पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अब संघर्ष पानी के लिए:माइनिंग कंपनियों की 200 मीटर तक खुदाई से 10 गांवों में रसातल में पहुंचा भूमिगत जल, नहरी पानी भी नहीं मिल रहा

चरखी दादरी9 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
पंचायत को संबोधित करते वक्ता। - Dainik Bhaskar
पंचायत को संबोधित करते वक्ता।
  • 10 गांवों ने पंचायत कर कमेटी का किया गठन, समस्या से प्रशासन को करवाएंगी अवगत, समाधान नहीं हुआ तो करेेंगे आंदोलन

रामलवास जोन में माइनिंग कंपनी ज्यादा पत्थर निकालने के लिए 180 से 200 फुट गहराई तक खुदाई कर रही है। जिससे चव्वा निकल कर भूमिगत जल का दुरुपयोग हो रहा है। माइनिंग कंपनी की इस बड़ी लापरवाही से आस पास के करीब 10 गांव में भूमिगत जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है।

नहरी पानी नहीं पहुंचने के कारण इन 10 गांव की करीब 25 हजार आबादी भूमिगत पानी पर ही पीने और सिचाई के लिए निर्भर हैं। इस समस्या को लेकर रविवार को दस गांव की पंचायत हुई है। जिसमें एक कमेटी बनाई जाएगी जो इस समस्या से प्रशासन को अवगत करवाएगी।

बावजूद अगर इन माइनिंग कंपनियों पर प्रशासन कार्रवाई कर रोक नहीं लगाता है तो दोबारा सांगवान खाप की पंचायत बुलाकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। रामलवास माइनिंग में हो रहे भूमिगत जल के दोहन को बंद करवाने के लिए रविवार को बाबा गुफाधारी मंदिर परिसर में पंचायत का आयोजन किया गया।

जिसमें झोझू कलां क्षेत्र के साथ लगते 10 गांव के मौजिज लोगों ने माइनिंग से भूमिगत जल के दोहन को बंद करवाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। जो जिला उपायुक्त से मिल पानी के दोहन को बंद करवाने के बारे में ज्ञापन सौंप कर समाधान की अपील करेंगी।

इसी के साथ कमेटी द्वारा प्रशासन को चेताया जाएगा कि अगर प्रशासन द्वारा पानी का दोहन बंद नहीं करवाया जाता हैं तो सांगवान खाप द्वारा पंचायत का आयोजन कर आंदोलन जैसे ठोस कदम उठाए जाएंगे। जिससे होने वाली किसी भी अप्रिय घटना का जिम्मेदार प्रशासन व माइनिंग कंपनी होगी। रामलवास पहाड़ में माइनिंग कंपनी द्वारा लगभग 180 से 200 फिट गहराई में खुदाई की जा रही हैं। जिसके कारण जमीन से निकलने वाले पानी को माइनिंग कंपनी द्वारा खेतों व सड़कों में डाला जा रहा हैं।

ऐसे में पहाड़ के साथ लगते ट्यूबवेलों से पानी निकलना लगभग बंद हो गया हैं। जिसके कारण किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए अब खाप व प्रशासन से अपील की जा रही हैं कि पहाड़ से पानी का दोहन बंद करवाया जाए। ताकि किसान अपनी फसलों को बचा सके। पंचायत में गांव झोझू कलां, झोझू खुर्द, गोकल, रामलवास, चंदेनी, कलाली, बलाली, आदमपुर, मन्दोल व अन्य आस पास के गांव के लोगों ने भाग लिया।

ये रहे मौजूद

13 कन्नी प्रधान सूरजभान सिंह, सरपंच दलबीर सिंह, ताले राम, विजय मन्दोल, सत्यवान शास्त्री, बिशन सिंह आर्य, योगेश लिली, ठेकेदार महेश गोकल, सरपंच बिल्लू झोझू खुर्द, सरपंच राजबीर चंदेनी, प्रीतम चेयरमैन, राजकुमार सोलंकी, सीटू मैहड़ा, लीला ठेकेदार, टोनी, अनिल, बबलू जिम, अंकित, सुमित सांगवान आदि मौजूद थे।

