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तैयारी:पराली जलाने की घटनाएं रोकने को कमेटियां गठित हरसेक से होगी ट्रेसिंग, कार्रवाई की नहीं गाइड लाइन

फतेहाबाद14 दिन पहले
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  • पराली प्रबंधन को जिले में 408 सीएचसी सेंटर, सैंकड़ों हैप्पी सीडर और रोटावेटर सब्सिडी पर दिए

किसान धान के अवशेषों को आग न लगाकर उन्हें जमीन में ही मिलाएं इसके लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। फसल अवशेषों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए इस बार धान के सीजन से पहले ही विलेज, ब्लॉक व उपमंडल लेवल तक की कमेटियों का गठन कर दिया गया है। लेकिन यदि किसान धान के अवशेषों को आग लगाते हैं तो उन पर क्या कार्रवाई होगी।

इसको लेकर मुख्यालय व सरकार की तरफ से अब तक जिला विभाग को कोई स्पष्ट गाइड लाइन जारी नहीं हुई है। वहीं इस बार भी प्रशासन आग की घटनाओं को हरसेक से आई लोकेशन के माध्यम से ट्रेस करेगा। इसके अलावा आग लगाने वालों की सूचना देने के लिए लघु सचिवालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। पराली प्रबंधन को जिले में पिछले साल 338 सीएचसी सेंटर थे लेकिन इस बार 70 और बढ़ाकर 408 किए गए हैं। इसके अलावा भी सैकंडों की संख्या में पराली प्रबंधन के यंत्र किसानों को सब्सिडी पर दिए गए हैं।

जानिए... ये कमेटियां की गई हैं गठित

1. विलेज लेवल कमेटी : इस कमेटी में कृषि विभाग के एडीओ, एटीएम या बीटीएम नोडल होंगे जबकि पंचायत विभाग से ग्राम सचिव व राजस्व विभाग से पटवारी होंगे। 2. ब्लॉक लेवल कमेटी : कृषि विभाग का एसडीओ या एसएमएस इस कमेटी का नोडल होगा तथा बीडीपीओ व राजस्व विभाग से नायब तहसीलदार इस कमेटी के सदस्य होंगे।

3. उपमंडल लेवल कमेटी : जिले के तीनों उपमंडलों में एसडीएम नोडल अधिकारी होंगे जो विलेज व ब्लॉक कमेटी से रिपोर्ट लेंगे तथा खुद भी फिल्ड में उतरकर निरीक्षण करेंगे। 4. जिला स्तरीय कमेटी : डीसी की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में डीडीए, डीआरओ व डीडीपीओ शामिल होंगे जो पूरे जिले की ओवरऑल मॉनिटरिंग करेंगे।

किसान ऐसे कर सकते हैं फसल अवशेषों को डिकंपोज

यहां बता दें कि अक्टूबर महीने के अंत में तथा नवंबर के पहले सप्ताह में धान की जो फसल कटाई होती है उस दौरान किसान को गेहूं बिजाई के लिए कम समय मिलता है। इसलिए किसान किसान डि-कंपोजर दवाई का छिड़काव या आधा बैग यूरिया डालकर उसे जमीन में मिलाएं ताकि वह जल्दी डि-कंपोज हो सके।

हरसेक से होगी ट्रेसिंग, स्थापित होगा कंट्रोल रूम

इस बार भी फसल अवशेषों को आग लगाने वाले किसानों के खेतों की लोकेशन हरसेक के माध्यम से ट्रेस होगी। इसके अलावा लघु सचिवालय में आमजन की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा।

खेतों में पराली जलने पर पिछले साल सस्पेंड हुए थे 7 नंबरदार व 4 सरपंच

पिछले साल प्रशासन को गांव में आग लगाने की सूचना नहीं देने पर तत्कालीन डीसी धीरेंद्र खड़गटा ने जिले के गांव हिजरावां खूर्द,अहरवां, रजाबाद व भट्टू खुर्द के सरपंचों को तथा गांव दिगोह, अहरवां, भट्टू खुर्द व हिजरावां खुर्द के नंबरदारों को सस्पेंड कर दिया था।

11 लाख का अनुदान एक साल से अटका

पिछले साल सरकार ने पराली प्रबंधन करने वाले छोटे किसानों को प्रति एकड़ एक हजार रुपये का अनुदान देने की घोषणा की थी। जिले में 4 हजार एकड़ भूमि आई थी। जिसमें से 2900 एकड़ भूमि के 29 लाख ही किसानों को मिले हैं। बाकी के 11 लाख एक साल से पेंडिंग हैं।

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