रामलीला:राम के हाथों ताड़का वध की लीला का किया मंचन

चरखी दादरी19 दिन पहले
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पुराना शहर स्थित रामलीला के मंच के माध्यम से तीसरे दिन अनेक प्रसंगों का संजीव चित्रण किया गया। इस दौरान पार्श्व गायन के माध्यम से बड़े ही सुंदर संगीत का साथ साथी कलाकारों ने दिया। सर्वप्रथम लीला के दौरान बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे संजय सोनी व अनिता जांघू द्वारा रिबन काट कर शुभारंभ करवाया गया।

इसके उपरांत सभी द्वारा विष्णु भगवान का पूजन करते हुए लीला में किसी भी तरह की विघ्न बाधा न आने देने तथा उनके प्रयास को पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करने की कामना की गई। लीला के दौरान मुख्य रूप से मंच के माध्यम से कलाकारों द्वारा दशरथ का शिकार पर जाना, श्रवण कुमार द्वारा दृष्टि हीन माता पिता की इच्छा को जानकर उन्हें अपने कंधों पर तीर्थ यात्रा पर ले जाना, उन्हें प्यास लगने पर नदी पर जल भरने के लिए जाना।

वन में शिकार के लिए छुपे हुए राजा दशरथ द्वारा श्रवण कुमार द्वारा जल भरने को किसी पशु द्वारा जल पीना समझा जाना व शब्द भेदी बाण को चलाना व श्रवण कुमार को लगना, उसकी चीख सुनकर राजा दशरथ का पहुंचना व बाते करना, श्रवण कुमार के कहने पर अंधे मां बाप तक जल पहुंचाना व पुत्र की मृत्यु का समाचार जान कर राजा दशरथ को पुत्र वियोग का श्राप देना, राम सहित चारो पुत्रों जन्म, उनका नामकरण, दशरथ द्वारा चारों पुत्रों को शिक्षा के लिए भेजना, विश्वामित्र के यज्ञ को राक्षसों द्वारा भंग करना, दशरथ दरबार पहुंच कर सहायता मांगना, मुनि के कहने पर राम व लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिए वन मे भेजना, वन में पहुंच कर राम के हाथों ताडका का वध होने तक की लीला को समस्त दर्शकांे के सामने मंचित किया गया। श्रवण कुमार की मौत व दशरथ के साथ आखिरी संवाद पूरा रामलीला ग्राउंड व इसमें बैठे दर्शकों भावुक हो गए।

इस दौरान श्रीराम लीला कमेटी द्वारा प्रधान उमेद सिंह प्रजापत, राधेश्याम बीकानेरिया, भोजराज शास्त्री, चेयरमैन मनोज वर्मा, राहुल मराठा, वरिष्ठ उपप्रधान रिंपी फौगाट, उपप्रधान जयभगवान मस्ताना, रोहताश शर्मा, महासचिव राजकुमार बंसल, सचिव रवि फौगाट, कोषाध्यक्ष शिव कुमार शर्मा, सह कोषाध्यक्ष अखिलेश बंसल, स्टेज कवि राधेश्याम बीकानेरिया, भोजराज शास्त्री, डायरेक्टर हरीश गर्ग, स्टेज डायरेक्टर सुरेश ढाकलिया, हरिओम बंसल, कथा वाचक रोहताश गुप्ता, राजेश खंचाजी आदि मौजुद रहे।

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