विरोध / आरक्षण रोस्टर को लेकर आरक्षित वर्ग के लोगों में रोष, हजरस ने दी आंदोलन की चेतावनी

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दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

चरखी दादरी. मुख्य सचिव की अनुशंसा के आधार पर हरियाणा अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा 15 नवंबर 2018 को हरियाणा में आरक्षण नीति व पदों के रोस्टर सिस्टम को परिभाषित करने वाले पत्र को वापस लेना सरकार की अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता को दर्शाने वाला है। ये बात हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान प्रेम बाकोलिया, राज्य महासचिव बलजीत सिंह दहिया, भिवानी जिला प्रधान सुरेंद्र व जिला सचिव जेके बौद्ध ने ने कही।

उन्होंने हरियाणा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा की आज इस पत्र को वापस लेकर हरियाणा सरकार ने जता दिया है कि वह किसी भी सूरत में हरियाणा में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व शासन प्रशासन में नहीं चाहती। हरियाणा सरकार आरक्षण व इसके प्रावधानों को विवादास्पद बनाकर समाज में भेदभाव व आपसी मतभेद बढ़ाकर समाज को तोडऩे का काम कर रही है। अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के पक्ष में जब भी कोई पत्र जारी होता है तो प्रशासन उसको लागू करने में आनाकानी करते हैं तथा विरोधी पत्र को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाता है।

इस पत्र की हिदायतों को आज तक हरियाणा के किसी भी विभाग में लागू भी नहीं किया गया था तथा इन हिदायतों ने सीधी भर्ती एवं पदोन्नति में रोस्टर के अनुसार सृजित होने वाले पदों एवं वरिष्ठता सूची के निर्धारण को स्पष्ट तौर पर अच्छी तरह से परिभाषित किया था। ताकि किसी भी विभाग में या किसी भी व्यक्ति के मस्तिष्क में रोस्टर के कारण निर्धारित होने वाले पदों के बारे में कोई संशय ना रहे। लेकिन पत्र के लागू होने से पहले ही सरकार ने इसे वापस लेकर वास्तविक चेहरा जनता को दिखा दिया है।

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