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जाखल:ब्लॉक कार्यालय पहुंचे मनरेगा मेट, एक गांव में सभी को समान काम देने की मांग

जाखल2 महीने पहले
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जाखल खंड के विभिन्न गांवों से मनरेगा योजना में काम कर रहे मेट अपनी समस्याओं व मांगों को लेकर मनरेगा कार्यालय पहुंचे। मनरेगा मेट यूनियन प्रधान राम लाल, उप प्रधान गुरमीत मलिया, देसराज, गुरविंद्र, गुलाब सिंह, निर्मल सिंह, लखविंदर सिंह, लवली, रामचंद्र आदि ने बताया कि ब्लॉक कार्यालय में अधिकारियों के स्थाई तौर पर न होने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्हें अपने कार्य करवाने के लिए अधिकारियों से फोन पर ही संपर्क करना पड़ता है। जिससे कई बार संपर्क न होने के कारण काम अधर में लटक जाता है। मनरेगा मेट इस बात से भी नाराज रहे कि कार्यालय से जो काम जारी होता है, वह गांव के अंदर सभी मेट को एक समान नहीं मिलता। गांव चांदपुरा में 8 मेट हैं, जिसमें 5 को काम मिल चुका है, लेकिन 3 को काम न मिलने के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके साथ ही उन्होंने माह में कम से कम 14 दिन का काम देने एवं पक्के काम के लिए मेट का भी मस्ट्रोल बनाने की मांग की।

वहीं मनरेगा के ब्लॉक अधिकारी संदीप जांगड़ा ने कहा कि गांव चांदपुरा में एक समान काम न मिलने की समस्या आई है जिसे दूर कर रहे हैं। अब के बाद पहले मेट को तभी दोबारा काम मिलेगा जब दूसरे को काम मिल चुका होगा। अधिकारियों की स्थाई नियुक्ति करना उच्चाधिकारियों के हाथ हैं। वहीं 14 दिन के को प्रदेश सरकार की ओर से ही बदल कर 7 दिन किया गया था। ताकि कोरोना काल में 7 दिन काम के बाद ही पेमेंट हो सके। वहीं पक्के काम के लिए मेट का मस्ट्रोल बनाना संबंधित गांव के सरपंच के अधीन है। वह जिससे काम करवाना चाहेगा उसके नाम का ही मस्ट्रोल तैयार होगा।

मार्केट कमेटी धारसूल में 50 दिनों से सचिव का पद खाली

अनाज मंडी धारसूल की मार्केट कमेटी कार्यालय में बीते 50 दिन से सचिव का पद खाली होने से कर्मचारियों को वेतन न मिलने के साथ सभी कामकाज ठप हैं। आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्मण दास गर्ग व शैलर एसेसिएशन अध्यक्ष नरेश भाटिया ने बताया कि धारसूल मार्केट कमेटी सचिव सुलतान सिंह का तबादला 10 नवंबर काे हिसार हो गया था। उसके बाद से यहां सचिव नहीं लगाया गया है। अधिकारी न होने की वजह से 466 किसानों की 70 हजार क्विंटल किसानों की धान की पैदावार पंजीकरण होने के बावजूद नहीं बिक पाई। जिसके बाद किसानों काे अपना धान प्राइवेट लाेगाें काे कम दाम में बेचना पड़ा। अब कर्मचारियों को वेतन न मिलने के साथ कार्यालय का काम प्रभावित हो रहा है। किसान, आढ़ती व शैलर संचालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से सचिव नियुक्त करने की मांग की है।

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