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गड़बड़ी का आराेप::यूआईसी कंपनी व निवर्तमान निगम पार्षद पर सात करोड़ के घोटाले का लगाया आरोप, एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जांच कराने की मांग

फरीदाबाद2 महीने पहले
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ग्रीन फील्ड आरडब्ल्यूएस ने लगाया है आरोप, शिकायकर्ता बोले, बगैर किसी टेंडर के कराए गए हैं कार्य, यूआईसी और पार्षद की मिलीभगत से की गई है गड़बड़ी। - Dainik Bhaskar
ग्रीन फील्ड आरडब्ल्यूएस ने लगाया है आरोप, शिकायकर्ता बोले, बगैर किसी टेंडर के कराए गए हैं कार्य, यूआईसी और पार्षद की मिलीभगत से की गई है गड़बड़ी।

ग्रीन फील्ड कालोनी आरडब्ल्यूएस ने केंद्र सरकार की अर्बन इंप्रूवमेंट कंपनी (यूआइसी) व पार्षद पर विभिन्न सड़कों के निर्माण में करीब सात करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया है। आरडब्ल्यूएस ने इस संबंध में एसडीएम बड़खल को ज्ञापन सौंपकर सड़कों के निर्माण कार्य में हुई गड़बड़ी की जांच कराने की मांग की। इस बारे में यूआईसी के चेयरमैन भारत भूषण से बात की गई तो उन्होंने बाहर हाेने का हवाला देते हुए बात करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि हर बात पर सफाई की जरूरत नहीं है। इस बारे में सोमवार को बात होगी।

आरडब्ल्यूएस प्रधान विरेंद्र भड़ाना ने बताया कि ग्रीन फील्ड कालोनी का रखरखाव करने व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी यूआइसी की है। इसके लिए यूआइसी यहां के निवासियों से आंतरिक और बाह्य शुल्क वसूल करती है। यहां सड़कों के निर्माण और मरम्मत का कार्य कराने की जिम्मेदारी भी यूआइसी की है। इससे पहले पूर्व चेयरमैन द्वारा यूआइसी अपने स्तर पर 4 सड़कों का निर्माण किया था। उसके बाद कंपनी के वर्तमान चेयरमैन और पार्षद भागीदारी नाम से एक स्कीम लेकर आए। इसके तहत सड़क निर्माण लागत का 70 फीसद यूआइसी, 20 फीसद निवासियों से लेकर और 10 फीसद स्थानीय पार्षद से लेकर सड़कें बनाई जा रही है। जिस गली के निवासी अपना हिस्सा नहीं देते, उनकी सड़क नहीं बनाई जाती। जब एमपी लैड का पैसा सरकार ने लगाना चाहा तो पार्षद ने अपने नाम से आरटीआई लगा कर उसको रुकवाने का काम किया, जिससे इनकी भागीदारी स्कीम बंद ना हो सके। पिछले दिनों रोड नंबर 121 के निवासियों ने अपने स्तर पर रुपये एकत्र कर सड़क बनाने का निर्णय लिया। जब सड़क बनकर तैयार हो गई तो उन्होंने पाया कि सड़क बनाने में उससे आधी लागत आई है, जो यूआइसी बता रही है। वीरेंद्र भड़ाना ने आरोप लगाया है कि सड़कों के निर्माण में यूआइसी व पार्षद द्वारा बड़े स्तर पर घोटाला किए जाने की अाशंका है। यह पूरा घोटाला सात से आठ करोड़ रुपये का हो सकता है। उन्होंने बताया कि यूआइसी व पार्षद करीब 135 सड़कों के निर्माण का दावा कर रही है। यह सभी सड़कें बिना किसी टेंडर के बनवाई गई हैं। उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की है।

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