निगम कि लापरवाही:गाय को पूरी-हलवा देने को रोकने को बनाईं थीं टीमें, ना गोसेवक रोक पाए, ना डॉक्टर काम आए

भिवानी10 दिन पहले
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अमावस्या पर तला हुआ भाेजन ज्यादा खिलाने से मृत गायाें काे लेकर राेहतक गेट चाैक पर विराेध जताते गाेसेवक। - Dainik Bhaskar
अमावस्या पर तला हुआ भाेजन ज्यादा खिलाने से मृत गायाें काे लेकर राेहतक गेट चाैक पर विराेध जताते गाेसेवक।
  • सर्वपितृ अमावस्या पर शहर में अलग-अलग जगहों पर 16 गायाें की माैत, 49 की हालत गंभीर

अपने पितृाें काे खुश करने के लिए हर वह आदमी पाप का भागी बन रहा है जाे गायाें काे तला हुआ भाेजन खिलाता है। इस अमावस्या पर भी तला हुआ भाेजन खाने से 16 गायाें की माैत हाे चुकी है जबकि 49 गाय माैत और जिंदगी के बीच जूझ रही है। यह पहली बार नहीं हाे रही है। यह हर साल हाेता है व गाे सेवक हर साल विराेध प्रदर्शन करते हैं तथा जाम लगाते हैं।

श्राद्धाें से पहले बार बार चिकित्सकाें व गाेसेवकाें की अपील के बावजूद नागरिक गायाें काे तला हुआ भाेजन खिलाने से बाज नहीं अा रहे हैं जिसका नतीजा सबके सामने हैं। इस बार भी पितृ अमावस्या पर शहर में नहीं अपितु गांवाें में भी तला हुआ भाेजन खिलाने लग गए हैं। इसके चलते शहर के साथ साथ आस पास के गांवाें में भी गायाें की स्थिति गंभीर हो गई। उन्हें उपचार के लिए शहर लाया गया जहां उनकी मौत हो गई।

गुरुवार को 16 गायों की मौत हो गई जबकि 49 जीवन व मौत के बीच जूझ रही है। हालांकि श्राद्धों से पहले गायों को बचाने के लिए शहर में जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों काे तला हुआ भोजन नहीं देने की अपील की थी। इतना हीं नहीं उन्होंने अलग अलग टीम गठित कर यह शेड्यूल बनाया था कि उनका प्रयास रहेगा कि वे अमावस्या पर एक गाय को अधिक भोजन नहीं देने देंगे।

इसके लिए शहर में एक दो जगह गो सेवकों की नागरिकों से बहस भी हुई। इसके अतिरिक्त पशुपालन विभाग ने गोशाला अस्पताल में एक दर्जन से अधिक पशु चिकित्सक व वीएलडीए के ड्यूटी का रोस्टर बनाया था, ताकि जो गाय बीमार हो उसे तुरंत इलाज दिया जा सके। इसके लिए गो सेवकों व चिकित्सकों ने तो अपनी ड्यूटी का सही निर्वहन किया लेकिन आम आदमी के सहयोग के बिना गायों की लगातार मौत हाे रही है।

हर साल होती है तला हुआ भोजन करने से गायों की मौत

अमावस्या पर गायों की मौत का पहला मामला नहीं है बल्कि हर साल यह होता है व हर साल तीस से चालीस गाय मौत के मुंह में चली जाती है। अमावस्या पर लगभग हर घर से गायों को काफी संख्या में तली हुई पूरियां व हलवा खिलाया जाता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए हर आदमी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

जब तक हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा इसी तरह गायों की मौत होती रहेगी। इस संबंध में गो सेवक संजय परमार ने कहा कि कोई भी काम सफल आमजन के सहयोग के बिना नहीं होगा। इसके लिए हर आदमी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी तथा अपने पितृ अमावस्या के दिन बेसहारा गायों को अधिक भोजन न देकर उसे गोशाला में पहुंचाने का काम करें ताकि हर गाय को बांट कर खाना दिया जा सके।

नप ने भी चलाया अभियान

नप ने सप्ताह भर से बेसहारा गो वंश को पकड़ने के लिए अभियान चलाया था लेकिन आज भी शहर के अनेक क्षेत्रों में काफी संख्या में बेसहारा गायों को देखा जा सकता है। इस संबंध में समाज सेवक रविंद्र लाखोटिया ने कहा कि यह किसी भी शास्त्र में नहीं लिखा कि गायों को तला हुआ भोजन खिलाने से पितृ खुश होते हैं। गायों की मौत से गायों को भोजन करवाने वाले पाप के भागीदार होते हैं व गो हत्या का पाप तो सबसे बड़ा पाप माना जाता है।

अफारा बनने से गाय की होती है मौत

पशु चिकित्सक डॉ. सुनील बुंदेला ने बताया कि तला हुआ भोजन का अधिक सेवन करने से एसीडोसीस बनती है जिससे गायों को अफारा आ जाता है। इससे उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है जिससे उनकी मौत हो जाती है।

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