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गोरखपुर गोलीकांड में फौजी को उम्रकैद:पत्नी और ससुराल वालों को कमरे में बंद कर बरसाई थीं गोलियां, दो की चली गई थी जान

10 महीने पहले
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हरियाणा के फतेहाबाद में पत्नी और ससुराल वालों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाने वाले सेना के एक जवान को कोर्ट ने कठोर उम्रकैद की सजा सुनाई है। वारदात में उसकी पत्नी की मां और मौसी की गोली लगने से मौत हो गई थी। इसके अलावा पत्नी, साली और साले की जान बच गई थी। दोषी पर कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया।

हरियाणा में हिसार के देवेन्द्र सिंह के खिलाफ फतेहाबाद जिले के भूना थाने में 23 अप्रैल 2018 को हत्या और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस को दी शिकायत में दिलबाग सिंह निवासी गोरखपुर ने बताया कि मौसी मनपति देवी ने उसे गोद ले रखा है। मौसी की बेटी सुनीता की शादी 8-9 साल पहले हिसार निवासी देवेन्द्र सिंह से हो गई थी। सुनीता फरवरी 2018 में बच्चों के साथ अपने मायके गोरखपुर आ गई और लगभग 2 महीने मायके में ही रही।

दिलबाग के अनुसार, 23 अप्रैल 2018 को उसकी चाची केलो देवी, मौसी मनपति देवी, बहन सुनीता और रामभतेरी घर पर थी। वह चौबारे में था। उसी समय जीजा देवेन्द्र सिंह स्कूटी पर घर आया और सबको एक कमरे में बंद कर लिया। इसके बाद उसने अचानक पिस्तौल निकाल ली और ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं।

उसने किसी तरह पुलिस को सूचना दी। उसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दो घंटे के ऑपरेशन के बाद देवेन्द्र सिंह को काबू किया। फायरिंग में केलो देवी व मनपति की मौत हो गई थी। अन्य सभी परिजन घायल हो गए। आरोप था कि देवेन्द्र सिंह उसकी बहन पर 14 लाख रुपए दहेज लाने के लिए दबाव डाल रहा था।

दहेज नहीं मिला तो गुस्से में आकर उन पर गोलियां बरसाई। पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 498ए, 109, 120बी, 34 आईपीसी व शस्त्र अधिनियम में केस दर्ज किया था।

फतेहाबाद की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल की कोर्ट ने देवेंद्र को हत्या का दोषी करार देते हुए शुक्रवार को उम्रकैद के साथ कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषी को 20 हजार रुपए का जुर्माना भी किया है। जुर्माना न भरने की सूरत में 6 माह की सजा अतिरिक्त भुगतनी पड़ेगी।

हत्या प्रयास में 10 साल की कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। वहीं शस्त्र अधिनियम में उसे 3 साल की कैद और 5 हजार रुपए जुर्माना की सजा दी। तीनों ही सजाएं एक साथ चलेंगी। वहीं इस मामले में दोषी के भाई अतर सिंह को कोर्ट ने संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।

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