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कोरोना असर:73 साल के इतिहास में दूसरी बार अड़चन, रावण का 40, मेघनाथ व कुंभकरण का 35-35 फुट कद घटेगा

चरखी दादरी14 दिन पहले
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रामलीला मंचन नहीं होने से सुनसान पड़ा शहर में रामलीला मैदान।

हिंदु धर्म में विशेष महत्व रखने वाली रामलीला मंचन इस बार कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया है। 73 साल में दादरी के अंदर यह दूसरी बार हुआ है कि रामलीला मंचन नहीं होगा। इससे पहले कमेटी डायरेक्टर की मौत के कारण मंचन नहीं किया था और इस बार कोरोना महामारी के कारण मंचन नहीं करने का फैसला लिया गया है।

हर साल दादरी में विजय दशमी के दिन रावण का 45 फुट ऊंचा पुतला और मेघनाथ व कुंभकरण का 40-40 फुट ऊंचा पुतला फूंका जाता था। लेकिन अब पहली बार ऐसा होगा कि बुराई का खात्मा करने के लिए रामलीला कमेटी 5-5 फुट ऊंचे तीनों पुतले बनाकर रामलीला ग्राउंड में ही दहन करेगी। अब तक रामलीला मंचन के दौरान हर साल सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु कलाकारों का अभियान देखने पहुंचते थे। जिससे उनकी श्री राम के प्रति आस्था और ज्यादा बढ़ती थी और लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश मिलता था।

1947 के बाद 1996 में भी रोका गया था मंचन

सन् 1947 से ही लगातार दादरी में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। हर साल नए नए कलाकार रामलीला मंचन के दौरान अपने अभिनय की छाप छोड़ते आ रहे हैं। लेकिन दादरी में इस बार दूसरा वक्त है जब रामलीला मंचन रोका जा रहा है। इससे पहले सन 1996 में भी रामलीला मंचन नहीं किया गया था। रामलीला कमेटी पदाधिकारी ने बताया कि उस समय मंचन शुरू होने ही वाला था कि कमेटी के डायरेक्टर का देहांत हो गया था। इसलिए मंचन नहीं किया गया था। 73 साल में यह दूसरी बार है कि कमेटी रामलीला मंचन नहीं कर रही है।

भीड़ न हो इसलिए रामलीला ग्राउंड में किया जाएगा पुतलों का दहन

दादरी की प्रसिद्ध व प्राचीन श्री रामलीला कमेटी हीरा चौक हर साल विजय दशमी पर बुराई का दहन करने के लिए 45 फुट ऊंचा रावण का पुतला और 40-40 फुट ऊंचा कुंभकरण व मेघनाथ का पुतला बनवाती आई है। इतने ऊंचे पुतलों का दहन देखने के लिए दूर दराज के गांव से भी लोग शहर में आते थे। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते तीनों का कद काफी कम हो गया है। क्योंकि इस बार दशहरा के दिन रामलीला कमेटी तीनों पुतले 5-5 फुट के बनाकर दहन करेगी। भीड़ न जुटे इसलिए रामलीला ग्राउंड में ही इनका दहन किया जाएगा।

महेंद्रगढ़ के मशहूर कारीगरों से तैयार करवाए जाते हैं हर साल पुतले

दादरी में विजय दशमी के दिन रावण, मेघनाथ व कुंभकरण का पुतला जलाने के लिए महेंद्रगढ़ के मशहूर कारीगर से पुतले तैयार करवाए जाते हैं। महेंद्रगढ़ में ही दिल्ली, जम्मू कश्मीर जैसे बड़े महानगरों के लिए पुतले तैयार करवाए जाते हैं। यह पुतले बनाने के बाद दादरी पहुंचाने के लिए टुकड़ों में तैयार किए जाते हैं। इनमें सिर अलग व हाथ व पैर अलग से तैयार करके भेजे जाते हैं। विजय दशमी से एक दिन पहले ही यह पुतले ग्राउंड में सभी पार्ट जोड़कर खड़े किए जाते हैं। कमेटी पदाधिकारी ने बताया कि इस बार छोटे पुतले बनवा कर जलाए जाएंगे। जो दशहरा से तीन चार दिन पहले ही बनने के लिए दिए जाएंगे।

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