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बंदर मृत अवस्था में मिलें:पशु चिकित्सकों ने जमीन से खुदवा 16 बंदरों के शवाें काे हिसार भेजा

बरवाला12 दिन पहले
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  • बालक चाेपटा में जलघर के वाटर फिल्टर टैंक में मृत मिले थे बंदर

अग्राेहा मार्ग पर बालक चाेपटा के नजदीक गांव किराेड़ी व गांव बालक के जलघर में बुधवार शाम काे जलघर के पुराने फिल्टर वाटर टैंक में 16 बंदर मृत अवस्था में मिले हैं। आशंका है कि बंदरों की माैत जहरीला पदार्थ खाने से हुई है। जिस टैंक में बंदरों के शव मिले हैं वह फिल्टर टैंक पुराना है। इसमें कभी कभार दूसरे नए बने वाटर टैंक से पानी ओवरफ्लाे हाेकर आ जाता है। बुधवार काे टैंक में करीबन एक-डेढ फीट पानी था।

जलघर प्रांगण में वैसे ताे सैंकड़ा बंदर हैं, लेकिन जिन बंदरों की माैत हुई है उन्हें छाेड़कर सभी बंदर लगभग स्वस्थ हैं। टैंक से मृत बंदरों काे बालक चाैक पर चाय की दुकान चलाने वाले काला ने जलघर में ठेके पर कार्यरत कर्मियों की सहायता से बाहर निकाला।

बाद में मृत बंदरों काे जलघर के प्रांगण में ही मिट्टी में दबा दिया गया। बाद में जब जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों काे इसकी जानकारी मिली ताे गुरुवार काे वन्य जीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों व पशु चिकित्सकों की टीम माैके पर पहुंची।

वहीं जलापूर्ति विभाग के एसडीओ कुलदीप सिंह व जेई भी जलघर पहुंचे। पशु चिकित्सकों ने बंदरों की माैत की जानकारी जुटाने के लिए बंदरों के शवाें काे लिया कब्जे में ले लिया है। सभी मृत बंदरों काे जमीन में से निकाल कर हिसार अपने साथ ले गई। चिकित्सकों के अनुसार शवाें की जांच करने के बाद रिपोर्ट आने पर ही बंदरों की माैत के कारणाें का पता चल सकेगा।

जलघर में नहीं था काेई कर्मी : बुधवार शाम काे जब बंदरों की माैत हुई उस समय जलघर में काेई कर्मी मौजूद नहीं था। यहां कार्यरत ठेके पर लगे कर्मी विनाेद व अमरजीत ने बताया कि जलघर में काेई भी कर्मी स्थाई नहीं है। वे करीबन साढे 4 बजे जलघर से किसी काम से गए थे। बाद में उन्हें सूचना मिली।

जलघर में नया सबमर्सिबल लगा रहे ठेकेदार सुरेंद्र ने बताया कि वे यहां काम कर रहे थे। काम खत्म करने के बाद जब वे जलघर के टैंकों की तरफ गए ताे देखा कि एक टैंक में कई बंद मरे हुए पड़े हैं। उसने अमरजीत व विनाेद काे माैके पर बुलाया। आस पास के दुकानदारों की सहायता से बंदरों काे टैंक से बाहर निकाला।

जलघर के आसपास लगा रहा है बंदरों का जमावड़ा: एसडीओ

जलापूर्ति विभाग के एसडीओ कुलदीप सिंह ने बताया कि बालक चौपटा के पास बने जलघर में काफी संख्या में बंदरों का जमावड़ा रहता है। इसे लेकर कई बार वहां काम करने वाले वर्कर बंदरों की समस्या से अवगत करवा चुके हैं। गुरुवार सुबह उन्हें पुराने खाली पड़े टैंकों में करीबन 15-16 बंदरों के मरने की सूचना मिली। इस संबंध में पशु चिकित्सक व वन्य जीव संरक्षण विभाग के अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी गई। मौके पर पहुंची टीम बंदरों के शवाें को माैके से अपने साथ ले गई।

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