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कर्मचारियों का प्रदर्शन:मिड-डे मील वर्कर्स नेे मानदेय में बढ़ोतरी करने व अन्य मांगों और समस्याओं कोे हल करने की मांग उठाई

चरखी दादरी6 दिन पहले
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मांगों को लेकर प्रदर्शन करते मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के सदस्य।

मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन जिला कमेटी सीटू व सहयोग सर्व कर्मचारी संघ द्वारा गुरुवार को एसकेएस कार्यालय से जिला स्तरीय प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम नगराधीश को ज्ञापन सौंपा। जिला प्रधान बबली ने बताया कि इस ज्ञापन के माध्यम से मिड-डे-मील वर्कर्स के मानदेय में बढ़ोतरी करने व अन्य मांगों तथा समस्याओं के हल बारे मुख्यमंत्री से मांग की गई है।

उन्होंने इस ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि वे उक्त मांगों को पूरा करते हुए त्वरित कार्रवाई अमल में लाएंगे। उन्होंने अपनी प्रथम मांग मिड-डे-मील वर्कर्स के मानदेय में तुरंत बढ़ोतरी की जाए व कम से कम न्यूनतम वेतन 18 हजार किया जाए। दूसरी मांग स्कूलों में मिड-डे-मील वर्कर्स से करवाई जा रही बेगार बंद किए जाए। तीसरी मांग स्कूलों में घास व पेड़ आदि के काम करवाने का काम मनरेगा के तहत करवाया जाए। यदि मिड-डे-मील वर्करों से काम करवाना है तो उन्हें अलग से 600 रुपये दिहाड़ी दी जाए।

चौथी मांग में सभी स्कूलों में बिजली, पीने के पानी आदि की पूरी व्यवस्था करवाई जाए। 5वीं मांग सभी मिड-डे-मील वर्कर्स को बीपीएल की श्रेणी में मानते हुए राशन डिपो से सस्ता राशन उपलब्ध करवाया जाए व अन्य मांग की है जैसे किसी भी वर्कर को काम से न हटाया जाए व हटाई गई वर्करों को काम पर रखा जाए। वर्करों के बकाया मानदेय का तुरंत भुगतान किया जाए। वर्दी का दिया जाने वाला भत्ता 1200 किया जाए व रंग बदला जाए आदि मांगों को रखा है।

इस अवसर पर मिड-डे-मिल जिला सचिव सुदेश ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कोरोना महामारी के चलते सभी स्कूलों में बच्चों का आना बंद है। हरियाणा सरकार व विभाग के निर्देशानुसार मिड-डे-मील वर्कर्स लाभार्थी बच्चों को घर-घर राशन पहुंचा रही है। इसके साथ ही स्कूलों में अब शिक्षकों व अन्य स्टॉफ की सहायता कर रही है। राज्य के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 30 हजार के करीब मिड-डे-मिल वर्कर्स काम कर रही है। जिन्हें वेतन के नाम पर अभी भी बहुत ही कम मानदेय 35 सौ में गुजारा करना पड़ता है यह मानदेय भी साल में 10 महीने मिलता है। सीटू जिला संयोजक सुमेर सिंह ने बताया कि हमें मामूली वेतन मिलता है, दूसरे तमाम काम-धंधे बंद है, तो परिवार का गुजारा होना संभव नहीं है। इस अवसर पर सफाई कर्मी यूनियन के ब्लॉक सचिव मनफूल, बिमला, निर्मला, सुनीता, राजबाला, सुमन, अनिता, सुनीता, कविता, सुमित्रा, राजकला, माया आदि वर्कर्स उपस्थित थी।

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