अर्थव्यवस्था गाय पर आधारित

केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा कि ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था गाय पर आधारित है। वहां गाय को जेबू कहते हैं। हमारी गिर नस्ल की गाय को वहां सर्वोपरि गाय माना गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना है तो जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ानी होगी और पोषण की दृष्टि से संतुलित जीवनशैली अपनानी होगी। इन सभी आयामों की प्राप्ति का गाय ही एकमात्र साधन है। उन्होंने योग का उदाहरण देते हुए कहाकि पूरे विश्व में जिस तरह से योग को सम्मान मिला है, वैसे ही दुनिया गौविद्या को भी उतने ही सम्मान से देखेगी। उन्होंने गोबर से लठ्ठ बनाने वाली मशीन का लोकापर्ण करते हुए कहा कि इससे गौशालाओं को हर महीने 1.5 लाख से लेकर 1.7 लाख किलोग्राम गोबर का निस्तारण करने में मदद मिलेगी।

दूध न देने वाली गाय भी होंगी उपयोगी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गोबर आधारित लट्ठे बनाने वाली यह मशीन गौशालाओं को अपने कचरे के निस्तारण की समस्या को दूर करने में सहायक होगी। जिस स्थान पर इस मशीन को लगाया जाएगा, वहां रहने वाले और आसपास के गांव के निवासियों के लिए यह रोजगार का एक अतिरिक्त स्रोत तो बनेगी ही, इसके साथ दूध देना बंद कर चुकी गायों को भी इस तरह की मशीनों से आर्थिक गतिविधि में शामिल किया जा सकेगा। गौधन महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक विजय खुराना ने कहा कि आज देश में 19500 गौशाला है, जबकि इनकी संख्या 10 वर्ष पहले 9500 थी।गौशालाओं में सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों की बदौलत आय के संसाधन बढ रहे हैं। इस मौके पर सर्वोदय अस्पताल की एमडी अंशुल गुप्ता, एईआईसीओएस एमआईए हरियाणा के चेयरमैन कपिल मलिक आदि उपस्थित रहे।