पिकअप-ट्रक की टक्कर में 6 की मौत:तेल खत्म हुआ तो एक घंटा पैदल चले क्या पता था मौत साथ चल रही है

नारनौंदएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
दुखद हादसे के बाद नारनौंद में एक साथ जलतीं चिताएं और हादसे में परिवारजनों के खोने जाने पर शोकाकुल महिलाएं और रिश्तेदार। - Dainik Bhaskar
दुखद हादसे के बाद नारनौंद में एक साथ जलतीं चिताएं और हादसे में परिवारजनों के खोने जाने पर शोकाकुल महिलाएं और रिश्तेदार।
  • शेखर को नींद आने लगी तो सुरेश ने संभाला था स्टेयरिंग, उसे भी आई झपकी

कंडेला के पास हादसे ने नारनौंद के 6 लोगों की जान ले ली। परिवार हरिद्वार में अस्ती विसर्जन करके लौट रहा था। गांव में 6 चिताएं एक साथ जलीं। एेसा दुखद हादसा नारनौंद में पहले कभी नहीं हुआ। शवों के गांव पहुंचते ही चारों ओर चीख पुकार मच गई। हर किसी की आखें नम थीं।

घर की गाड़ी होने के कारण पूरे परिवार के लोग प्यारेलाल की अस्थियां विसर्जन करने के साथ-साथ गंगा स्नान के लिए निकले थे। वापस आते समय करनाल से 1 किलोमीटर पहले गाड़ी का तेल खत्म हो गया था। गाड़ी में तेल डलवाने के लिए पेट्रोल पंप तक 1 किलोमीटर गाड़ी को धक्का लगाकर पेट्रोल पंप पर तेल डलवाया था। उन्होंने कहा कि हमें क्या पता था मौत हमारे साथ चल रही है। इसीलिए हम एक घंटा रास्ते में तेल डलवाने के लिए लगा दिया। गाड़ी का तेल समाप्त नहीं होता तो सभी सुरक्षित अपने घर नारनौंद पहुंच गए होते।

घायल लोगों ने बताया कि हादसे के समय अधिकतर लोग सो रहे थे। पिकअप को श्याम नगर निवासी सुरेश चला रहा था। सुरेश ने कुछ देर पहले ही गाड़ी चलानी शुरू की थी। इससे पहले उसका बेटा शेखर गाड़ी को चला रहा था, लेकिन नींद आने के चलते उसने गाड़ी रोक दी और उसके बाद सुरेश ने गाड़ी का स्टेयरिंग पकड़ा।

परिवार के सदस्य भी शेखर को इसलिए साथ ले गए थे कि दो लोग गाड़ी चलाने वाले हो जाएंगे, लेकिन उसके बावजूद कंडेला के नजदीक सुरेश को नींद की झपकी आ गई और गाड़ी सीधे ट्रक से टकरा गई। यही नहीं हरिद्वार जाने के लिए जींद से सीधा वाया पानीपत से रास्ता है, लेकिन पानीपत से आगे रोड खराब होने की वजह से परिवार के सदस्य वापसी के समय हरिद्वार से करनाल वाया अलेवा, नगूरां होते हुए जींद की तरफ आ रहे थे। उन सभी को नारनौंद जाना था, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।

सुरेश जींद में श्याम नगर में रहता है। जिस जगह हादसा हुआ है, वह जगह श्याम नगर से मात्र 11 किलोमीटर दूर थी। केवल 17 मिनट का ही रास्ता बचा था, लेकिन जींद में पहुंचने से पहले ही कंडेला के पास यह बड़ा हादसा हो गया। जिस समय हादसा हुआ, उस समय पिकअप में अधिकतर लोग सो रहे थे।

इसलिए अधिकतर को हादसे का अचानक पता लगा और उनके सिर और छाती पिकअप व आपस में टकरा गए, जिससे मरने वालों व घायलों को सिर व छाती के अलावा पैर और हाथ में ज्यादा चोटें आई हैं। यहां बता दे कि नारनौंद निवासी प्यारेलाल पहले जींद के श्याम नगर में परिवार के साथ रहता था, लेकिन कुछ साल पहले अपने दो बेटों के अलावा बाकी परिवार के साथ नारनौंद जा बसा था।

उसकी शनिवार को बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पूरा परिवार गमगीन था। सोमवार को प्यारेलाल की अस्थियां विसर्जित करने के लिए परिवार के सदस्य हरिद्वार गए थे। प्यारेलाल का लड़का सुरेश व शीशपाल जींद में श्याम नगर में रहता था। दोनों ही ट्रैक्टर पर मजदूरी का काम करते हैं।

इन जानों को लील गया दुखद हादसा

मृतकों में प्यारेलाल की पुत्रवधू चंनो उम्र 45 साल, पत्नी सुरेश, पुत्र शीशपाल उम्र 39 साल, पौत्र अंकुश उम्र 15 साल पुत्र वीरभान, प्यारेलाल का बहनोई धन्ना उम्र 70 साल जो नारनौंद ही रहता था। प्यारेलाल का परिवार में भाई अर्जुन 60 वर्ष जो पंजाब के मोगा में रहता था।

वह प्यारेलाल की मौत होने पर नारनौंद आया हुआ था व प्यारेलाल की पत्नी सूरजी देवी उम्र 65 साल। इस दुर्घटना में प्यारेलाल के परिवार के 6 सदस्यों मौत हो गई। 6 में से 5 सदस्यों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार के लिए उनके शव परिजनों को सौंप दिए गए। छठा मृतक 60 वर्षीय अर्जुन सिंह प्यारे लाल का चचेरा भाई था। वह पंजाब के मोगा में रहता था। वह नारनौंद में अपने भाई के दाग पर आया हुआ था। उसके शव को उसके परिजनों द्वारा मोगा मंडी पंजाब ले जाया गया।

सुरेश पर टूटा दुखों का पहाड़

इस हादसे में मरने वाले व घायल सभी एक ही कुनबे से हैं। मरने वालों में घायल सुरेश की मां सुरजी देवी, पत्नी चन्नो, भाई शीशपाल, भतीजा अंकुश, चाचा अर्जुन शामिल है। इसके अलावा मृतक प्यारेलाल के बहनोई की भी सड़क हादसे में मौत हो गई है। इससे सुरेश पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।

35 साल पहले जींद से आकर बसा था मृतक प्यारेलाल का परिवार

प्यारेलाल सोरगर जाति से संबंध रखता था। वह परिवार के साथ लगभग 35 साल पहले जींद नहर कॉलोनी से आकर नारनौंद में बसा था। प्यारेलाल के परिवार में पांच बेटे सुरेश, शीशपाल, वीरभान, सुरेंद्र, रामपाल व एक बेटी संतोष है। इनमें से उनके दो बेटे शीशपाल व सुरेश जींद में रहते हैं।

70 वर्षीय धन्नाराम प्यारेलाल का बहनोई था, वह पीलनंगी पंजाब का रहने वाला था। उसकी भी इस एक्सीडेंट में मौत हो गई। वह भी लंबे समय से नारनौंद में रह रहा था। प्यारेलाल का परिवार ईंट भट्ठा के अतिरिक्त खुली मजदूरी का कार्य करता है।

खबरें और भी हैं...