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पहल:जिले के थैलेसीमिया पीड़ित 40 बच्चाें व बड़ाें काे हर माह खून देकर जान बचा रहे हिसार के युवा

हिसारएक महीने पहले
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थैलेसीमिया पीड़ित को ब्लड देने वाली टीम के सदस्य। - Dainik Bhaskar
थैलेसीमिया पीड़ित को ब्लड देने वाली टीम के सदस्य।
  • साेशल मीडिया पर ही युवाओं ने मुहिम चलाई है, कई सामाजिक संगठन इस ग्रुप के सदस्याें काे सम्मानित कर चुके हैं
  • यूथ डाेनर वेलफेयर साेसाइटी की मुहिम से जुड़े हैं 600 से अधिक लाेग

आज अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस है। हिसार के युवा दाेस्ताें का ग्रुप जिले के 40 से अधिक जबकि अन्य स्थानाें के करीब 200 थैलेसीमिया पीड़ित काे हर माह समय पर खून उपलब्ध करवाकर उनकी जान बचा रहे हैं। साेशल मीडिया पर ही युवाओं ने मुहिम चलाई हुई है। कई सामाजिक संगठन भी युवाओं के इस ग्रुप के सदस्याें काे सम्मानित कर चुके हैं।

हिसार के यूथ डाेनर वेलफेयर साेसाइटी के प्रधान अश्विन कुमार और सेक्रेटरी संदीप कुमार ने बताया कि करीब सात साल पहले ही उन्हाेंने जरूरतमंदाें काे खून देने की मुहिम शुरू की थी। जिसके लिए उन्हाेंने व्हाट्सएप से लेकर फेसबुक पर भी 10 से अधिक ग्रुप बनाएं हुए है। संदीप ने बताया कि हिसार के थैलेसीमिया पीड़ित 40 बच्चाें और बड़ाें काे माह में कम से कम दाे से तीन बार खून उपलब्ध करवाकर उनकी जान बचाई जा रही है।

इसके अलावा यूपी, दिल्ली, राजस्थान और पंजाब के भी 200 से अधिक पीड़िताें काे संबंधित राज्याें के अपने साथियाें की मदद से खून उपलब्ध करवाया जाता है। इसके अलावा अब तक 50 से अधिक रक्तदान शिविर भी आयाेजित किए जा चुके है। मुहिम में संदीप उर्फ मास्टर, रवि सैनी, जितेंद्र, अनिल सैनी , गाेल्डी का भी पूरा सहयाेग मिल रहा है। एक काल पर ही डाेनर खून देने के लिए दाैड़ पड़ते हैं।

क्याें मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस

अंतरराष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस प्रतिवर्ष 8 मई को सभी रोगियों को थैलेसीमिया से बचाने के लिए और उनके माता-पिता के लिए मनाया जाता है जिन्होंने बीमारी होने के बावजूद जीवन के लिए कभी आशा नहीं खोई है, और थैलेसीमिया पीड़ित लोगों को जीवन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी इसे मनाया जाता है।

जानिए.... थैलेसीमिया क्या है

सिविल अस्पताल की डिप्टी सीएमओ डा. अनामिका बिश्नाेई और डा. सुभाष खतरेजा के अनुसार थैलेसीमिया एक रक्त सम्बन्धी आनुवंशिक विकार है। इस रोग के कारण हीमोग्लोबिन की कमी तथा रक्त कोशिकाओं की कमी होती है। थैलेसीमिया किसी व्यक्ति को तभी हो सकता है जब उसके माता-पिता में कोई एक थैलेसीमिया से पीड़ित हो। आनुवंशिक प्रभाव तथा कुछ एक आवश्यक जीन फ़्रैगमेन्ट्स की अनुपस्थिति के कारण थैलेसीमिया होता है। मरीज़ में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में ऑक्सीजन का परिवहन भी कम होता है तथा लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट होती है जिस कारण अनीमिया (रक्ताल्पता) होता है। इससे शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। कई मामलों में मरीज़ की हड्डियों में विकार तथा दुर्लभ मामलों में ह्रदय रोग का खतरा भी रहता है।

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