श्रीराम लीला मंचन:जीव्हा फिसलने पर कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी से इंद्र के सिंहासन की जगह मांगा निंद्रासन

भिवानी19 दिन पहले
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श्रीराम लीला मंचन में ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के बाद रावण, विभीषण व कुंभकर्ण चर्चा करते हुए। - Dainik Bhaskar
श्रीराम लीला मंचन में ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करने के बाद रावण, विभीषण व कुंभकर्ण चर्चा करते हुए।

जहारवीर गोगापीर मंदिर ग्रांउड में बुधवार रात को प्रथम पूज्य श्रीगणेश जी की पूजा अर्चना के साथ भगवान श्रीराम की लीला का मंचन आरंभ किया गया। श्रीराम लीला मंचन के प्रथम दिन नारदमुनि की तपस्या करने से इंद्र का सिंहासन हिल जाता है। इंद्रदेव को कालदेव ने बताया। इंद्रदेव कामदेव को तपस्या भंग करने के लिए भेजते हैं। कामदेव ने नारदमुनि की तपस्या भंग करने की कोशिश की।

नारदजी ने ने पूछा किसने भेजा। कामदेव इंद्रदेव का नाम लेते हैं। नारदमुनि को घमंड हो जाता है कि उसने कामदेव को जीत लिया है। इसके बाद नारदजी भगवान शिव, अपने पिता ब्रह्मा और विष्णु भगवान के पास जाते हैं। रावण, कुंभकर्ण और विभीषण का जन्म होता है। तीनों भाई ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या करते हैं। भगवान ब्रह्मदेव प्रसन्न होकर वरदान मांगने को कहते हैं।

विभीषण ने भगवान की भक्ति का वरदान मांगा। रावण ने अमरता का वरदान मांगा। कुंभकर्ण की जीव्हा फिसलने पर इंद्रदेव के सिंहासन की जगह पर निंद्रासन मांग लेता है। भगवान की लीला में रावण के पुत्रों का जन्म होता है। इस दौरान तत्कालीन सरपंच प्रतिनिधि गोबिंद सिंह, धर्मबीर रोहिल्ला, नरेश सोनी, नरसिंह, नेसू शर्मा, बंसी शर्मा, मुकेश भट्ट, नरेन्द्र प्रताप सिंह, महेंद्र प्रजापति और रिंकू परमार उपस्थित थे।

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