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सुविधा के बावजूद नुकसान:2012 में मिली 30 लाख की अल्ट्रासाउंड मशीन, रेडियोलोजिस्ट न होने से तीन साल से पड़ी बंद

चरखी दादरी11 दिन पहले
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दादरी। सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन रूम पर लगा ताला। - Dainik Bhaskar
दादरी। सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन रूम पर लगा ताला।
  • अब कंडम घोषित किए बिना नई मशीन की डिमांड
  • विशेषज्ञ का तबादला हो जाने के बाद सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन रूम पर लगा ताला
  • नई अल्ट्रासाउंड मशीन सहित 4 विशेषज्ञों की विभाग को भेजी डिमांड

जिले के सिविल अस्पताल में प्रदेश की सबसे महंगी अल्ट्रासाउंड मशीन होते हुए भी मरीजों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। पिछले तीन वर्षों से रेडियोलोजिस्ट नहीं होने से यह मशीन बंद कमरे में रखी हुई है। इसे चलाने के लिए रेडियोलोजिस्ट है नहीं कि विभाग ने एक और नई मशीन की डिमांड भेज दी है।

अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं चलने के कारण हररोज 10 से 15 गर्भवती व अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए निजी संस्थानों पर भेजना पड़ता है। जहां एक मरीज को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए 450 रूपये तक खर्च करने पड़ते हैं। मशीन के साथ ही सीएमओ ने विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए भी डिमांड भेजी गई है।

आठ साल पहले मिली थी 30 लाख रुपये की अल्ट्रासाउंड मशीन

कांग्रेस सरकार के दौरान जिले को पहली अल्ट्रासाउंड मशीन मिली थी। 2012 में यह दो मशीनें खरीदी गई थी जो उस समय की सबसे महंगी मशीनें थी। एक मशीन रोहतक पीजीआई तो दूसरी मशीन दादरी सिविल अस्पताल को दी गई थी।

इन की कीमत 30 लाख रुपये बताई गई थी जो एलएंडटी कंपनी से खरीदी गई थी। उस दौरान विशेषज्ञ डॉ.धर्मेंद्र सांगवान अल्ट्रासाउंड करते थे जिनका कुछ समय बाद तबादला कर नारनौल भेज दिया गया था। इसके कुछ समय बाद डॉ. राजसिंह दिसोदिया ने अल्ट्रासाउंड करने शुरू किए थे। लेकिन उनका भी तीन साल पहले यहां से तबादला कर दिया गया। ऐसे में तीन साल से मशीन बंद कमरे में रखी हुई थी।

टाईअप कर गर्भवती महिलाओं के करवा रहे नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड

सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन उसे चलाने के लिए विशेषज्ञ नहीं है। ऐसे में सिविल अस्पताल में निजी अल्ट्रासाउंड संस्थान के साथ टाईअप किया हुआ है। जहां पर गर्भवती महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है। जिनके रुपये निजी संस्थान को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दिए जाते हैं। अगर विभाग दादरी सिविल अस्पताल को विशेषज्ञ दे तो स्वास्थ्य विभाग को भी आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा और गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए जगह जगह चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

हर रोज 10 से 15 मरीजों को उठाना पड़ रहा आर्थिक नुकसान

सिविल अस्पताल में सामान्य ओपीडी में हररोज करीब 2 सौ से ढाई सौ मरीज अपना उपचार करवाने के लिए आते हैं। इस दौरान इन मरीजों में से करीब 10 से 15 को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा जाता है।

अगर सिविल अस्पताल की मशीन चलती तो यह अल्ट्रासाउंड निशुल्क होते और दूर चक्कर भी नहीं काटने पड़ते। लेकिन अब इन सभी को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए सिविल अस्पताल से करीब दो किलो मीटर दूर शहर में आना पड़ता है। जहां एक अल्ट्रासाउंड के करीब साढ़े 4 सौ रुपये लिए जाते हैं।

जानिए इन विशेषज्ञों के लिए भी भेजी गई डिमांड

जिले में तीन मंजिला 100 बेड अस्पताल भवन तो बना दिया गया। मगर यहां शुरूआत से ही विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। फिलहाल सिविल अस्पताल में हड्‌डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनस्थेसिया, फिजियोथैरेपिस्ट, आंखों का विशेषज्ञ और दांत रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।

वहीं अब सिविल अस्पताल में फिजिशियन (एमडी मेडिसन), ईएनटी(नाक, गला व मुंह के रोगों का उपचार), चाइल्ड स्पेशलिस्ट(बच्चों के रोगों का विशेषज्ञ) और रेडियाेलोजिस्ट (अल्ट्रासाउंड करने वाला विशेषज्ञ) नहीं है। ऐसे में सिविल अस्पताल की तरफ से चार विशेषज्ञ की डिमांड स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई है।

फिजिशियन की 4 बार भेजी जा चुकी मांग

कोरोना संक्रमित मरीजों को इमरजेंसी में उपचार देने के लिए जिले में आईसीयू तो बनाया हुआ है मगर एमडी मेडिसन (फिजिशियन) नहीं होने से मजबूरीवश इमरजेंसी मरीजों को रेफर ही करना पड़ता है। इसलिए सिविल अस्पताल की तरफ से फिजिशियन के लिए 4 बार डिमांड भेजी जा चुकी है। अब कोरोना वैक्सीन भी आने वाली है। जिसका टीकाकरण करते हुए अगर किसी की तबीयत बिगड़ती है तो उसे आईसीयू में ले जाकर उपचार किया जाएगा। वहां भी फिजिशियन नहीं होने पर इमरजेंसी मरीजों को रेफर करना पड़ेगा।

जल्द मिलेंगे विशेषज्ञ और नई अल्ट्रासाउंड मशीन : सीएमओ

हमने जिले के लिए नई अल्ट्रासाउंड मशीन की डिमांड भेजी है और उसे चलाने के लिए विशेषज्ञ की भी। वहीं सिविल अस्पताल में फिजिशियन, ईएनटी और चाइल्ड स्पेशलिस्ट की भी जरूरत है। इन सभी को हमने डिमांड भेजी है और जल्द यह सुविधाएं सिविल अस्पताल में मुहैया हो जाएंगी। पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन बार बार खराब होती रहती है और यह काफी लंबे समय से बंद पड़ी हुई है। इसे बनाने वाली कंपनी ने भी अल्ट्रासाउंड मशीनें बनानी बंद कर दी थी इसलिए इनके पार्ट भी नहीं मिलते। ऐसे में मरीजों को सुचारू रूप से सुविधा मिलती रहे इसलिए नई मशीन की डिमांड भेजी है।'' -डॉ.सुदर्शन पंवार, सीएमओ।

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