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3 साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा:रेंट एग्रीमेंट और निरीक्षक की रिपोर्ट लिए बिना ही किया था वाहनों का पंजीकरण, इंटर स्टेट टैक्स बचाने को की गड़बड़ी

फतेहाबाद13 दिन पहले
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एसडीएम कार्यालय की 24 नम्बर खिड़की जहां होता है वाहनों का पंजीकरण। - Dainik Bhaskar
एसडीएम कार्यालय की 24 नम्बर खिड़की जहां होता है वाहनों का पंजीकरण।
  • दूसरे राज्यों के लोगों ने ‘नाउ एट फतेहाबाद’ का शपथ पत्र देकर किया घपला
  • तीन पूर्व एसडीएम, दो क्लर्कों सहित 8 लोगों पर केस दर्ज, सीएम फ्लाइंग ने की कार्रवाई

वाहनों के पंजीकरण में फर्जीवाड़े के जिस मामले में फतेहाबाद के तीन पूर्व एसडीएम, दो क्लर्कों सहित 8 लोगों पर केस किया गया है इस मामले में अधिकारियों व कर्मचारियों ने वाहन मालिकों के रेंट एग्रीमेंट व वाहन निरीक्षक की रिपोर्ट लिए बिना ही वाहनों का पंजीकरण कर दिया था। इतना ही नहीं कई वाहनों के तो चेसिस नंबर सही नहीं होने पर उन्हें स्लग कर पंजीकरण कर दिया गया।

यह मामला केस दर्ज किए गए उक्त तीन मामलों का ही नहीं है, बल्कि वाहनों के पंजीकरण में ऐसी धांधली कई सालों से चली आ रही है, ना सिर्फ दूसरे जिलों के बल्कि बिहार, राजस्थान व पंजाब सहित कई राज्यों के लोगों ने खुद को फतेहाबाद का बताकर खुद नाउ एट फतेहाबाद का शपथ पत्र देकर वाहनों का रजिस्ट्रेशन यहां करवा लिया। सीएम फ्लाइंग ने भी माना है कि यह मामला तीन सालों से भी अधिक समय से चल रहा था। पुलिस पूरे मामले की जांच में लगी हुई है।

समझिए... क्यों जरूरी है रेंट एग्रीमेंट और निरीक्षक की रिपोर्ट

बता दें कि पंजाब का कोई व्यक्ति प्रदेश के किसी जिले से गाड़ी की खरीद करता है तो उसे अपने जिले में गाड़ी नाम करवाने की एनओसी संबंधित ऑथोरिटी द्वारा दी जाती है। लेकिन हरियाणा की गाड़ी को पंजाब में नाम करवाने पर नई गाड़ी की कीमत का टैक्स भरना पड़ता है। इस टैक्स से बचने के लिए दूसरे राज्यों के लोग जिस जिले से गाड़ी खरीदते हैं वह खुद को वहीं का रहने वाला बता देते हैं।

फतेहाबाद में गाड़ी रजिस्ट्रेशन करवाते समय फतेहाबाद में रहने का शपथ पत्र देकर उसे अपने नाम करवा जाते हैं, जबकि वे फतेहाबाद में रहते नहीं हैं। इस प्रकार के पंजीकरण के समय गाड़ी मालिक से फतेहाबाद में जहां रहते हैं वहां का रेंट एग्रीमेंट या खुद के मकान के दस्तावेज लिए जाने थे लेकिन उक्त तीन सहित सैकंडों मामलों में अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया।

जानिए... किस एसडीएम ने कब किया पंजीकरण, कैसे हुई कागजों में हेराफेरी

वाहन नंबर एचआर-61ए-8000 स्कॉर्पियो के कागजात के अवलोकन से पाया कि वाहन की एनओसी आरटीए भिवानी से आरटीओ फतेहाबाद वाहन मालिक बिहार के जिला रोहताश गांव अकबर निवासी शमशीर आलम खां के नाम जारी की गई है। वाहन पंजीकरण के समय कागजात में वाहन निरीक्षक की पासिंग रिपोर्ट नहीं लगाई गई।