ग्रामीण कई बार जिला उपायुक्त व अन्य अधिकारियों को करवा चुके हैं अवगत

गांव रामलवास के ग्रामीण जोगेंद्र लखटिया, भलेराम, अनुविर व मुकेश ने बताया कि पहाड़ में भूमिगत जल का दोहन किया जा रहा हैं। जिसके कारण आस पास के ट्यूबवलाें का पानी खत्म होता जा रहा हैं। इसके बारे में जिला उपायुक्त, माइनिंग अधिकारी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत करवाया गया हैं। जहां समाधान की बजाए पहाड़ में निकल रहे पानी को बरसात का पानी बता कर हमें लौटा दिया जाता हैं। प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होने पर मजबूरन खाप पंचायत करने पर विवश हो रहे हैं।

पहाड़ से निकलने वाले पानी के कारण ट्यूबवेलाें का पानी हो चुका खत्म

किसान सतबीर सिंह, अनिल कुमार, सुमित कुमार व जयसिंह ने बताया कि पहाड़ से निकलने वाले पानी के कारण हमारे ट्यूबवलाें का पानी खत्म हो चुका हैं। जिसके कारण मजबूरन हमें माइनिंग कम्पनी से ब्लास्टिंग किया हुआ पानी अपनी फसलों में देना पड़ रहा हैं। अगर प्रशासन द्वारा पहाड़ से निकलने वाले पानी को बंद नहीं किया गया तो अगले कुछ दिनों में ही क्षेत्र के सभी ट्यूबवेल जवाब दे जाएंगे ओर यहां खेती बन्द हो जाएंगी।

ब्लास्टिंग के पानी से सिंचाई करना बीमारियों को न्योता देना है: किसान

क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर लगभग 40 से 45 मीटर पर हैं। तो वहीं यहां नहरों से पानी की भी कोई सुविधा नहीं हैं। ऐसे में पानी की किल्लत के चलते किसानों को मजबूरन पहाड़ में ब्लास्टिंग हुए पानी से ही अपने खेतों में सिंचाई करनी पड़ रही हैं। ब्लास्टिंग में प्रयोग होने वाले केमिकल जो पानी मे मिल जाते हैं उसे सिंचाई करने का मतलब बीमारियों को न्यौता देने के बराबर हैं। लेकिन किसानों के पास अभी कोई और सहारा भी नहीं हैं।

कमेटी सदस्य बोले, आंदोलन पर विवश न करें प्रशासन

पंचायत में बनाई गई 21 सदस्यीय कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बार बार प्रशासन व माइनिंग कम्पनी को इस बारे में अवगत करवाया जा चुका हैं। रविवार को 13 कन्नी प्रधान सूरजभान सिंह की अध्यक्षता में निर्णय लिया गया हैं कि दादरी के विधायक व सांगवान 40 के प्रधान सोमबीर सांगवान की अध्यक्षता में प्रशासन से इस बारे में एक बार फिर से ज्ञापन के माध्यम से बात की जाएगी। अगर प्रशासन इस बार भी पानी के दोहन को बंद नहीं करवाता हैं तो सांगवान खाप आंदोलन करने पर विवश होगी। जिसमे होने वाली किसी भी अप्रिय घटना का जिम्मेदार प्रशासन व माइनिंग कम्पनी होगी।

प्रशासन व ठेकेदार से मिल की जाएगी अपील: सुरेन्द्र कुब्जा

सांगवान कन्नी 13 के सचिव सुरेन्द्र कुब्जा ने बताया कि पानी की समस्या सबसे बड़ी समस्या हैं। इस विषय मे माइनिंग ठेकेदार से मिलकर पानी के दोहन को बंद करने की अपील की जाएगी। जिसके बाद कमेटी दादरी के विधायक व सांगवान 40 खाप प्रधान सोमबीर सांगवान की अध्यक्षता में जिला उपायुक्त से मिलकर पानी के दोहन को बंद करवाने के लिए अपील करेगी। अगर प्रशासन किसानों की मांग नहीं मानता है तो कमेटी व खाप द्वारा कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।

खबरें और भी हैं...