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पराली प्रबंधन की तैयारी...:रेड जोन में 101 व येलो में देंगे 62 सीएचसी, पराली जलाने वालों पर दर्ज होगा केस, सूचना नहीं दी तो नपेंगे अफसरों और नम्बरदार

फतेहाबाद5 दिन पहलेलेखक: विष्णु नाढोड़ी
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फतेहाबाद। लघु सचिवालय के सभागार में कृषि, राजस्व तथा पंचायत विभाग के अधिकारियों की पराली प्रबंधन विषय पर बैठक लेते उपायुक्त महावीर कौशिक। - Dainik Bhaskar
फतेहाबाद। लघु सचिवालय के सभागार में कृषि, राजस्व तथा पंचायत विभाग के अधिकारियों की पराली प्रबंधन विषय पर बैठक लेते उपायुक्त महावीर कौशिक।
  • फसल अवशेषों को नहीं जलाने वाली ग्राम पंचायतों को करेंगे प्रोत्साहित
  • गांवों में विभाग चलाएगा जागरूकता अभियान

कुछ दिनों बाद शुरू होने वाले धान की कटाई के सीजन में किसान फसल अवशेषों को आग ना लगाकर उन्हें जमीन में मिलाएं या उसकी गांठें बनाकर बाहर निकालें इसके लिए विभाग व जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आज से जिले में सूचना के लिए स्थापित किया गया कंट्रोल 01667-231122 रूम प्रभावी हो जाएगा जिस पर कोई भी नागरिक सूचना दे सकेगा।

सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम विभाग गोपनीय रखेगा। साल की तरह इस बार भी प्रशासन जिले के रेड व येलो जोन के गांवों में फसल अवशेषों को जलाने की घटनाएं रोकने के लिए प्रयास कर रहा है, इसी के चलते रेड जोन के 63 गांवों में 101 और येलो जोन के 66 गांवों में 62 और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

इतना ही नहीं हर गांव में जनप्रतिनिधियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी जो गांव में फसल अवशेष जलने पर उसकी सूचना प्रशासन को देंगे तथा कर्मचारी किसानों पर केस दर्ज करवाएंगे। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आज से जिले में सूचना के लिए स्थापित किया गया कंट्रोल 01667-231122 रूम प्रभावी हो जाएगा जिस पर कोई भी नागरिक सूचना दे सकेगा। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम विभाग गोपनीय रखेगा।

जानिए... पोर्टल पर अपलोड की जाएगी सीएचसी के नंबरों की सूची

डीसी ने मंगलवार को अधिकारियों की बैठक लेकर पराली प्रबंधन को लिए गए प्रबंधों की समीक्षा करते हुए विभाग को सभी सीएचसी सेंटरों के फोन नंबरों की सूची पोर्टल पर अपलोड करने के आदेश दिए हैं ताकि किसान अपने आसपास के सीएचसी संचालक से संपर्क कर अपने खेत में फसल अवशेषों को प्रबंधन कर सकें।

फसल अवशेष जलने की घटना रोकने में एसएचओ काे जिम्मेदारी

डीसी ने बैठक में आदेश दिए कि यदि किसी भी इलाके में फसल अवशेषों को जलाया जाता है तो उसे रोकने में संबंधित थाना क्षेत्र के एसएचओ की सीधी जिम्मेदारी बनती है। अगर किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा पट्टेदार पर दी हुई जमीन पर फानों में आग लगती है तो पट्टेदार सहित संबंधित कर्मचारी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सीएचसी के आए 216 आवेदन, कंबाइनों में स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम जरूरी

विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अब तक कस्टम हायरिंग सेंटर के 216 आवेदन आए हैं, इनमें से 163 सीएचसी रेड व येलो जोन में दी जाएंगी तथा बाकी अन्य गांवों को दिए जाएंगे। बता दें कि जिले में पहले ही 414 कस्टम हायरिंग सेंटर काम कर रहे हैं। वहीं सभी कंबाइनों में स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगवाना जरूरी है।

किसानों व नंबरदारों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के आदेश

यदि कोई किसी फसल अवशेषों को सीएचसी से इन-सीटू या एक्स सीटू प्रबंधन नहीं करके अवशेषों को आग लगाता है तो उस संबंध में हरसेक से आई लोकेशन के आधार पर संबंधित किसान के खिलाफ विलेज कमेटी के कर्मचारियों द्वारा एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी या जुर्माना लगाएगी।

अभियान के तहत कोई अधिकारी व कर्मचारी भी संतोषजनक कार्य नही करेगा तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित गांव के नंबरदार अगर पराली जलाने की घटना में शामिल पाए जाते हैं या वह समय पर सूचना नही देते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पिछले साल पूरी तरह फेल हुए थे प्रबंध, फिल्ड में नहीं उतरे थे अफसर

यहां बता दें कि पिछले साल भी जिला प्रशासन व कृषि विभाग ने जिले में कस्टम हायरिंग सेंटरों व अन्य तैयारियों के माध्यम से जिले में फसल अवशेषों में आग नहीं लगने के दावे किए थे, लेकिन सीजन शुरू होने के बाद अक्टूबर व नवंबर में किसानों द्वारा अवशेष जलाने के चलते जिले में प्रदूषण बहुत अधिक बढ़ गया था, क्योंकि विभाग के 50 फीसदी बेलर व सीएचसी वर्किंग में ही नहीं थे। जिले में पिछले साल 1600 से अधिक स्थानों पर फसल अवशेष जले थे तथा 300 से अधिक किसानों पर केस दर्ज हुए थे।

10 दिन बार शुरू होगा सीजन, जिले में 3 लाख एकड़ में धान की फसल

यहां बता दें कि जिले में इस बार भी लगभग तीन लाख एकड़ भूमि पर धान की खेती है। जिले में 10 दिन बाद यानि 25 सितंबर के बाद से धान की कटाई का काम शुरू हो जाएगा, ऐसे में देखना है कि विभाग के अधिकारी कैसे रेड व येलो जोन में नए सीएचसी स्थापित करेंगे तथा कैसे इतने कम समय में गांवों में जाकर किसानों को जागरूक कर पाएंगे।

लापरवाही नहीं की जाएगी बर्दाश्त- डीसी

गांवों में फसल अवशेषों में आग लगने की सूचना देने के लिए जनप्रतिनिधियों, नंबरदारों तथा अफसरों की ड्यूटियां लगेंगी, यदि कोई अभियान में सहयोग नहीं करता है या लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर एफआईआर व जुर्माना लगाया जाएगा, किसानों से अपील है कि वे फसल अवशेषों को आग ना लगाएं।''

-महावीर कौशिक, डीसी।

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