ई-दिशा केंद्र की रसीद में शमशीर आलम के पते की जगह फतेहाबाद लिखा हुआ है, लेकिन पंजीकरण फाइल में फतेहाबाद में निवास स्थान बारे कोई कागजात नहीं लगाया। यह फर्जीवाड़ा 1 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन एसडीएम सतबीर सिंह जांगू व पूर्व वाहन पंजीकरण क्लर्क ओमप्रकाश के समय का है। इस वाहन को पंजीकृत करके आरसी तैयार की गई है।

वाहन नंबर एचआर-88-2310 की एनओसी वाहन पंजीकरण अथॉरिटी एसडीएम बाढड़ा से वाहन पंजीकरण अथॉरिटी एसडीएम बरवाला के नाम वाहन मालिक राजेश के नाम जारी की है। लेकिन वाहन संख्या एचआर-88-2310 का पंजीकरण वाहन पंजीकरण अथॉरिटी/एसडीएम फतेहाबाद द्वारा भीम सिंह गांव डूल्ट जिला फतेहाबाद के नाम पंजीकरण किया है।

पंजीकरण फाइल में वाहन निरीक्षक की वाहन पासिंग रिपोर्ट भी नहीं लगाई और कागजों में वाहन की चेसिस नंबर के पीछे पुराना रिकार्ड छिपाने को (स्लेश) लगा दिया। इसमें तत्कालीन एसडीएम सुरजीत नैन व तत्कालीन क्लर्क ओमप्रकाश सिहाग ने वाहन मालिक भीम सिंह को फायदा पहुंचाने के लिए 25 अप्रैल 2019 को आरसी तैयार की थी।

वाहन नंबर एचआर-02एटी-6882 की एनओसी वाहन पंजीकरण अथॉरिटी जगाधरी से आरटीओ फतेहाबाद के नाम वाहन मालिक फतेहाबाद के गांव कन्हड़ी निवासी रमेश के नाम जारी की हुई है। वाहन पंजीकरण फाइल में एमवीआई की वाहन पासिंग रिपोर्ट भी नहीं लगाई गई और पंजीकरण फाइल के अवलोकन से कागजों में वाहन की चेसिस नंबर के आगे पुराना रिकार्ड छिपाने के लिए (स्लेश) लगाया हुआ है।

शिकायत के अनुसार इस फर्जीवाड़े में तत्कालीन एसडीएम संजय बिश्नोई व वाहन पंजीकरण विभाग के क्लर्क राजेश खटक ने वाहन मालिक से मिलीभगत करके 21 जुलाई 2020 को आरसी तैयार करवाई थी।

दो अधिकारी हो चुके हैं रिटायर, वर्तमान में जींद में डीएमसी हैं संजय

यहां बता दें कि जिन तीन एचसीएस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है उनमें से सतबीर जांगू व सरजीत नैन रिटायर हो चुके हैं तथा संजय इन दिनों जींद में डीएमसी हैं। इसी प्रकार जिन दोनों क्लर्कों पर केस दर्ज हुआ है वे भी यहां कई सालों तक कार्यरत रहे हैं।

डीसी ने भी मंगवाई थी फाइलें

सूत्र बताते हैं कि वाहन पंजीकरण में हाे रही गड़बड़ी को लेकर कुछ दिन पहले डीसी डॉ. नरहरि बांगड़ ने भी रजिस्ट्रेशन शाखा से कुछ फाइलें मंगवाई थी तथा उनकी जांच की थी।

दलालों के जरिए चलता था खेल

वाहन पंजीकरण में हो रही गड़बड़ी का पूरा खेल कोर्ट में बैठे दलालों के जरिए चलता है। दलाल ही कर्मचारियों के माध्यम से सेटिंग कर ऐसे वाहनों का पंजीकरण करवा जाते हैं। कई टाइपिस्ट तो ऐसे भी हैं जिनके पास लाइसेंस भी नहीं है तथा कइयों ने लंबे समय से अपना लाइसेंस रिन्यू ही नहीं करवाया है लेकिन इस तरफ अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है। दलालों के माध्यम से ही कर्मचारी विभिन्न कार्यों के 200 से लेकर हजारों रुपये तक लेते हैं।

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