ग्राउंड रिपोर्ट:सरकारी रिकॉर्ड में कोरोना से 12 की मौत, लोग बता रहे 60, स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल

सिसाय (हिसार)5 महीने पहलेलेखक: मनोज भयाना
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सिसाय स्थित स्वास्थ्य केंद्र, जिसमें चिकित्सक ही नहीं हैं। - Dainik Bhaskar
सिसाय स्थित स्वास्थ्य केंद्र, जिसमें चिकित्सक ही नहीं हैं।
  • सिसाय की सीएचसी में सिर्फ एक डॉक्टर, लोग सैंपल देने को तैयार नहीं
  • सरकारी तंत्र पर नहीं भरोसा, औसतन करीब 20 सैंपल ही हो पाते हैं रोज

दो गांवों सिसाय कालीरामण और सिसाय बोलान का समूह। हिसार जिले में स्थित प्रदेश का सबसे बड़ा गांव। बेशक गांव नगर पालिका बन चुका है पर परिवेश ग्रामीण है। सिसाय कोरोना के चलते इन दिनों सुर्खियों में है। कारण - गांव के लाेगाें का कोरोना से 60 से अधिक लोगों की मौत का दावा है। यह आंकड़े लोगों के अपने हैं। लोग मौतों का कारण कोरोना बताते हैं। पर स्वास्थ्य विभाग इससे इत्तफाक नहीं रखता। विभाग के पास कोरोना से 12 लोगों की मौत के आंकड़े हैं। लोग कहते हैं सच छिपाया जा रहा है। इतनी मौतें पहले कभी नहीं हुई।

‘भास्कर’ ने मंगलवार को सिसाय जाकर ग्राउंड रियलिटी चेक की। पहला पड़ाव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी रहा। सीएचसी इतनी बड़ी है कि इसके अधीन चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी एसडीएम डॉ. जितेंद्र अहलावत सीएचसी में मौजूद मिले।

सीएचसी में स्वास्थ्य कर्मियों की पूरी फौज थी। पर डॉक्टर नहीं। सीएचसी में सिर्फ एक डॉक्टर मिले। वह भी आधा दिन की ड्यूटी पर। बाकी आधा दिन उनकी ड्यूटी हांसी में लगी थी। डॉक्टर नहीं थे, तो मरीज भी नहीं दिखे। सवाल उठा कि कोरोना का फैलाव बढ़ रहा है तो संक्रमित कहां हैं।

कर्मियों का जवाब था कि लोग सैंपल ही नहीं दे रहे। सिसाय की आबादी करीब 16 हजार है। कोरोना की दूसरी लहर में अभी तक करीब चार सौ लोगों के सैंपल हुए हैं। अप्रैल में करीब एक सौ और मई में अब तक तीन सौ के आसपास। एसडीएम के सवाल पर कर्मचारियों का जवाब था कि लोग सैंपल देने को तैयार नहीं। रोज औसत 20 सैंपल ही हो पाते हैं। एसडीएम ने सैंपल बढ़ाने को कहा।

दूसरी और सैंपल की रिपोर्ट को लेकर लोग आशंकित दिखे। दूसरे पड़ाव में जोहड़ पर भैंसों को पानी पिला रहे दिलबाग बोले- महकमे वालों का भरोसा नहीं। मेरे छोटे भाई बलजीत को कोरोना पॉजिटिव बता दिया। चार-पांच दिन बाद बोले कि ठीक है।

सीएचसी से परे आरएमपी पर अधिक भरोसा

बीमार होने पर लोग सीएचसी जाने की बजाए आरएमपी से दवाएं ले रहे हैं। आसपास के शहरों में भी नहीं जा रहे हैं। लोहारी रोड पर घर के बाहर कुर्सी लगाकर बैठे प्रदीप बोले-तबीयत अधिक बिगड़ने पर शहरों में जाते हैं। मौतें तो बहुत अधिक हुई हैं, हो सकता है कि किसी और कारण से हुई हों। लोगों को समुचित उपचार न मिला हो। लोग सरकारी अस्पतालों में जाने से बच रहे हैं। बस अड्डे पर बाइक लेकर खड़े कृष्ण कुमार बोले कि सरकारी सिस्टम में जाते ही रिपोर्ट पॉजिटिव आएगी।

लोग घरों में बंद, पर काम नहीं रुके, पहले जैसे

सिसाय में किसान, कारोबारी, नौकरीपेशा और मजदूर सभी वर्गों के लोग हैं। मगर किसानों की संख्या सबसे अधिक है। लॉकडाउन में बाजार बंद मिले, कोई-कोई दुकान खुली दिखीं, लेकिन किसानी पर कोई असर देखने को नहीं मिला। सुरेंद्र बोले-गेहूं काट दी है, बेच दी है, अब आगे की तैयारी है। घरों में बैठेंगे काम कैसे चलेगा। लोग खेतों में जा रहे हैं, पशुओं को पानी पिलाने भी बाहर आना पड़ता है। खरीद केंद्र में किसान और मजदूर दोनों मिले।

सीएचसी में चिकित्सकों की यह है स्थिति

एसएमओ की ड्यूटी हिसार में आईडीएसएफ में एकमात्र महिला एमओ लंबे समय से अवकाश पर एमओ की नियुक्ति, पर हांसी भी लग रही ड्यूटी डेंटल सर्जन की ड्यूटी हिसार डेथ ऑडिट में लगी है।

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