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रामायण टोल प्लाजा:जाट आरक्षण आंदोलन के बाद रामायण टोल बना किसान आंदोलन का गढ़

हांसी19 दिन पहले
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जाट आरक्षण आंदोलन के पांच साल बाद रामायण टोल प्लाजा किसान आंदोलन का गढ़ बन गया है। किसान आंदोलन की तमाम छोटी-बड़ी गतिविधियां यहीं से संचालित होने लगी हैं। सीएम, डिप्टी सीएम के विरोध का फैसला हो या कमिश्नर कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम, फैसला यहीं से होने लगा है।

आंदोलन के चलते किसान जिले के चार और टोप प्लाजा पर भी डेरा डाले हैं, लेकिन बड़े किसान नेता रामायण टोल प्लाजा पर आना और ठहरना पसंद करने लगे हैं। हिसार में सीएम के घेराव का कार्यक्रम हो या टोहाना में गिरफ्तारियां देना, किसानों की रवानगी यहीं से होती है। रामायण टोल प्लाजा के मुख्य केंद्र बिंदु बनने के पीछे कई कारण हैं।

हिसार से दिल्ली जाते समय यह पहला टोल है। इसे रोकने से हिसार से दिल्ली रूट पूरी तरह बाधित हो जाता है। वहीं, टोल के आसपास सातबास से जुड़े कई गांवों के अलावा, मय्यड़, खरड़ जैसे गांव लगते हैं, जो किसान आंदोलन में भी सक्रिय हैं। यहां से किसानों का पहुंचाना आसान है। थोड़े समय के नोटिस पर इन गांवों से बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हो जाते हैं।

रामायण का नाम जाट आंदोलन से चर्चा में आया था। जाट आंदोलन के शुरू में मय्यड़ आंदोलन का मुख्य केंद्र बिंदु था। टोल प्लाजा बनने के बाद से रामायण टोल प्लाजा ही जाट आंदोलन के लिए मुख्य केंद्र बिंदु बना। वर्ष 2016 में जाट आंदोलन के बाद से जो भी कोई कार्यक्रम हुआ, वह इस टोल प्लाजा के पास ही हुआ।

रेलवे ट्रैक है बिल्कुल टोल के पास

एक और भी कारण है। यहां से इसके पास रेलवे ट्रैक है। मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। अक्सर आंदोलन में हाईवे के साथ साथ रेलवे ट्रैक को जाम करने का चलन देखा गया है। इसलिए रामायण टोल प्लाजा अब मुख्य केंद्र बिंदु है। रामायण टोल प्लाजा पर किसान नेता रवि आजाद व विकास सीसर भी नेतृत्व करने वालों में शामिल हैं। टोहाना में किसानों पर दर्ज हुए मामले में रवि आजाद व विकास सीसर गिरफ्तार हुए हैं। इसलिए इस विवाद में रामायण टोल प्लाजा फिर से मुख्य धारा में आ गया है।

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