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शिक्षा:सरकारी स्कूलों में दाखिले बढ़े, टारगेट से चंद कदम ही पीछे, निजी स्कूल स्टूडेंट्स को प्रमोट करने के लिए कर रहे फीस का इंतजार

फतेहाबादएक महीने पहले
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पिछले सवा साल से कोरोना महामारी के चलते स्कूली बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है, कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने के बाद भी अब स्कूल कब खुलेंगे इसको लेकर सरकार की तरफ से कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, ऐसे में कोरोना कॉल में फीस नहीं दे पाने वाले 20 हजार 800 विद्यार्थियों के प्राइवेट स्कूलों ने अब तक अगली कक्षा में दाखिले नहीं किए हैं।

वहीं अभिभावकों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण उनके व्यवसाय पर काफी असर पड़ा और वेे निजी स्कूलों की अत्याधिक फीस नहीं भर पा रहे हैं। जिसके चलते जहां इन बच्चों के ड्रॉप आउट होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। फीस नहीं देने के चलते स्कूल इन बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं करवा रहे हैं। वहीं इन बच्चों के अगली कक्षा में एडमिशन करवाने को लेकर अब तक शिक्षा विभाग ने भी प्राइवेट स्कूलों को कोई सख्त आदेश जारी नहीं किए हैं।

पिछले साल प्राइवेट स्कूलों में थे 78909 विद्यार्थी

यहां बता दें कि जिले में पिछले साल सभी प्राइवेट स्कूलों में कुल 78909 विद्यार्थी थे। लेकिन इस साल अब तक जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों में अब तक मात्र 58109 विद्यार्थियों के ही दाखिले पोर्टल पर अपडेट किए गए हैं । ऐसे में स्पष्ट है कि निजी स्कूलों ने अब तक बाकी के 20800 विद्यार्थियों के अगली कक्षा में दाखिले किए ही नहीं हैं, जो चिंता का विषय है।

1.25 लाख एडमिशन के टारगेट से 6.3 फीसदी पीछे

जिला शिक्षा विभाग ने इस साल जिले में 1.25 लाख विद्यार्थियों के एडमिशन करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन अब तक जिले के सरकारी स्कूलों में 1.17 लाख एडमिशन हो पाए हैं, जिसके चलते विभाग टारगेट से 6.3 फीसदी पीछे है। हालांकि अब तक हुए 1.17 लाख दाखिले पिछले साल से 3696 अधिक हैं जिससे विभाग के अधिकारी राहत महसूस कर रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में बिना एसएलसी नहीं हो रहे दाखिले

​​​​​​​कुछ दिन पहले सरकारी स्कूलों में बिना स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट के एडमिशन शुरू किए गए थे, लेकिन बाद में बंद कर दिए। ऐसे में अब उक्त 20800 विद्यार्थी बिना एसएलसी के सरकारी स्कूल में भी दाखिले नहीं ले पाएंगे । वहीं प्राइवेट स्कूल बिना फीस भरे एसएलसी दे नहीं रहे हैं।

ये भी हैं कम दाखिलों के कारण

1. कुछ विद्यार्थी ऐसे हैं जो फीस नहीं दे पाए, अब स्कूल उन्हें एसएलसी नहीं दे रहे, जिसके कारण वे दाखिला नहीं ले पा रहे। 2. कुछ विद्यार्थी ऐसे हैं जिन्होंने स्कूलों से एसएलसी ले लिए हैं लेकिन दूसरे किसी स्कूल में दाखिला नहीं लिया है। 3. अधिकतर विद्यार्थी ऐसे हैं जो फीस नहीं दे पाए इसलिए स्कूल ने उनके दाखिले अगली कक्षा में अब तक अपडेट नहीं किए हैं।

समझिए... इसलिए है ड्रॉप आउट का खतरा

प्राइवेट स्कूलों में अब तक पिछले साल से 20800 बच्चों के दाखिले कम हुए हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में अब तक पिछले साल से मात्र 3696 बच्चे ही बढ़े हैं, ऐसे में ये विद्यार्थी ना ही तो निजी स्कूलों से जुड़े हुए हैं तथा ना ही इन्होंने सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है, जिसके चलते इन बच्चों के ड्रॉप आउट का खतरा बढ़ रहा है।

निजी स्कूलों द्वारा अभी तक हजारों बच्चों के दाखिले अपडेट नहीं किए हैं, इस संबंध में सभी बीईओ के माध्यम से निजी स्कूल संचालकों को जल्द से जल्द दाखिले अपडेट करने के निर्देश दिए हैं, यदि कोई स्कूल दाखिले अपडेट नहीं करता है तो उसके खिलाफ मुख्यालय को लिखा जाएगा।'' -दयानंद सिहाग, जिला शिक्षा अधिकारी।

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