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  • Successful Operation Of Hip For The First Time After 28 Years At Agroha Medical College, Dr. Nishith And His Team Did The Surgery In 3 Hours

मरीजों को मिली बड़ी राहत:अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में 28 साल के बाद पहली बार कूल्हे का सफल ऑपरेशन, डाॅ. निशिथ और उनकी टीम ने 3 घंटे में की सर्जरी

अग्रोहा20 दिन पहलेलेखक: सत्यवान लोहचब
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महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में डॉ. निशिथ शर्मा के नेतृत्व में ऑर्थो की टीम ऑपरेशन करती। - Dainik Bhaskar
महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में डॉ. निशिथ शर्मा के नेतृत्व में ऑर्थो की टीम ऑपरेशन करती।
  • कूल्हे-गोडे के ज्वाॅइंट के लिए मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़ और रोहतक

महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज अग्रोहा के ऑर्थो विभाग के डॉ. निशिथ शर्मा और उनकी टीम ने कूल्हे का ऑपरेशन करने में सफलता हासिल कर ली है। तीन घंटे तक सर्जरी चली। 28 वर्षों के बाद यहां यह सुविधा शुरू हो पाई है। मरीजों को अब चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में दिल्ली, चंडीगढ़, रोहतक या जयपुर नहीं जाना पड़ेगा। मरीज बड़े शहर में जाने की बजाय निजी अस्पतालों का सहारा लेते थे जहां पर लाखों रुपए खर्च करना पड़ता था।

अग्रोहा में सफल ऑपरेशन पर मेडिकल के चेयरमैन के सलाहकार आरपी जिंदल, निदेशक डॉ. अलका छाबड़ा, एमएस नजीर अहमद पंडित, डीएमएस डॉ. शमशेर मलिक ने सफल ऑपरेशन पर बधाई दी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. निशिथ शर्मा ने बताया कि मेडिकल में 3 घंटों तक सर्जरी कर कूल्हे को ट्रांसप्लांट किया है। मरीज अभी एचडीयू विभाग में भर्ती है जो चल फिर रहा है। मगर ऑपरेशन से पहले चलने में असमर्थ था। अब मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा।

मेडिकल कॉलेज में ही कूल्हे व गोडों के ज्वाॅइंट का सफल ऑपरेशन किया जाता है। उनके साथ टीम ऑर्थो टीम में डॉ. अशोक, डॉ. योगेश मलिक, डॉ. कुलवीर चौधरी, डॉ. विकास राय सहित नर्सिंग सिस्टम ऑटीए मास्टर शामिल रहे है। उन्होंने बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को मरीजों की जांच करते हैं।

कई अस्पतालों में बताया था 3 से 4 लाख खर्च
भिवानी वासी मरीज ने बताया कि मैं पिछले लगभग 2 वर्षों से कूल्हे खराब होने के कारण परेशान था। जिससे चलने फिरने में मुझे काफी दिक्कतें आ रही थीं। मैंने सरकारी व गैर सरकारी कई संस्थानों में दिखाया तो बताया कि आपका कूल्हे को ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा। प्राइवेट अस्पताल में करीब 3 से 4 लाख खर्च आएंगे। इतना खर्च उठाने में वह असमर्थ था और कूल्हे के दर्द को सहन नहीं कर पा रहा था। जिससे खुदकुशी जैसे विचार आने लगे थे। 31 दिसंबर 2021 को उसके रिश्तेदार ने उसे अग्रोहा मेडिकल में दिखाया।

जहां पर ऑर्थो विभाग के डॉ. निशिथ शर्मा ने उसे तुरंत भर्ती किया। अगले ही दिन डॉक्टरों टीमों ने कूल्हे को ट्रांसप्लांट कर दिया। अब चलने फिरने लग गया है। ऑपरेशन पर नाममात्र खर्च आया है। एमएस डॉ. नजीर अहमद पंडित ने बताया कि आयुष्मान और जरूरतमंद मरीजों का ऑपरेशन पूरी तरह से नि:शुल्क किया जाता है। बाकी मरीजों की केवल सामान का खर्च वहन करना पड़ता है। दवाइयों व बेड की सुविधा नि:शुल्क है। यह ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज में पहली बार हुआ है। गायनी, आंख, दिमाग के कैंसर आदि के ऑपरेशन पहले ही होते थे। ऑर्थो की केवल सामान्य सर्जरी होती थी।

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