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टिडि्डयों का एनकाउंटर:लोहारू के दस किलोमीटर क्षेत्र और तालु के जोहड़ में दवा छिड़ककर किया 60 फीसदी टिड्डियों का सफाया

भिवानी10 महीने पहले
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लाेहारू| चैहड़ खुर्द में टिड्डी दल से बचाव को लेकर राहत कार्य करवाते कृषि अधिकारी। - Dainik Bhaskar
लाेहारू| चैहड़ खुर्द में टिड्डी दल से बचाव को लेकर राहत कार्य करवाते कृषि अधिकारी।
  • विभाग ने किया 70 प्रतिशत टिड्डियों के खात्मे का दावा, आज भी चलाया जाएगा अभियान

लाेहारू, बहल व ढिगावा के बाद टिड्डी दल ने तालु गांव की लगभग 40 एकड़ में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया है। मंगलवार सुबह जहां तालु के खेतों में छिड़काव कर लगभग 60 प्रतिशत टिड्डियों का खात्मा किया वहीं लोहारू क्षेत्र के गांवों में लगभग दस किलोमीटर के क्षेत्र में सोमवार की तरह दवा का छिड़काव कर विभाग ने लगभग 70 फीसदी टिड्डियों के खात्मे का दावा किया है।

मंगलवार दिन में भी बची हुई टिड्डियां आकाश में मंडराती रही। रात को फिर से अभियान चलाया जाएगा। राजस्थान व हरियाणा पर टिडि्डयों का ये 26 साल का सबसे बड़ा हमला है। इससे पहले साल 1993 के जुलाई में उत्तर भारत के राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश पर हुआ था। तब दल में टिडि्डयों की संख्या कम थी।

कृषि विभाग की मुस्तैदी व किसानों के सहयोग के बल पर टिड्‌डी दल को खदेड़ा जा रहा है। जिले के करीब 17 गांवों के खेतों में लहलहा रही खरीफ फसलें टिडि्डयों की चपेट में आ चुकी हैं। इनके दल ने अब तक कपास, बाजरा, ज्वार व दलहन की फसलों पर सीधा अटैक किया है। इससे फसलों में सात से 20 फीसदी तक का नुकसान आंका जा रहा है। सोमवार को टिडि्डयों को एक भटका हुआ दल करीबन 70 किलोमीटर का सफर तय कर भिवानी के उत्तर पूर्वी छोर पर बसे गांव तालु के खेतों में मंडराने लगा।

गांव तालु के खेतों में 40 एकड़ फसल पर बैठी टिड्‌डियों के दल को विभाग के अधिकारियों व किसानों ने 10 ट्रैक्टर स्प्रे मशीन से छिड़काव कर 12 एकड़ में फैले तालु के साजन तालाब में टिडि्डयों की घेरा बंदी कर 60 फीसदी तक मार गिराया।

उत्तर भारत में मिलती हैं 4 प्रजाति की टिडि्डयां
अनुसार उत्तर भारत में टिडि्डयों की चार प्रजाति मिलती हैं। इसमें रेगिस्तानी टिड्डा, प्रवाजक टिड्डा, बंबई टिड्डा और पेड़ वाला टिड्डा शामिल हैं। इस बार राजस्थान के बाद हरियाणा पर रेगिस्तानी टिड्डों का हमला हुआ है। रेगिस्तानी टिड्डों को सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है। ये हरे-भरे घास के मैदानों में आने पर खतरनाक रूप ले लेते हैं। भिवानी में भी करीब एक दर्जन से अधिक गांवों पर टिडि्डयों का दल मंडरा रहा है। नमी वाले खेतों में इनका नुकसान प्रतिशत बढ़ता है।

मुंढाल क्षेत्र की कृषि विकास अधिकारी डॉ. सरोज ने बताया कि टिडि्डयों का भारी संख्या में पनपने का मुख्य कारण वैश्विक ताप वृद्धि के चलते मौसम में आ रहा बदलाव है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि एक मादा टिड्डी तीन बार तक अंडे दे सकती है और एक बार में 95-158 अंडे तक दे सकती हैं। टिडि्डयों के एक वर्ग मीटर में एक हजार अंडे हो सकते हैं। इनका जीवनकाल तीन से पांच महीनों का होता है। नर टिड्डे का आकार 60-75 एमएम तथा मादा का 70-90 एमएम तक हो सकता है।

जानिए...क्या कर रहा है विभाग
जिले में खुद कृषि एवं कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. रामप्रताप एवं उपनिदेशक प्रताप सिंह सभ्रवाल हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि राजस्थान बॉर्डर से सटे गांव फरटिया भीमा, ढाणी लालपुर, सेहर, ढाण जोगी, चैहड, खुर्द, चैहड़कलां, सिरसी, बिठन, हाजमपुर, सोहासड़ा, ताल, केहर व तालु गांव सहित आसपास के एक आध गांव टिड्डी प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशकों के छिड़काव सहित सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उधर, टिड्डी नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार 3 लाख लीटर मैलाथियान खरीद चुकी है। टिड्डी दल को नष्ट करने के लिए कृषि मंत्रालय ने डीजीसीए से ड्रोन के इस्तेमाल की अनुमति ले ली है। देश में छिड़काव के लिए ड्रोन का उपयोग पहली बार किया जा रहा है।

टिड्डी प्रभावित फसलों का 40 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा मिले
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन राजबीर सिंह फरटिया ने कहा  कि गठबंधन सरकार हर रोज किसानों के समक्ष झूठे दावे करती है। उनका किसानों की से कोई लेना देना नहीं है। टिड्डी दल ने जिस प्रकार हमला किया उससे किसानों की पूरी तरह से फसल बर्बाद हो गई है। उन्होंने सरकार को तुरंत प्रभाव से प्रति एकड़ 40 हजार रुपये मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने टिड्डी दल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए कहा कि भाजपा सरकार के जनप्रतिनिधि किसान हितैषी होने का झूठा दावा करते हैं। सच्चाई तो यह है कि आज भाजपा शासनकाल में किसान दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है।  किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। केवल किसानों को झूठे आश्वासन मिलते हैं।

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