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भास्कर सरोकार:उच्च शिक्षण संस्थान लिखेंगे महिला सशक्तीकरण की नई इबारत

चरखी दादरी15 दिन पहले
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  • जिला मुख्यालय पर गवर्नमेंट पीजी कॉलेज खुलने से हर साल 5 हजार युवा नहीं जाएंगे दूसरे जगह

दादरी जींद महाराजा के समय जिला था। 1900 से पहले ट्रेन से जुड़ गया था। 1912 में सरकारी मिडिल स्कूल, 1935 में सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का बड़ा कारखाना, वैश्य स्कूल, पुरानी अनाज मंडी शुरू हुई थी। 1965 में जनता कॉलेज शुरू हुआ था। आबादी थी मात्र 13-14 हजार की। 80 के दशक में हरियाणा टूरिज्म से एक बेहतरीन सरगम होटल का निर्माण कर दिया था। आज दादरी शहर की आबादी करीबन एक लाख और जिले की करीबन 6 लाख है।

शहर और उसके आसपास लगने वाले गांवों की आबादी के लिहाज से अब तक जिला मुख्यालय पर तीन से चार सरकारी कॉलेज होने चाहिए थे। पड़ोसी जिलों में कॉलेजों के साथ-साथ विश्वविद्यालय खुले हुए हैं। इंजीनियरिंग कालेज चल रहे हैं। मेडिकल कॉलेज पर कार्य चल रहा है। दादरी शहर के लोग आज भी 40 साल पीछे चल रहे हैं। इसको लेकर अब सरकार को जल्द से जल्द युवाओं के भविष्य को लेकर उच्च शिक्षा के लिए बेहतरीन संस्थान शुरू करना चाहिए।

कॉलेज आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तीकरण के लिए आवश्यक

जिले में खासकर जिला मुख्यालय पर उच्च शिक्षा के लिए बेहतरीन सरकारी संस्थान ना होने के कारण हमारे युवा और खासकर लड़कियां स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाते। क्योंकि सभी के लिए दूसरे शहरों और प्रदेशों में जाकर पढ़ाई करना मुमकिन नहीं होता है। इसी कारण से हमने भी यहां बेहतरीन कॉलेज ना होने के कारण आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई। तभी आगे बढ़ पाए। आज भी यदि शहर में अच्छा संस्थान खुल जाता है तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सेफ हो जाएगा। यही बच्चे क्षेत्र को आगे बढ़ाने में बेहद मददगार होंगे।

यदि छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा हासिल करेंगे, तो वे बेहतर रोजगार पाने के लिए कौशल हासिल करेंगे। इस कारण से ये युवा वर्ग ही स्थानीय विकास में योगदान देंगे। जिससे आत्मा निर्भर भारत को बढ़ावा मिलेगा। ये यह युवा स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करेगा। इसलिए जिले में उच्च स्तर की शिक्षा के लिए सरकारी पीजी कॉलेज आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तीकरण के लिए आवश्यक है। इससे क्षेत्र का समग्र सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास भी होगा।'' -आशीष सांगवान, आईएएस, मध्य प्रदेश कैडर।

सरकारी कॉलेज खुलसे से हर साल 5 हजार बच्चों को जिले में रोका जा सकेगा

जिला मुख्यालय पर सरकारी पीजी कॉलेज खुलने से जिले के कम से कम 5 हजार बच्चों का दूसरे शहर में पलायन करने से रोका जा सकता है। दादरी शहर पर 30 गांव झज्जर जिले के तथा 20 गांव महेंद्रगढ़ जिले के वो सीधे सीधे दादरी शहर से जुड़े हुए हैं। जिले के ग़रीब किसान, मज़दूर के बच्चे जो आर्थिक अभाव मे बाहर नहीं जा पाते। उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते है। आज दादरी के हज़ारों बच्चे रोहतक, हिसार, चंडीगढ़ जाते है जिससे उनके आर्थिक और मानसिक भार पड़ता है। कितनी ही लड़कियों की शादी कर दी जाती है तथा 12 तक ही पढ़ पाती है। दादरी शहर में सरकारी कॉलेज हो तो बच्चों को आनर्स कोर्सेज की पढ़ाई करने को मिल जाएगी।

हॉस्टल की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा आज के जमाने के हिसाब से बॉयो टेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी, बीए मनोविज्ञान आदि जैसे विषयों की पढ़ाई करने का अवसर मिल जाएगा। इसके अलावा मनोविज्ञान में एमए, अंग्रेजी और एमएससी गणित, भौतिकी, फिजिक्स, कैमस्ट्री आदि विषय पढ़ने का सपना भी पूरा हो जाएगा। अब तक यहां कोई भी मास्टर डिग्री के कोर्स खास ना होने बच्चे बाहर जाने को मजबूर हैं।'' -दीपक धांगड़, पूर्व सहायक डायरेक्टर, रक्षा मंत्रालय एवं नायब तहसीलदार

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