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खेती-किसानी:अंजीर की खेती में युवा दिखा रहे रुचि, इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर बढ़ी डिमांड

डबवालीएक महीने पहलेलेखक: पूर्ण धनेरवा
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डबवाली | अंजीर बाग के फल दिखाते प्रगतिशील किसान पंकज बिश्नोई। - Dainik Bhaskar
डबवाली | अंजीर बाग के फल दिखाते प्रगतिशील किसान पंकज बिश्नोई।

लॉकडाउन के समय युवा खेती में अधिक समय दे रहे हैं और नए तौर-तरीकों से खेती व बागवानी करते हुए मुनाफा कमा रहे हैं। राजस्थान सीमा पर सिरसा जिले के गांव गंगा के युवा इंजीनियर पंकज बिश्नोई अपने खेत में अंजीर का बाग लगाकर फल उत्पादन कर रहे हैं और कोविड से बचाव और पोस्ट कोविड इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर अंजीर की डिमांड अच्छी होने से मुनाफा भी अच्छा होने वाला है।

इंजीनियर पंकज कुमार बिश्नोई ने बताया कि पिछले साल से लॉकडाउन का अधिकतर समय अपने खेती और बागवानी में बिता रहे हैं। जिससे बागवानी और नेट हाउस से फल व सब्जी उत्पादन के साथ नई और और अन्य बागवानी उत्पादन के लिए अलग-अलग प्रयोग कर रहे हैं। फिलहाल उन्होंने 4 एकड़ में करीब 1700 पौधे अंजीर के लगाए हुए हैं और अब चौथे साल इसमें बहुत अच्छा फल भी आया हुआ है।

इन दिनों करीब 300 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से अंजीर की बिक्री हो रही है और आगामी समय में इसे ड्राई कर तैयार किए जाने पर और अधिक मुनाफा मिलने वाला है। किसान पंकज बिश्नोई ने बताया कि अंजीर के लिए किसान कम सिंचाई पानी वाली जमीन और एवरेज ट्यूबेल पानी की उपलब्धता वाले खेतों में भी आसानी से लगा सकते हैं। पौधा लगाने के दूसरे साल उत्पादन शुरू हो जाता है। तीसरे साल के बाद प्रत्येक पौधे से 5 किलोग्राम तक अंजीर का उत्पादन होता है जिससे प्रत्येक पौधे से 1500 और प्रत्येक एक एकड़ से करीब 6 लाख रुपए तक का फल प्राप्त किया जा सकता है।

जो किसानों को रबी खरीफ की सामान्य फसलों से होने वाले मुनाफे से करीब 10 गुना तक अधिक है। उन्होंने कहा कि युवाओं को निशुल्क जानकारी व ट्रेनिग देकर आधुनिक खेती व बागवानी के प्रति जागरूक कर रहे हैं जिसके तहत हरियाणा के अलावा पंजाब और राजस्थान के युवा उनके पास आ रहे हैं।

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