हरियाणा में पहाड़ दरकने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन:दोपहर के बाद 60 होल में डेटोनेटर लगा तोड़े पत्थर, ब्लास्ट के बाद 3 मशीनें खदान में उतारीं

भिवानी5 महीने पहले

हरियाणा के भिवानी में शनिवार सुबह पहाड़ दरकने के बाद रेस्क्यू में बाधा बने 3 बड़े पत्थरों को रविवार 3:07 बजे ब्लास्ट कर तोड़ दिया। ब्लास्टिंग के लिए पत्थरों में 20 फीट गहरे 60 होल कर विस्फोटक लगाया गया। रेस्क्यू टीम ने ब्लास्टिंग से तोड़े बड़े पत्थरों के टुकड़ों को हटाने का काम रविवार देर शाम तक जारी रखा।

शाम 7 बजे तक तोड़े टुकड़े के करीबन 30 फीसदी हिस्से को ही मशीनों से हटाया जा सका। पहाड़ी का काफी हिस्सा अपनी जगह से 5 से 7 फीट आगे खिसका हुआ है, जो मलबे के सहारे अटका हुआ है। मलबा यहां से हटाने के बाद पहाड़ी का बाकी हिस्सा भी उसी जगह गिरने के हालात बन रहे हैं। पूरे मलबे को हटाने और साइट को क्लीयर होने में सोमवार देर शाम तक का समय लग सकता है।

डाडम खदान में पहुंचा अफसरों और रेस्क्यू टीमों का अमला।
डाडम खदान में पहुंचा अफसरों और रेस्क्यू टीमों का अमला।

देर रात होगा मृतकों का अंतिम संस्कार

डाडम खदान में रेस्क्यू ऑपरेशन के पहले दिन निकाले मृतकों के शव हिसार नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए। मृतकों में तोशाम के बागनवाला गांव का बिंदर (24) और जींद के मोरखी गांव का संजय शामिल है।

चाचा अशोक ने बताया कि बिंदर की शादी को 4 साल हो चुके हैं, डेढ़ साल का लड़का है और पत्नी गर्भवती है। वह कम्प्रेशर ऑपरेटर था और माता-पिता की कई साल पहले ही मौत हो गई थी। बिंदर घर में कमाने वाला अकेला शख्स था। उसने पिछले साल ही बैंक से लोन लेकर झोपड़ी की जगह पक्का कमरा बनवाया था।

वहीं जींद के मोरखी निवासी सुरेंद्र का 4 साल का लड़का और 2 साल की बेटी है। ग्रामीण अशोक कुमार के अनुसार परिवारजनों को दोनों की मौत के बारे में अभी तक खबर नहीं दी है। शव गांव में आने के बाद परिवार के लोगों को जानकारी देकर रात को ही उनका संस्कार किया जाएगा।

ब्लास्ट के बाद खदान में उतरने की तैयारी करती NDRF की टीम।
ब्लास्ट के बाद खदान में उतरने की तैयारी करती NDRF की टीम।

ब्लास्ट से पहले भिवानी जिले में तोशाम एरिया के डाडम स्थित घटनास्थल और आसपास का एरिया सील कर दिया गया। विस्फोट के बाद दोबारा टीम को खान में उतारा गया है। टीमें नीचे उतारने से पहले यह कन्फर्म किया गया कि कोई डेटोनेटर बचा हुआ तो नहीं रह गया है। सबसे पहले 3 पोकलेन मशीनें खान में भेजी गईं हैं, ये मशीन ब्लास्ट से तोड़ गए पत्थरों के टुकड़ों को घटनास्थल से हटाएंगी। इसके बाद मैन पावर से काम लिया जाएगा। दबे वाहनों को काटने के लिए हाइड्रोलिक कटर की मदद ली जाएगी। टीम ने एंबुलेंस, स्ट्रेचर तैयार कर रखा है।

रविवार सुबह तक मृतकों की संख्या 5 हो गई। मलबे से शनिवार देर रात रेस्क्यू टीम को एक और शव मिला, NDRF ने उसे प्रशासन को हैंडओवर कर दिया। शव किसी मशीन ऑपरेटर का बताया जा रहा है, जो पंजाब का रहने वाला है। NDRF के डिप्टी डायरेक्टर बीआर मीणा ने बताया कि शनिवार देर रात धुंध बढ़ जाने के कारण डाडम में रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आई। सुबह भी यहां पर घनी धुंध छाई रही। सिर्फ 5 फीट तक विजिबिलिटी रही। एक बहुत बड़ा पत्थर रेस्क्यू में बाधा पैदा कर रहा था।

NDRF की 42 सदस्यीय टीम रेस्क्यू में लगी है। ट्रक ड्राइवर भालौठ निवासी धर्मबीर के अभी पहाड़ से गिरे मलबे में दबे होने की बात कही जा रही है। उसे निकालने का काम अब दोबारा से शुरू किया गया है। हालांकि और लोगों के भी दबे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

खदान में इसी जगह पर बचाव अभियान चल रहा है।
खदान में इसी जगह पर बचाव अभियान चल रहा है।

