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तारे-सितारे:इस बार सिंह पर आएंगी मकर संक्रांति, उपवाहन रहेगा हाथी, जप-दान का मिलेगा कई गुना फल

भिवानी17 दिन पहले
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  • 14 को सुबह 7:47 बजे सूर्य के उत्तरायण होते ही मलमास हो जाएंगे समाप्त

सूर्य का किसी राशि विशेष पर भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है। सूर्य हर माह में राशि का परिर्वतन करता है, इसलिए कुल मिलाकर साल में बारह संक्रांतियां होती हैं परन्तु दो संक्रांतियां सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती हैं, मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति। पं. कृष्ण कुमार शर्मा नांवा ने बताया कि सूर्य जब मकर राशि में जाते है तब मकर संक्रांति होती है। उन्होंने बताया कि इस समय सूर्य उत्तरायण होता है।

अत: शास्त्रानुसार इस समय किये गए जप और दान का फल अनंत गुना होता है। मकर संक्रांति से देवताओं के दिन और दैत्यों की रात शुरू हो जाती है। उन्होंने बताया कि वैसे तो मलमास समाप्ति पर शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है लेकिन इस बार 17 जनवरी को गुरु अस्त हो रहे हैं अर्थात गुरु अस्त के चलते शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।

मलमास 14 को हो जाएंगे खत्म

14 जनवरी गुरूवार को सुबह भगवान भास्कर धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति आरंभ हो जाएगी। पं. नांवा ने बताया कि 14 जनवरी भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजकर 47 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे तथा सूर्य के उत्तरायण होते ही मलमास भी समाप्त हो जाएंगे।

दान-पुण्य और पर्वकाल सुबह 7:47 से रात्रि 11:47 तक करना श्रेष्ठ रहेगा, क्योंकि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद ही मकर संक्राति पर्व मनाने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन गुड़ से बने मिष्ठान, गर्मवस्त्र आदि दान के अलावा गायों को हरा चारा एवं तीर्थ स्नान पुण्यकारी माना गया है।

सिंह पर सवार होकर आ रही मकर संक्राति

मकर संक्राति का वाहन सिंह रहेगा व उपवाहन हाथी रहेगा। देव जाति की मकर संक्राति का कस्तूरी का लेप लगाकर चंपा के फूलों की माला, विचित्र चोली पहने शिरोभूषण से सजावट करती हुई दीवार के समान श्वेत वस्त्र धारण किए भुशुन्डायुध (धनुषनुमा) शस्त्र हाथ में लिए स्वर्ण पात्र में अन्न का भक्षण करते हुए आगमन हो रहा है। उन्होंने बताया कि देवजाति की यह संक्रांति बाल्यावस्था में बैठी है।

उन्होंने बताया कि मकर संक्राति 30 मुहूर्ती चलन के कारण धान्य आदि भाव स्थिर परन्तु तेजी को बल मिलेगा। वहीं वार नाम नंदा होने से वैज्ञानिक, शाेधकर्ता, साहित्यकार, व्याख्याता याता, लेखक तथा वरिष्ठ पत्रकारों को सुख प्रदान करेगी।

इसके अलावा नक्षत्र का नाम महोदरी होने से चौर्य कर्मशील, प्रलोभी, संग्रहशाील, स्टॉकिस्ट वर्ग के उत्साह को बढ़ाने वाली होगी जबकि मकर संक्राति का दिन के प्रथम भाग में प्रवेश के कारण विपक्षी दलों के मनोबल को गिराने वाली तथा शासक वर्ग व राजनेताओं को आने वाले समय में कष्ट का अनुभव कराएगी।

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