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मरीज परेशान:रेडियोलॉजिस्ट के बिना 6 साल से एक्स-रे मशीन बनी कबाड़, मरीज हो रहे परेशान

बौंदकलां19 दिन पहले
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सीएचसी में बिना रेडियोलॉजिस्ट के कबाड़ में तब्दील होती एक्स रे मशीन। - Dainik Bhaskar
सीएचसी में बिना रेडियोलॉजिस्ट के कबाड़ में तब्दील होती एक्स रे मशीन।

राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले 6 साल से मरीजों को एक्स रे की सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। सीएचसी पर एक्स रे मशीन तो है लेकिन रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने से मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ती है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात ओर अधिक विकट बने हुए है।

प्रदेश सरकार एक ओर आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। लेकिन राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 जून 2015 को रेडियोलॉजिस्ट के सेवानिवृत्त होने के बाद पद रिक्त हो गया था। तब से अब तक प्रदेश सरकार सीएचसी पर एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी नहीं कर पाई है। एडवोकेट अमित परमार ने बताया कि पिछले छह साल से आसपास के गांवों के ग्रामीणों को एक्स रे की सुविधा नहीं मिलने से कलानौर कलां, भिवानी, रोहतक और चरखी दादरी के सरकारी अस्पतालों में जाना पड़ता है।

वहीं पर अनेक मरीजों को एक्स रे मशीन की सुविधा नहीं मिलने पर निजी केंद्र पर 250 से 300 रुपये देकर एक्स रे करवाना पड़ता है। एडवोकेट अमित परमार ने बताया कि इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर रेडियोलॉजिस्ट लगाने की मांग की जाएगी।

भाजपा नेताओं को भी करवाया जा चुका अवगत

छह साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने के बारे में भाजपा नेताओं को भी अवगत करवाया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद भी सीएचसी पर ग्रामीणों को एक्स रे की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में दर्जनों गांवों के मरीजों को असुविधा हो रही है।

जिले में भी नहीं है रेडियोलॉजिस्ट : सीएमओ

राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले छह साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद रिक्त होने के बारे में सिविल सर्जन डॉ. सुर्दशन पंवार से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पूरे जिले में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग को भी डिमांड भेज रखी है।

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