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अनाज मंडी का दौरा:सुरक्षा पहरे के बीच लोहारू अनाज मंडी में पहुंचे कृषि मंत्री, काले झंडे लेकर विरोध करने पहुंचे किसानों को नहीं जाने दिया अंदर

लोहारू8 महीने पहले
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अनाज मंडी में पुलिस पहरे के बीच पहुंचे कृषि मंत्री और मोके पर जवानों से भरी खड़ी पुलिस बस। - Dainik Bhaskar
अनाज मंडी में पुलिस पहरे के बीच पहुंचे कृषि मंत्री और मोके पर जवानों से भरी खड़ी पुलिस बस।

कृषि मंत्री जेपी दलाल सोमवार को तीन बजकर आठ मिनट पर लोहारू अनाज मंडी में पहुंचे। इससे पहले पुलिस जवान, महिलाएं तथा प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। करीबन 15 मिनट तक अधिकारियों व पत्रकारों से बात करने के उपरांत वे पुलिस पहरे में निकल गए। इसी दौरान किसान नेता उमेद सिंह फरटिया हाथों में काले झंडे लेकर अनाज मंडी गेट पर पहुंचे परन्तु पुलिस ने उनको पहले ही उठा लिया।

सोमवार को लोहारू पहुंचे कृषि ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने गुरुग्राम से लेकर लोहारू तक मंडियों का दौरा कर खरीद के बारे में जानकारी ली है। सरसों का भाव एमएसपी से अधिक क्यों है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। गेहूं की फसल सरकार खरीद कर रही है।

किसानों से वे अरंड की खेती कराएंगे तथा खरीद केन्द्र बनाया जाएगा। सरसों की कालाबाजारी रोकने के लिए नए कानून में कोई प्रावधान नहीं है तथा अधिकारी मार्केट फीस के लिए काम कर रहे हैं। कोरोना के बहाने स्कूलों को बंद क्यों किए जा रहे है इस सवाल पर वे टाल गए तथा कहा कि माता पिता बच्चों के प्रति संवेदनशील होना बताया। किसान आंदोलन के बारे में कृषि मंत्री ने कहा कि डर दिखाकर आंदोलन किया जा रहा है तथा हम नई मंडियां बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन को राजनीतिक पार्टियों का सरंक्षण प्राप्त हो गया है।

14 अप्रैल को बाबा भीमराव अंबेडकर पर सरकारी कार्यक्रमों को रद्द किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि हमने कार्यक्रम कैंसिल किए हैं तथा किसी प्रकार की धमकियों के चलते ऐसा नहीं किया गया है। गेहूं की ढेरी के पास खड़े होकर जेपी दलाल करीबन पन्द्रह मिनट बाद बाढड़ा की ओर निकल गए।

किसानों के लिए अभद्र भाषा प्रयोग करने वाला हितैषी नहीं हो सकता: उमेदसिंह फरटिया

किसान नेता व शहीद किसान भवन के मैनेजर उमेदसिंह फरटिया की अगुवाई में किसानों को जब पता चला कि अचानक से कृषि मंत्री अनाज मंडी में पहुंच चुके हैं तो वे काले झंडे लेकर अनाज मंडी में पहुंच रहे थे। इसी दौरान गेट पर ही उनको पुलिस ने घेर लिया तथा मंडी में नहीं जाने दिया। किसानों ने बताया कि उनके शहीदों पर अभद्र भाषा प्रयोग करने वाला किसान हितैषी नहीं हो सकता।

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