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मिस मैनेजमेंट:72 कराेड़ खर्च करके भी नहीं हो पा रही बरसाती पानी की निकासी, शहर के 4 बड़े इलाकों में न आईपीएस बना, न बिछाई पाइप लाइन

भिवानी4 दिन पहले
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सरकुलर रोड पर बनी जलभराव के समाधान के लिए डीसी जयबीर सिंह बुधवार देर रात अधिकारियों के साथ शहर में निकले। उन्होंने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को फोन कर पानी की शीघ्र निकासी करवाने के निर्देश दिए। डीसी ने रोहतक गेट बावड़ी गेट, दादरी गेट, हनुमान गेट, रेलवे ओवरब्रिज के पास जलभराव की समस्या भी देखी। - Dainik Bhaskar
सरकुलर रोड पर बनी जलभराव के समाधान के लिए डीसी जयबीर सिंह बुधवार देर रात अधिकारियों के साथ शहर में निकले। उन्होंने जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को फोन कर पानी की शीघ्र निकासी करवाने के निर्देश दिए। डीसी ने रोहतक गेट बावड़ी गेट, दादरी गेट, हनुमान गेट, रेलवे ओवरब्रिज के पास जलभराव की समस्या भी देखी।
  • 207 एमएलडी प्रति मिनट क्षमता के दाे बूस्टिंग स्टेशनाें से 30% और 33 एमएलडी क्षमता के स्टेशनाें से निकाल रहे 70% शहर का बरसाती पानी

अधिकारियाें की मिस मैनेजमेंट के चलते अमरुत याेजना के तहत 72 कराेड़ रुपये खर्च करने के बाद भी प्रशासन शहर से 30 प्रतिशत बरसाती पानी की निकासी ही करवा पा रहा है। जिस क्षेत्र में याेजना के तहत पाइप लाइन दबाने की जरूरत कम थी, उन क्षेत्राें में लाइन दबा दी गई, जबकि शहर के जिन क्षेत्राें में आईपीएस (इंटरमीडिएटर पंपिंग सिस्टम) बनाने व पाइप लाइन दबाने की ज्यादा जरूरत थी वहां बरसाती पानी निकासी की व्यवस्था ही नहीं की गई। यही कारण है कि 70 प्रतिशत शहर से प्रशासन 7 से 8 घंटे बाद भी पानी की निकासी नहीं करवा पाया।

सरकार की अमरुत याेजना के तहत मुख्य प्लान बरसाती पानी निकासी की थी। इसके लिए चंडीगढ़ में बैठे अधिकारियों ने भिवानी शहर की बरसाती पानी निकासी के लिए प्रपोजल बनाया और यह कार्य पब्लिक हेल्थ की बजाय नगरपरिषद काे दे दिया, जिसके पास तकनीकी रूप से न ताे इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए काेई सक्षम अधिकारी थे और न ही पर्याप्त संसाधन थे।

इसके चलते याेजना की देखरेख का कार्य एक रिटायर्ड एसडीओ काे दिया गया था। याेजना के तहत कार्य शुरू हुआ और एक साल बाद अधिकारियों के संज्ञान में आया कि पूरे शहर का बरसाती पानी याेजना के तहत नहीं निकाला जा सकेगा। इसके बाद तत्कालीन डीसी अजय कुमार ने नप व पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों के साथ मीटिंग लेकर रोहतक गेट, दादरी गेट, हनुमान गेट, पतराम गेट आदि क्षेत्राें से बरसाती पानी निकासी के लिए 18 कराेड़ का दूसरा प्रोजेक्ट तैयार का चंडीगढ़ भेजा गया, लेकिन जिसकी सरकार की तरफ से अप्रूवल नहीं मिली।

इस तरह व्यवस्था हाे रही है डैमेज

अधिकारियाें की मिस मैनेजमेंट से शहर से पानी निकासी की व्यवस्था डैमेज साबित हाे रही है। शहर में पुराना जलघर के नजदीक 145 एमएलडी प्रति मिनट क्षमता का आईपीएस बनाने के बाद पानी की पर्याप्त निकासी नहीं हाे पा रही है। क्योंकि शहर में जहां बारिश से जलभराव की स्थिति बनती है उन क्षेत्राें काे पाइप लाइन के जरिये आईपीएस से जाेड़ा ही नहीं गया है। भारी बारिश के बावजूद 145 एमएलडी क्षमता के आईपीएस पर केवल 20 से 25 एमएलडी प्रति मिनट ही पानी पहुंचा है और बारिश का पानी मात्र 20 से 30 मिनट में ही निकाल दिया जाता है, जबकि 70 प्रतिशत शहर में गली, मोहल्ले व सड़काें पर 7 से 8 घंटे तक पानी जमा रहता है।

