आत्महत्या:खुदकुशी से कुछ घंटे पहले राजबीर ने, फोन पर की थी बेटे से बात- खेल पर ध्यान देना

हांसी9 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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  • बहादुरगढ़ बाइपास पर कृषि कानूनों के विरोध में किसान ने जान दी
  • बेटे से बातचीत में कहीं ऐसा नहीं लगा कि राजबीर के मन में क्या चल रहा

कृषि कानूनों के विरोध में जान देने वाले सिसाय कालीरामण के किसान राजबीर कालीरामण ने आत्महत्या करने से कुछ घंटे पहले अपने बेटे मनजीत से फोन पर बात की। मनजीत जयपुर में वुशु खेल की कोचिंग ले रहे हैं। राजबीर ने बेटे को फोन पर खेल की प्रैक्टिस के बारे में जानकारी ली। बेटे से बातचीत में कहीं ऐसा नहीं लगा कि राजबीर के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने बेटे का हौसला बढ़ाया और खेल पर ध्यान देने को कहा।

रविवार दोपहर से पहले मनजीत को पिता के इस दुनिया से चले जाने के बारे में पता चला, तो वह स्तब्ध रह गए। आनन-फानन में वह सिसाय के लिए चल पड़े। 48 वर्षीय राजबीर लघु किसान थे और एक एकड़ जमीन के मालिक थे। बेटे मनजीत ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनके पास पहले तीन एकड़ जमीन थी, लेकिन कुछ कारणों से दो एकड़ जमीन पहले बेच दी। एक एकड़ जमीन से होने वाली आमदनी से ही उनका जीवन निर्वाह हो रहा था।

राजबीर के बेटा और बेटी

राजबीर के दो बच्चे हैं। बेटा मनजीत करीब 22 साल का है और बेटी पिंकी 24 साल की है। वह घर पर ही रहती है। किसान आंदोलन की शुरुआत के साथ ही राजबीर सक्रिय हो गए। आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए वह लगातार दिल्ली जा रहे थे। मनजीत ने बताया कि बीच-बीच में वह घर और फसल संभालने के लिए आते रहते थे। फसल संभालने के तुरंत बाद आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए वह दिल्ली लौट जाते। शनिवार शाम को उनके पास पिता का फोन आया। उन्होंने खेल की प्रैक्टिस के बारे में जानकारी ली।

शाम को गांव सिसाय में किया अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार के लिए राजबीर के शव को शाम को सिसाय लाया गया। बड़ी संख्या में किसान नेताओं और किसानों ने अंतिम संस्कार में पहुंच कर राजबीर को अंतिम विदाई दी। राजबीर अमर रहे के नारों की गूंज रही। भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष जोगेंद्र नैन, यूनियन के जिला युवा प्रधान कुलदीप सहरावत खरड़, विकास सीसर, मुकेश लोहान, शमशेर लाडवा, मनदीप नाथवान, सतवीर सिसाय, सिसाय के पूर्व सरपंच अजीत कालीरामण व पूर्व विधायक रामभगत शर्मा आदि मौजूद रहे।

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