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भास्कर खास: प्रदूषण कम करने की नई योजना::पूर्व-पश्चिम की दिशा में वायुमापक यंत्र लगा डेढ़ साल तक हवाओं का होगा अध्ययन, इसमें पाए जाने वाले कणों की होगी जांच

भोला पांडेय/फरीदाबाद2 महीने पहले
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जांच का अध्ययन करने के बाद प्रदूषण कम करने के लिए किए जाएंगे उपाय, द एनर्जी एंड रिसोरसेल इंस्ट्‌टीयूट को दिया गया काम​​। - Dainik Bhaskar
जांच का अध्ययन करने के बाद प्रदूषण कम करने के लिए किए जाएंगे उपाय, द एनर्जी एंड रिसोरसेल इंस्ट्‌टीयूट को दिया गया काम​​।
  • पर्यावरण विशेषज्ञों की टीम ने शुरू किया काम, इसके लिए खर्च किए जा रहे 90 लाख रुपए
  • केंद्र सरकार के निर्देश पर देश भर के करीब 25 शहरों के प्रदूषण बढ़ने के कारणों का कराया जा रहा अध्ययन

दिनोदिन खराब होती शहर की आबोहवा को सुधारने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर नगर निगम ने नई कार्य योजना बनाई है। इसके तहत पूर्व और पश्चिम की दिशाओं से शहर की ओर आने वाली हवाओं का एक एजेंसी द्वारा अध्ययन किया जाएगा। करीब डेढ़ साल तक सभी मौसम की हवाओं का अध्ययन कर उसमें पाए जाने वाले 37 प्रकार के सूक्ष्म कणों की जांच की जाएगी।

यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि आखिर किन कणों की अधिकता कितने प्रतिशत तक है जिससे शहर के प्रदूषण स्तर में बढा़ेतरी हो रही है। इस काम के लिए निगम ने द एनर्जी एंड रिसोर्सेल इंस्ट्‌ीटयूट(टीरी) नामक एजेंसी हायर की है। एजेंसी डेढ़ साल तक अध्ययन करके रिपोर्ट सौेपेगी। फिर उस रिपोर्ट को एनआईटी कुरुक्षेत्र विशेषज्ञों के पास भेजकर उसकी जांच कराई जाएगी। एनआईटी की जांच के बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजकर बढ़ते प्रदूषण को रोकने के दूरगामी व प्रभावी उपाय किए जाएंगे।

दो दिशाओं में लगाई जाएगी मशीन

नगर निगम के चीफ इंजीनियर हार्टिकल्चर बीके कर्दम ने बताया कि टीरी नामक एजेंसी दिल्ली और राजस्थान की ओर से आने वाली पूर्वी और पश्चिम हवाओं को जांचने के लिए फाइन पर्टीकुलेट सेंपलर मशीन(वायु गुणवत्ता मापक यंत्र) लगाएगी। यह मशीन गर्मी, बारिश और सर्दी तीनों मौसम में चलने वाली हवाओं का करीब डेढ़ साल तक अध्ययन करेगी।

सेक्टर 11-12 डिवाइडिंग रोड पर गाड़ियों के चलने से उड़ती धूल
सेक्टर 11-12 डिवाइडिंग रोड पर गाड़ियों के चलने से उड़ती धूल

हर एक कणों का किया जाएगा आंकलन

चीफ इंजीनियर ने बताया कि हवा में करीब 37 प्रकार के सूक्ष्म कण जैसे लोहा, तांबा, जिंक, रेत आदि पाए जाते हैं। अध्ययन में इस बात का आंकलन किया जाएगा कि कौन से कण की इस शहर मंे अधिकता है, जो शरीर के लिए नुकसानदेह है। अध्ययन में यह भी पता किया जाएगा कि दीवाली के आसपास प्रदूषण कैसे अचानक बढ़ जाता है। शहर में गैस चैंबर बनने का कारण कौन का कण है। खासकर पीएम 2.5 और उसके नीचे िकतने प्रकार के कण मौजूद हैं। पीएम 2.5 का हवा में कितने फीसदी योगदान है।

नगर निगम के चीफ इंजीनियर हार्टिकल्चर बीके कर्दम
नगर निगम के चीफ इंजीनियर हार्टिकल्चर बीके कर्दम

अध्ययन पर 90 लाख रुपए होंगे खर्च

डेढ़ साल तक हवाओं का अध्ययन करने के लिए 90 लाख रुपए खर्च होंगे। डेढ़ साल बाद एजेंसी रिपोर्ट बनाकर नगर निगम को सौंपेगी। निगम उस रिपोर्ट को एनआईटी कुरुक्षेत्र भेजकर विशेषज्ञों से उसकी जांच कराई जाएगी। इसके बाद प्रदूषण सुधारने के दूरगामी इंतजाम किए जाएंगे।

दुनिया की 99 फीसदी आबादी जहरीली हवा में ले रही सांस

बता दें कि गत 7 अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे से पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक चौंकाने वाली रिसर्च की है। इसमें कहा गया है कि दुनिया की 99 फीसदी आबादी गंदी हवा में सांस ले रही है। इसका मतलब धरती पर मौजूद 797 करोड़ लोग वायु प्रदूषण में जी रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने 117 देशों के 6,000 से ज्यादा शहरों की एयर क्वॉलिटी को मॉनिटर किया था। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पीएम 2.5 के कण फेफड़ों के अंदर घुसकर आपके खून में बह सकते हैं। इससे दिल और दिमाग दोनों को ही खतरा होता है। ये ब्रेन स्ट्रोक और हार्टअटैक की वजह बन सकते हैं।

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