रविवार सुबह तक 6 मशीनों के लगातार काम करने के बावजूद घटनास्थल से सिर्फ आधा मलबा ही हटाया जा सका है। देर रात टीम ने स्निफर डॉग और थ्रो वॉल्ट मशीनों से दबे लोगों की सर्चिंग की थी और 4 से ज्यादा पॉइंट पर लोगों के दबे होने के संकेत दिए थे, लेकिन मशीन से वहां पर किसी के जिंदा होने के सिग्नल नहीं मिले।

मेंटेन नहीं था हाजिरी रजिस्टर, यह लापरवाही

खनन नियमों के अनुसार, खदान में काम करने के लिए उतरने वाले मजदूरों, ड्राइवर, ऑपरेटर के लिए एक हाजिरी रजिस्टर होना चाहिए। कौन कितने बजे काम के लिए अंदर गया है, उसमें रिकॉर्ड दर्ज होता है। डाडम में जहां पर यह हादसा हुआ है, यह प्रतिबंधित एरिया है। खदान की ओर आने वाले एक मात्र रास्ते पर कंपनी ने बैरिकेडिंग कर रखी है और मुख्य रास्ते पर 6 CCTV लगाए गए हैं। रास्ते पर बगैर अनुमति के किसी के जाने पर मनाही है। इसके बावजूद यह पता न होना कि कितने लोग अंदर काम कर रहे थे और कौन-कौन अंदर था, अपने आप में खनन काम में चल रही बड़ी लापरवाही को बता रहा है, साथ ही नियमों की अनदेखी की ओर भी इशारा कर रहा है।

रविवार की सुबह घटनास्थल पर NDRF, SDRFऔर सेना के जवान आपस में विचार-विमर्श करते नजर आए।
रविवार की सुबह घटनास्थल पर NDRF, SDRFऔर सेना के जवान आपस में विचार-विमर्श करते नजर आए।

अरावली की पहाड़ियों में खनन के दौरान हुआ हादसा
शनिवार सुबह 8:30 बजे अरावली की पहाड़ियों में खनन के दौरान पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक गया था। हादसा गोवर्धन माइन्स की खदान में हुआ। इसमें 20 से 25 लोग पत्थरों के नीचे दब गए। पहाड़ दरकने से गिरे सैकड़ों टन वजनी पत्थरों के नीचे 4 पोकलेन मशीनें, 2 हॉल मशीनें, 2 ट्रैक्टर और 6 ट्रॉले व डंपर दब गए हैं।

वहीं हादसे की सूचना मिलते ही भिवानी जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू करवा दिया था। इसमें NDRF, SDRF और सेना की टीमें लगी हैं। वहीं पहाड़ का जो हिस्सा गिरा, उसमें तीन बड़े पत्थर हैं, जिन्हें हटाने में दिक्कत आ रही है। पुलिस और प्रशासन ने मीडिया के घटनास्थल पर जाने पर पाबंदी लगा दी है।

घटनास्थल पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौजूद हैं।
घटनास्थल पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौजूद हैं।

अरावली की पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर खनन होता है

भिवानी जिले में तोशाम इलाके के खानक और डाडम एरिया में अरावली के पहाड़ों में बड़े पैमाने पर खनन होता है। यहां का पत्थर हरियाणा के अलावा राजस्थान भी जाता है। प्रदूषण की वजह से दो महीने पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने यहां खनन पर रोक लगा दी थी। यह रोक हटने के बाद शुक्रवार को ही दोबारा खनन कार्य शुरू हुआ और शनिवार सुबह 8:30 बजे यह हादसा हो गया।

ठेकेदार को नहीं पता कितने लोग काम कर रहे थे

हादसे के समय खदान में कुल कितने मजदूर काम कर रहे थे, कंपनी के अधिकारी या ठेकेदार इसका कोई आंकड़ा नहीं दे पाए। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे भिवानी के SP ने भी जब ठेकेदार से वहां काम कर रहे लोगों की संख्या के बारे में पूछा तो वह कोई आंकड़ा नहीं बता पाया। दूसरी तरफ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन हादसे को दबाने में लगा है और मरने वालों की संख्या जानबूझकर छिपाई जा रही है।

घटनास्थल पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है।
घटनास्थल पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है।

खदान तक पहुंचने के रास्ते पर 3 जगह नाकाबंदी

तोशाम में अरावली पहाड़ियों के अंदर डाडम खनन एरिया में हादसे वाली जगह तक पहुंचने के लिए खानक गांव से 4 किलोमीटर लंबा रास्ता बेहद उबड़-खाबड़ है। यहीं पर पहाड़ी की तलहटी में तकरीबन 400 फीट नीचे खनन हो रहा है। खानक गांव से आम लोगों को खदान तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने 3 जगह नाकेबंदी कर रखी है। प्रशासन का तर्क है कि ज्यादा लोगों के पहुंचने से अफरा-तफरी का माहौल बन सकता है। उससे बचने के लिए ही खदान तक किसी को नहीं पहुंचने दिया जा रहा।

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