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कार्रवाई:एसडीएम जांच में 9 लाख, रिटायर्ड निदेशक की जांच में 14 लाख का गबन मिला, अकाउंटेंट व ऑपरेटर पर केस

चरखी दादरीएक महीने पहले
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दादरी डीआईटीएस भवन। - Dainik Bhaskar
दादरी डीआईटीएस भवन।
  • डीआईटीएस के कैश काउंटरों पर फीस रसीद काटकर सरकारी खजाने में जमा कराने की बजाय अकाउंटेंट और ऑपरेटर भरते थे जेब

डीआईटीएस (सरल केंद्र) में विभिन्न कार्यों की कटने वाली फीस सरकारी खजाने में डालने की बजाय अकाउंटेंट और ऑपरेटर मिलकर अपनी जेब में डाल रहे थे। इसकी भनक लगते ही उपायुक्त ने बाढड़ा एसडीएम से इसकी जांच करवाई तो सरकारी रुपयों के गबन का मामला उजागर हुआ था।

ऐसे में अब पीजीआई रोहतक के रिटायर्ड निदेशक से मामले की जांच करवाई तो 14 लाख रुपये का गबन सामने आया है। प्रशासन ने डीआईटीएस के दोनों कर्मचारियों से यह राशि रिकवर कर ली है और उन पर केस दर्ज करवा दिया है। इससे पहले भी डीआईटीएस में कर्मचारी हेराफेरी के चक्कर में जेल जा चुके हैं।

एसडीएम जांच में 9 लाख तो निदेशक की जांच में 14 लाख का गबन : मार्च महीने में डीआईटीएस वित्तीय मामलों को लेकर उपायुक्त को भ्रष्टाचार की शिकायत मिली थी। उपायुक्त ने तुरंत इसकी जांच बाढड़ा एसडीएम शंभू राठी को सौंप दी थी। एसडीएम की जांच में 8 लाख 90 हजार रुपयों की हेरफेर सामने आई थी। इसके बाद उपायुक्त ने इसकी जांच हरियाणा सरकार द्वारा नामित रोहतक पीजीआईएमएस के सेवानिवृत्त निदेशक एवं हरियाणा सरकार के मेडिको लीगल एडवाइजर डॉक्टर डीआर यादव को इंक्वायरी ऑफिसर नियुक्त कर दिया था। डॉ. यादव ने अपनी जांच रिपोर्ट में अकाउंटेंट और ऑपरेटर द्वारा 14 लाख रुपये की हेरफेर करनी की रिपोर्ट सौंपी।

जानिए... जांच में मिली 16 अनियमितताएं

डीआईटीएस में जितने भी कार्यों की रसीद काटी जाती थी उनमें से ज्यादा रसीदें मिली ही नहीं है। यानि रसीदों को खुर्द-बुर्द करके रुपये कर्मचारी अपनी जेब में डाल रहे थे। डीआईटीएस में सभी कार्यों में जितनी फीस आती है उसमें से 10 प्रतिशत सर्विस चार्ज डीआईटीएस के खाते में डाली जाती है। यह 10 प्रतिशत कैश हररोज अकाउंटेंट को ही डीआईटीएस के खाते में डलवाना पड़ता है। इसमें भी छेड़खानी की गई है।

गबन करने के और भी कई तरीके बरते गए। अक्टूबर, नवंबर व दिसंबर 2020 में फीस की रसीदें तो काटी गई थी मगर रिकार्ड में रसीद ही नहीं मिली हैं। इतना ही नहीं कैश जमा करवाने के बाद मिलने वाली रसीदें भी गायब थी। कैश जमा करवाने वाली रसीदों की तिथि भी बदली हुई पाई गई हैं। कैश एंट्री में भी काफी जगह कटिंग की हुई हैं। कैश सीट में रसीद देने के बाद कॉपी बच जाती है, मगर कैश सीट में कॉपी तक नहीं मिली हैं।

10 महीने पहले ही आरसी क्लर्क को पकड़ा था

डीआईटीएस में ही ड्राइविंग लाइसेंस क्लर्क सुनीता देवी दलाल के साथ मिलकर भ्रष्टाचार फैला रही थी। दलाल टाइपिस्ट प्रदीप यादव लोगों से डीएल बनवाने के नाम पर अतिरिक्त रुपये लेता था। सीएम फ्लाइंग की छापेमारी के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों भ्रष्टाचार के मामले में जेल भी जा चुके हैं।

राशि को सरकारी खजाने में नहीं करवाते थे जमा

डीआईटीएस में अकाउंटेंट अंकित सांगवान और ऑपरेटर शशी कुमार मिलकर कैश काउंटरों पर आने वाली राशि को सरकारी खजाने में जमा करवाने की जगह अपने पास रखते थे। लेकिन पीजीआई के रिटायर्ड निदेशक की जांच में दोषी मिले दोनों कर्मचारियों को उपायुक्त ने तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। अब दोनों के खिलाफ जिला प्रशासन की शिकायत पर सिटी थाना पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

डीआईटीएस में ये होते हैं कार्य

डीआईटीएस में ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, जमीनी इंतकाल, जमीनी रजिस्ट्री सहित अन्य कार्य किए जाते हैं जो सरल केंद्र में होते हैं। इन सभी कार्यों के लिए कैश काउंटर खुले हुए हैं। जिनकी काउंटर पर रसीद काटकर दे दी जाती है और लोगों से फीस के नकद रुपये लिए जाते हैं।

जो भ्रष्टाचार करेगा उस पर होगी कार्रवाई : उपायुक्त

उपायुक्त अमरजीत सिंह मान ने कहा कि डीआईटीएस के कैश में हुए भ्रष्टाचार की जांच पीजीआई के रिटायर्ड निदेशक डॉक्टर डीआर यादव ने की है। जिनकी जांच में करीब 14 लाख रुपये का गबन सामने आया है। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर डीआईटीएस के अकाउंटेंट और ऑपरेटर पर केस दर्ज करवाया गया है।

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