जानिए... अमरुत याेजना के तहत ये बनाई व्यवस्था

  • याेजना के तहत दाे आईपीएस सिस्टम बनाए गए हैं। एक सिस्टम पुराने जलघर के पास व दूसरा वैश्य कालेज के पास बना है। सदर थाना के पास दाेनाें लाइनाें का पंपिंग स्टेशन बनाया गया और पाइप लाइन से हांसी राेड हाेते हुए प्रेमनगर के पास पानी ड्रेन में डालने की व्यवस्था की गई।
  • वैश्य काॅलेज के पास 68 एमएलडी प्रति मिनट पानी निकासी की क्षमता के बनाए गए आईपीएस से बीटीएम राेड क्षेत्र, कृष्णा काॅलाेनी, रेलवे राेड क्षेत्र काे जाेड़ा गया है। यहां यह सिस्टम लगाना जरूरी था, क्योंकि यहां जलभराव रहता था और अब समय पर पानी निकासी हाे रही है।
  • पुराना जलघर के पास बनाए गए 145 एमएलडी क्षमता के सिस्टम से महम राेड गाेशाला से बड़ चाैक तक क्षेत्र जाेड़ा गया है। इसके अलावा बड़ चाैक से पालुवास राेड, कीर्ति नगर, पुराना हाउसिंग बाेर्ड आदि क्षेत्र काे जाेड़ा गया, जबकि इस आईपीएस की क्षमता शहर से बरसाती पानी निकासी की व्यवस्था है, लेकिन यहां बड़ी मुश्किल से भारी बरसात के बाद ही 20 से 25 एमएलडी पानी ही पहुंच पाता है। शेष समय यह सिस्टम बंद रहता है।

जानिए... ये हाे सकता है समाधान

  • अगर पुराने जलघर के पास 139 की बजाय 60 से 65 एमएलडी क्षमता का बूस्टिंग स्टेशन बनाया जाता और दादरी गेट क्षेत्र में 60 से 65 एमएलडी क्षमता का अतिरिक्त बूस्टिंग स्टेशन बनाया जाता ताे शहर से 100 प्रतिशत बारिश के पानी की निकासी 30 से 45 मिनट में आसानी से हाे सकती थी।
  • हनुमान गेट, दादरी गेट व बावड़ी गेट से रोहतक गेट तक पाइप लाइन दबाकर, फैंसी चाैक, महम राेड से बड़ चाैक हाेते हुए लाइन 139 एमएलडी के बूस्टिंग स्टेशन तक जाेड़ी जाए ताे शहर के 60 प्रतिशत हिस्से की बरसाती पानी निकासी हाे जाएगी।
  • इसके अलावा दादरी गेट क्षेत्र में 60 एमएलडी पानी क्षमता के बूस्टिंग स्टेशन का निर्माण कर इससे जैन चाैक, बावड़ी गेट, एमसी काॅलाेनी, भारत नगर, पतराम गेट, हनुमान गेट आदि क्षेत्राें काे जाेड़ा जाए।

70% पानी की यूं हाे रही निकासी

  • महम गेट से रोहतक गेट, दादरी गेट से हनुमान गेट तक बारिश के पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां का पानी नालाें व सड़काें के माध्यम से देवसर चुंगी पुराना बूस्टिंग स्टेशन पर पहुंचता है।
  • रविदास माेहल्ला, हालु बाजार, जैन चाैक, कन्हैयाराम क्षेत्र, नया बाजार, सराय चाैपटा, पतराम गेट, एमसी काॅलाेनी, भारत नगर, विकास नगर समेत पुराने शहर का बरसाती पानी भी देवसर चुंगी डिस्पाेजल पंप से ही निकलता है।
  • इसके अलावा शहर में पांच छाेटे बूस्टिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें पानी निकासी की क्षमता केवल 4-4 एमएलडी प्रति मिनट की है।

जानिए... यहां हाे रही है दिक्कत

शहर में 70 प्रतिशत पानी की निकासी अब भी देवसर चुंगी पुराने बूस्टिंग स्टेशन से हाे रही है, जबकि इस बूटिंग स्टेशन की क्षमता 25 एमएलडी प्रति मिनट है। शहर में दाे आईपीएस की क्षमता 207 एमएलडी प्रति मिनट है जहां से शहर के 30 प्रतिशत पानी की निकासी हाे रही है, जबकि शेष 33 एमएलडी क्षमता के बूस्टिंग स्टेशनाें से शहर के 70 प्रतिशत बरसाती पानी की निकासी हाे रही है।

टेंडर के अनुसार ही कंपनी ने स्ट्रॉम वाटर निकासी व अन्य कार्य किए हैं। अधिकतर कार्य पूरे हाे चुके हैं। दाेनाें बूस्टिंग स्टेशन चालू कर दिए हैं।'' -छतर सिंह, ठेकेदार, अमरुत याेजना।

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