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देरी:33 साल बाद भी नहीं मिला जिला स्तरीय लाइब्रेरी के लिए खुद का भवन

चरखी दादरी3 दिन पहलेलेखक: सोमेश चौधरी
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लाइब्रेरी में रखी किताओं की अलमारी। - Dainik Bhaskar
लाइब्रेरी में रखी किताओं की अलमारी।
  • तीन साल पहले सीएम ने की थी जिला स्तरीय डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की घोषणा, फिलहाल लाइब्रेरी में 15 हजार किताबें, 800 आजीवन मेंबर

पुस्तक प्रेमियों और युवाओं को लेकर शहर में प्रशासन की ओर से 1988 में लाइब्रेरी का शुभारंभ किया गया था। 33 साल के अपना सफर पूरा करने पर लाइब्रेरी के लिए अपना कोई भवन नहीं है। सुरक्षित और बेहतर भवन न होने के कारण अब जिला स्तरीय लाइब्रेरी में मात्र 15 हजार किताबें और 800 मेंबर है। अगर समय रहते लाइब्रेरी का खुद भवन तैयार हो जाता तो 1 लाख से अधिक किताबें होती और 10 हजार से अधिक मेंबर होते।

तीन साल पहले मुख्यमंत्री ने जिले के लिए डिजिटल लाइब्रेरी खोलने की घोषणा की थी, जिस पर अभी तक कोई खास अमल नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि लाइब्रेरी बनाने को लेकर प्रक्रिया पर कार्य चल रहा है। जल्द ही लाइब्रेरी के लिए खुद के भवन का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। 1988 में बस स्टैंड के सामने एक कमरे से शुरू हुई लाइब्रेरी में 33 साल में कुछ खास प्रोगेस नहीं कर पाई है।

1990 में लाइब्रेरी को लघु सचिवालय परिसर में खंडर पड़े भवन में शिफ्ट कर दिया गया था। जहां अक्सर बारिश के मौसम में जलभराव रहता था। इस जगह पर लाइब्रेरी 2017 तक रही। सितंबर 2017 में इसे पंचायत विभाग कार्यालय परिसर के एक छाेटे से हॉल शिफ्ट कर दिया गया। जहां बमुश्किल से 10 से 15 बच्चे ही बैठकर पढ़ सकते हैं। किताबों के लिए अलमारी रखने की भी कुछ खास जगह नहीं है। जगह की कमी के कारण कंप्यूटर सिस्टम भी डिब्बों में पैक पड़े हैं।

वाई फाई की मिल सकती है सुविधा

अन्य जिलों की लाइब्रेरी की अगर बात की जाए तो काफी कुछ सुविधाएं इनमें मिल रही है। आजकल इंटरनेट का जमाना है। इस कारण से लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने वाले सदस्यों को फ्री वाई फाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। जिले में भी अगर एक बेहतरीन लाइब्रेरी होती तो शायद यहां के युवाओं को भी ये सुविधाएं उपलब्ध होती।

बच्चे भी आराम से बैठ कर करते पढ़ाई

उपमंडल के लिए 33 साल पहले खोली गई लाइब्रेरी में अभी 15 हजार 600 के करीबन किताबें हैं। जोकि जिले को देखते हुए काफी कम हैं। जबकि आजकल तो कंपीटीशन का जमाना है। युवा वर्ग इस कंपीटीशन के लिए दिनरात मेहनत कर रहा है। अगर आज जिला स्तरीय लाइब्रेरी के लिए खुद का भवन होता तो बच्चे यहां आराम से बैठकर अपनी पढ़ाई करते।

510 रुपये में बन सकते हैं आजीवन मेंबर

फिलहाल जिले में चल रही लाइब्रेरी का मेंबर बनने के लिए कुछ खास फीस नहीं चुकानी पड़ती। इसके लिए आपको 510 रुपये और दो आईडी की फोटो कॉपी जमा करवानी होती है। इसके बाद आप लाइब्रेरी के आजीवन सदस्य बन जाते हैं। आप यहां से किताबें पढ़ने के लिए घर भी लेकर जा सकते हैं। बशर्ते तय नियमों का आपको पालन करना होगा।

आज के समय में डिजिटल लाइब्रेरी होना बेहद जरूरी

करियर काउंसलर आरसी पूनिया का कहना है कि आज के युग में एक बेहतरीन सुविधाओं से लैस लाइब्रेरी का होना बेहद जरूरी है। बल्कि शहर में नहीं प्रत्येक गांव में भी। यह बड़ा आश्चर्य का विषय है कि दादरी जैसे जिला मुख्यालय पर आज भी एक कमरे में लाइब्रेरी चलाई जा रहा है। जहां समय के हिसाब से देखा जाए तो किताबों की संख्या और वैरायटी काफी कम है।

सीएम की घोषणा के मुताबिक जिले में डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण किया जाना है। इसको लेकर नप ने जिला प्रशासन से लघु सचिवालय परिसर में खाली पड़ी जमीन में से 2274 स्क्वेयर फुट जमीन देने के लिए फाइल भेजी हुई है। इस जमीन पर बनने वाले भवन में एक मंजिल पर ओल्ड एज होम तथा ऊपरी मंजिल पर लाइब्रेरी का निर्माण किया जाना है। नीचे बेसमेंट में पार्किंग स्थल बनाया जाएगा।'' -प्रशांत पराशर, सचिव, नगर परिषद।

जिले के लिए बनने वाली डिजिटल लाइब्रेरी को लेकर प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि इसी महीने रेवन्यू डिपार्टमेंट से जमीन के लिए मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद नक्शा और एस्टीमेट तैयार कर सरकार को भेज दिया जाएगा। ऐसे कार्यों के लिए बजट की कोई दिक्कत नहीं होती। जल्द ही मंजूरी मिल जाती है। अगले एक दो महीनों में इसका निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।'' -अमरजीत सिंह मान, जिला उपायुक्त।

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