पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मौलिक शिक्षा विभाग के निर्देश:छात्र संख्या बढ़ी है तो दोबारा खोले जाएंगे मर्ज किए गए सरकारी स्कूल

झोझू कलां22 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
झोझू कलां। गांव गोकल का राजकीय स्कूल जिसे मर्ज किया गया था। - Dainik Bhaskar
झोझू कलां। गांव गोकल का राजकीय स्कूल जिसे मर्ज किया गया था।
  • 25 विद्यार्थियों के दाखिले कर ईमेल से विभाग को देनी होगी सूचना

तीन माह पहले ही विद्यार्थियों की संख्या की कमी में सरकार ने 25 से कम संख्या वाले स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया था। अब विभाग ने इन स्कूल मुखियाओं व ग्राम पंचायत को एक मौका ओर दिया गया है कि वह संबंधित स्कूल में छात्र संख्या बढ़ा सकें। इसके लिए जिला मौलिक शिक्षा विभाग की तरफ से ऐसे स्कूल संचालकों, एसएमसी कमेटी व ग्राम पंचायत को राजकीय स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

जिले में प्राइमरी व अपर प्राइमरी के लगभग 56 स्कूल ऐसे थे जिन्हें विभाग द्वारा पास के स्कूलों में मर्ज किया जाना था। स्कूल बंद नहीं होने से उन ग्रामीणों को राहत मिलेगी, जिनके बच्चे इन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे।

स्कूल बंद करने के फैसले के बाद इन ग्रामीणों में मायूसी थी। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में अधिकतर परिवार ऐसे होते है जो मजदूरी करते हैं और उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करते है। ऐसे में यहां पर स्कूल बंद होने की स्थिति में इन मजदूर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती।

तो वही कई स्कूल ऐसे में भी थे जहां से मर्ज होने वाले स्कूल की

दूरी 5 से 8 किलोमीटर तक की थी। ऐसे में अभिभावकों व ग्राम पंचायत द्वारा स्कूल में छात्र संख्या बढ़ाने की बात कहने पर विभाग की तरफ से उन्हें एक मौका दिया गया है। अगर कोई ग्राम पंचायत अपने गांव के स्कूल को मर्ज नहीं करवाना चाहती तो उसे विभाग को लिखत में आश्वासन देना होगा कि वह नए स्तर से इन स्कूलों में छात्र संख्या में सुधार करेंगे।

मौलिक शिक्षा विभाग की तरफ से निर्देश मिले हैं कि मर्ज हो चुके स्कूलों को दोबारा से खोला जा सकता है। लेकिन इन स्कूलों में स्कूल मुखिया व ग्राम पंचायत द्वारा लिखित में आश्वासन देना होगा कि वह इन स्कूलों में 25 से ज्यादा विद्यार्थियों का दाखिला करेंगे। स्कूल मुखिया द्वारा 25 विद्यार्थियों के दाखिले कर ईमेल के माध्यम से विभाग को सूचना देनी होगी। जिसके बाद ही इन स्कूलों को फिर से खोला जा सकेगा।'' -नरेन्द्र परमार, खंड शिक्षा अधिकारी।

खबरें और भी हैं...