दिव्यांगों ने समझा अपने जैसों का दर्द:300 शिक्षक, वैज्ञानिक और डाॅक्टर एक ग्रुप से जुड़े, अब संभाल रहे कमजोर-लाचारों को

हिसार9 महीने पहलेलेखक: महबूब अली
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  • वेबसाइट के माध्यम से भी कराते हैं दिव्यांगाें की समस्याओं का समाधान, प्रदेश भर में जरूरतमंदों तक पहुंच रहा लाभ

दाे दिव्यांग बच्चाें की पढ़ाई छूटी ताे सिरसा के दिव्यांग टीचर सुभाष कुलरिया ने दाेनाें बच्चाें काे अपने खर्च पर न सिर्फ कक्षा एक में एडमिशन दिलवाया बल्कि उन्हें घर पर ही पढ़ाने की अनुमति शिक्षा विभाग के अधिकारियाें से लेकर खुद पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद उन्हाेंने दिव्यांगाें की मदद करने की ठान ली।

सुभाष कुलरिया ने वर्ष 2011 में संस्था विकलांग संग उमंग बनाई। इसमें ऐसे सदस्याें काे जाेड़ा जाे बड़े पदाें पर हैं । अब संस्था में सरकारी विभाग में बड़े पदाें पर आसीन 300 सदस्य हैं। जाे दिव्यांगाें के लिए हर माह आपस मे चंदा एकत्रित कर मदद दिलाने से लेकर इंसाफ दिलाने काे तैयार रहते हैं। प्रदेश के 4 हजार से अधिक दिव्यांगाें की अभी तक मदद की जा चुकी हैं।

खासियत यह है कि संस्था साेशल मीडिया पर भी ग्रुप बनाए हैं, जिनके माध्यम से दिव्यांगाें की मदद की जाती है। िवकलांग संग उमंग नामक वेबसाइट भी लांच कर दी गई है। जिस पर दिव्यांगाें की किसी भी तरह की समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जाता है।

और कारवां बनता चला गया : संस्था के संस्थापक सुभाष कुलरिया और वरिष्ट राज्य सलाहकार एचएयू के सहायक वैज्ञानिक डा. जगदीश प्रसाद जांगड़ा ने बताया कि यदि टीम काे पता लगता है कि् प्रदेश के किसी भी िजले में दिव्यांग के अधिकाराें का हनन हाे रहा है ताे अधिकारियाें के माध्यम से उसकी मदद कराई जाती है।

अब संस्था से सिरसा के रहने वाले प्रदेश अध्यक्ष बंसीलाल टीचर , कुरुक्षेत्र के रहने वाले वरिष्ठ उप प्रधान रतन िसंह खालसा प्राध्यापक, करनाल की रहने वाली महिला विंग की अध्यक्ष ऋचा बजाज अध्यापिका, पानीपत के रहने वाले वरिष्ट उप प्रधान दल सिंह, जींद से नवनीत कुंडू,, हिसार की एकता भ्यान वरिष्ट मार्गदर्शक सहायक राेजगार अधिकारी एवं पेरा ओलंपिक खिलाड़ी समेत करीब 300 दिव्यांग अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।

दिव्यांगाें काे मुख्य धारा से जाेड़ना है

सुभाष और डॉ. जगदीश प्रसाद बताते हैं िक हमारी संस्था का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगाें काे समाज की मुख्य धारा से जाेड़ना है। साथ ही दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 में प्रदत्त प्रावधानों को धरातल पर लागू करवाना है

संस्था के लोगों ने इस तरह की लाेगाें की मदद

  • संस्था के पदाधिकारी आपस में हर माह अपने वेतन से कुछ हिस्सा एकत्रित करते हैं। जाे आवश्यकता पड़ने पर दिव्यांग जरूरतमंद के काम आता है।
  • संस्था ने हिसार और सिरसा के 6 लाेगाें काे अपने खर्च पर स्पेशल एजुकेशन डिप्लाेमा का काेर्स कराया
  • सिरसा के दिव्यांग कपिल, मनाेज और हिसार के रमेश आदि के परिवार के सदस्याें के टीबी और अन्य बीमारी से ग्रस्त हाेने पर खुद के खर्च पर इलाज कराया।
  • 30 हिसार, फतेहाबाद, साेनीपत, राेहतक के दिव्यांग बच्चाें काे खुद के खर्च पर इलाज और स्कूल में एडमिशन दिलाया।

संस्था के पदाधिकारियाें की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

सुभाष, डॉ. जगदीश के अनुसार जनहित याचिकाएं दायर कर और अधिकारियाें से मांग कर दिव्यांगाें की कई मांगाें काे पूरा कराया गया है। जिनमें मुख्य रुप से हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा में दिव्यांगजन को न्यूनतम उत्तीर्णता अंको में 5% की छूट प्रदान करने, दिव्यांग कर्मचारियों का छुट्टियों की अवधि का वाहन भत्ता न काटने , शिक्षा विभाग की ऑनलाइन तबादला नीति में दिव्यांगजन को संरक्षण प्रदान करने की मांग काे पूरा कराया गया है।

अंबाला की दिव्यांग महिला काे कार कंपनी ने रियायती जीएसटी दर पर कार नहीं देते हुए उनसे 1 लाख 25 हजार रुपये वसूल लिए थे। संस्था ने केंद्रीय मुख्य आयुक्त दिव्यांगजन काे याचिका डालकर महिला काे रिफंड वापस दिलाया गया।

जब तक शरीर में जान है यूं ही मदद करते रहेंगे

जब तक शरीर में जान है। दिव्यांगाें की मदद करते रहेंगे। कुछ लाेग दिव्यांगाें काे इज्जत नहीं देते है। संस्था प्रदेश में अब तक 200 से अधिक जागरूकता शिविर लगाकर दिव्यांगाें काे उनके अधिकाराें से अवगत करा चुकी है। हम खुद दिव्यांग है, इसलिए दिव्यांगाें की समस्याओं काे बखूबी समझ सकते हैं। लाेगाें काे भी दिव्यांगाें का सम्मान करना चाहिए
- डा. सुभाष कुलरिया, संस्थापक, विकलांग संग उमंग

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